'सैलरी डे' पर दोपहर बाद ही कैश खत्म, ग्राहकों के पसीने छूटे
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जैसी कि आशंका थी, वेतन वाले दिन बृहस्पतिवार को कैश निकालने के लिए बैंकों में वेतनभोगियों की भारी भीड़ उमड़ी। स्थिति यह रही कि दोपहर दो बजे के पहले ही कैश खत्म हो गया। जिन्हें कैश मिला, उनके चेहरे तो चमक उठे, बाकी मायूस हो गए। कुल मिलाकर सैलरी के दिन पगार निकालने में कर्मचारियों व पेंशनरों के पसीने छूट गए।
बैंक कर्मचारियों ने लोगों को 'कल जल्दी आइएगा' की सलाह के साथ्ज्ञ वापस भेज दिया। हालांकि आरबीआई ने करेंसी चेस्टों को सामान्य दिनों से ढाई गुना ज्यादा कैश भेजा था। सामान्य दिनों में 8 से 10 लाख रुपये दिए जा रहे थे, पहली तारीख को 20-20 लाख रुपये दिए गए। पर, इससे बात नहीं बनी।
सूबे में केंद्र व राज्य कर्मचारियों को मिलाकर सैलरी के रूप में सरकारी कर्मचारियों को करीब 10 हजार करोड़ रुपये मिलते हैं। प्रदेश की 16 हजार शाखाओं को पहले दिन आरबीआई ने जितना कैश उपलब्ध कराया, उससे बहुत मदद नहीं मिली।
आने वाले दो दिन बैंकों के लिए कड़ी परीक्षा के होंगे। ग्राहकों की कैश की मांग पूरी करने के लिए आरबीआई को ज्यादा मात्रा में कैश भेजना होगा।
मांग की 60 फीसदी सप्लाई
यूपी स्टेट लीड बैंक प्रभारी व बैंक ऑफ बड़ौदा के जीएम बीएस ढाका ने कहा कि बैंक शाखाओं से जितनी मांग आई, उसका 60 फीसदी ही मिल पा रहा है। शुक्रवार और शनिवार परीक्षा की घड़ी है। ग्राहकों से निवेदन किया जा रहा है कि जरूरत न होने पर लिमिट के पूरे 24 हजार न निकालें।
2000 के नोट ज्यादा, 500 के कम
बैंकों में दो हजार के नोटों की ही सप्लाई की गई है। पांच सौ के नोट कम आए। बैंक ऑफ बड़ौदा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनकी शाखाओं में दो हजार के नए करेंसी नोट ही सप्लाई किए गए। ग्राहकों की मांग के बावजूद 100, 500 के नोट कम होने से दिक्कत बढ़ी।
शुरू में कुछ को मिले 24 हजार रुपये, बाद में कैश खत्म
लखनऊ शहर में बृहस्पतिवार को पहली बार बैंक खाते में पहुंची पगार निकालने में कर्मचारियों और पेंशनरों के पसीने छूट गए। घंटों कतार में लगने के बाद भी ज्यादातर को पर्याप्त नकदी नहीं मिली। शुरुआत में कुछ को 24 हजार रुपये जरूर मिले लेकिन दोपहर बाद बैंकों में कैश खत्म होने से काफी लोग खाली हाथ लौट गए। ज्यादातर एटीएम खाली रहने से लोगों को परेशानी और बढ़ गई।
जिन एटीएम में रकम थी भी वहां भीड़ होने से कुछ देर में शटर गिर गए। बैंक से पर्याप्त रुपये नहीं मिलने से कर्मचारियों के माथे पर घर खर्च की चिंता साफ नजर आई। वहीं, सरकारी कर्मचारियों व पेंशनरों के लिए शासन और बैंकों की तरफ से बेहतर व्यवस्था करने के दावे खोखले रहे। ज्यादातर बैंक शाखाओं में अलग काउंटर भी नहीं दिखे।
बृहस्पतिवार को महीने की पहली तारीख होने से बैंकों में गहमागहमी रही। अफसर, कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी से लेकर सीनियर सिटीजन तक नकदी निकालने पहुंचे। सचिवालय के बाहर, अंदर और योजना भवन में एटीएम सुबह से ही बंद रहे। सचिवालय में एसबीआई के बाहर सीनियर सिटीजन, कर्मचारी और सामान्य जन एक ही लाइन में लगे रहे।
ये रहे हालात
पुलिसकर्मी चार-पांच लोगों को बारी-बारी से बैंक में भेज रहे थे। करीब 12 बजे तक लोगों को 24-24 हजार रुपये दिए गए उसके बाद कैश कम होने से निकासी की सीमा कम कर दी गई। एसबीआई की सचिवालय शाखा के सहायक महाप्रबंधक मयंक शेखर ठाकुर का कहना था कि कैश उपलब्ध होने तक भुगतान किया जाएगा।
कई को मिले 2 हजार के 12 नोट
एसबीआई की अशोक मार्ग स्थित शाखा में पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों-कर्मचारियों के सैलरी अकाउंट हैं। दोपहर बाद तक खाते में सैलरी ही नहीं आई। कई लोग 24 हजार रुपये की चेक लेकर आए लेकिन उनसे चेक पर कम रकम भरने को कहा गया।
यहां लोगों को पांच-पांच हजार रुपये मिले जबकि काफी लोग बिना रुपया लिए ही लौट गए। पावर कार्पोरेशन से सेवानिवृत्त अधिकारी विपिन कांत का कहना था कि अभी तक पिछली पेंशन से काम चल रहा था लेकिन अब समस्या बढ़ेगी।
छोटी खरीद पर 2000 रुपये के छुट्टे नहीं मिल रहे हैं। कई को तो दो-दो हजार के 12 नोट मिले। उधर, पीएनबी, यूको बैंक, इलाहाबाद समेत अन्य बैंकों में भी कर्मचारियों को कैश निकालने दिक्कत रही।
ज्यादा कैश आने के बाद भी किल्लत
एसबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को करेंसी चेस्ट से बैंकों को ज्यादा नकदी मिली। अभी तक रोजाना आठ से 10 लाख रुपये का फ्लो था। वेतन निकासी के चलते इसे 20 लाख रुपये किया गया। चूंकि सभी 24-24 हजार रुपये की चेक लेकर आए थे, इसलिए कैश की कमी रही।
...जैसे लॉटरी लग गई
सचिवालय की एसबीआई शाखा में लगभग सवा घंटे लाइन में लगने के बाद कर्मचारी दिनेश चंद्र मिश्र को 24 हजार रुपये मिले तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि जैसे उनकी लॉटरी लग गई। वहीं, रिटायर हो चुके गिरीश चंद्र तिवारी ने बताया कि बुजुर्गों को एक -दो घंटे तक लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके बाद भी कैश मिलने की गारंटी नहीं। कम से कम सीनियर सिटीजन के लिए अलग इंतजाम करने चाहिए।
पांच हजार ही मिले
शक्ति भवन में तैनात कर्मचारी अशोक कुमार वर्मा एक घंटे तक लाइन में लगे। 24 हजार का चेक लेकर गए थे पर बैंककर्मियों ने पांच हजार का चेक लेने को कहा। अशोक कुमार ने बताया कि महीने की शुरुआत में काफी खर्च होते हैं, पांच हजार से कैसे काम चलेगा।