विवेक हत्याकांड: सलाखों के पीछे रहेगा बर्खास्त सिपाही प्रशांत, जमानत अर्जी खारिज
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लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के आरोप में बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी अभी सलाखों के पीछे रहेगा। जिला न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने सोमवार को उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी और कहा कि जघन्य अपराध करने वाला लोकसेवक जमानत का अधिकारी नहीं है।
कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आरोपी पुलिस में तैनात था और लोकसेवक होते हुए जघन्य वारदात को अंजाम दिया। पुलिस द्वारा उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। हत्या जैसा जघन्यतम अपराध करने वाला लोकसेवक जमानत का अधिकारी नहीं है।
इससे पहले प्रशांत चौधरी की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए शासकीय अधिवक्ता मनोज कुमार त्रिपाठी ने कहा कि प्रशांत चौधरी एक लोकसेवक था। उसने सूझबूझ का परिचय दिए बगैर निर्दोष व्यक्ति की अकारण गोली मारकर हत्या की थी। आरोपी द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृति का था।
बचकर गाड़ी निकालनी चाही तो मार दी गोली
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रखर निगम ने कोर्ट में तर्क दिया कि वादिनी और वारदात की चश्मदीद विवेक तिवारी की पूर्व सहकर्मी ने गोमतीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि विवेक के साथ एसयूवी से अपने घर जा रही थी।
रास्ते में गोमतीनगर विस्तार में दो पुलिसकर्मियों ने विवेक की गाड़ी रोकने का प्रयास किया। विवेक ने बचकर गाड़ी निकलानी चाही तो आरक्षी संदीप कुमार ने सहकर्मी को डंडा मारा और प्रशांत ने पिस्टल से गोली चलाई, जिससे विवेक की मौत हो गई।