{"_id":"a86fb941d22ed15a053d0a7d9a144307","slug":"no-blood-bank-in-rlb-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक बूंद खून की कीमत नहीं समझ रहा प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक बूंद खून की कीमत नहीं समझ रहा प्रशासन
मनीष कुमार सिंह/लखनऊ
Updated Wed, 25 Sep 2013 01:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी डेंगू की चपेट में है। ऐसे हालात में भी प्रशासन को मरीजों के लिए
विज्ञापन
सबसे जरूरी ब्लड की कद्र नहीं है। शहर का अकेला सेटेलाइट ब्लड बैंक महीनों
से धूल फांक रहा है।
दरअसल, राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल में पिछले छह महीने से सेटेलाइट ब्लड यूनिट खराब पड़ी है। न कोई देखने वाला है, न ही कोई पड़ताल करने वाला।
यह हाल तब हैं, जबकि यह राजधानी की पहली सेटेलाइट यूनिट है। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल को फ्रीजर न मिलने की वजह से यहां ब्लड बैंक का काम ठप पड़ा हुआ है।
अस्पताल के सीएमएस डॉ. वी के शुक्ला ने बताया कि वह निदेशालय को पिछले छह महीनों में तीन से चार बार लिखित शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई।
विज्ञापन
इस यूनिट के काम न करने पर आस-पास से आ रहे मरीजों को खासा दिक्कत हो रही है। लोगों को सिविल, बलरामपुर अस्पताल और केजीएमयू के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
सोचने वाली बात यह है इस यूनिट का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज के मदर ब्लड बैंक के तौर पर होना था।
दरअसल, राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल में पिछले छह महीने से सेटेलाइट ब्लड यूनिट खराब पड़ी है। न कोई देखने वाला है, न ही कोई पड़ताल करने वाला।
यह हाल तब हैं, जबकि यह राजधानी की पहली सेटेलाइट यूनिट है। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल को फ्रीजर न मिलने की वजह से यहां ब्लड बैंक का काम ठप पड़ा हुआ है।
विज्ञापन
अस्पताल के सीएमएस डॉ. वी के शुक्ला ने बताया कि वह निदेशालय को पिछले छह महीनों में तीन से चार बार लिखित शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई।
विज्ञापन
इस यूनिट के काम न करने पर आस-पास से आ रहे मरीजों को खासा दिक्कत हो रही है। लोगों को सिविल, बलरामपुर अस्पताल और केजीएमयू के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
सोचने वाली बात यह है इस यूनिट का इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज के मदर ब्लड बैंक के तौर पर होना था।