यूपी, बिहार के लिए तैयार गडकरी का 'डेवलपमेंट प्लान'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खराब राष्ट्रीय राजमार्गों की दशा सुधारने के काम में बेरोजगार सिविल इंजीनियर लगाए जाएंगे। नए राजमार्गों के निर्माण के लिए जल्द ही यूपी सरकार के साथ स्टेट सपोर्ट एग्रीमेंट किया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीणों के लिए चलाई जा रही मुफ्त आवास योजना में अनुदान राशि भी बढ़ाई जाएगी। कई महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ये बातें कहीं।
सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पत्रकारों से रूबरू हुए। उनके पास ग्रामीण विकास, पेयजल, स्वच्छता और पंचायतीराज विभाग भी हैं।
यूपी से संबंधित एक सवाल पर उन्होंने कहा, रोड एम्बुलेंस का इस्तेमाल करके सड़कों की स्थिति काफी सुधारी जा सकती है। बेरोजगार सिविल इंजीनियरों को ट्रेनिंग देकर इस काम में लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने ‘ब्रिज कम बैराज’ बनाने का फैसला किया है। यानी, जहां ब्रिज बनाए जाएंगे, वहां पानी रोककर खेती आदि में इसके इस्तेमाल की व्यवस्था भी की जाएगी। यूपी और बिहार को इसका खास फायदा मिलेगा।
घर बनाने के लिए देंगे धन
गडकरी ने कहा, 70 हजार रुपये में मकान नहीं बन सकता। इसलिए ग्रामीणों के लिए मुफ्त आवास योजना में ज्यादा धनराशि देने पर विचार चल रहा है। उन्होंने टोल टैक्स बूथ पर वेइंग ब्रिज बनाने की बात भी कही ताकि ओवरलोडिंग की स्थिति में अधिक टैक्स वसूला जा सके। हालांकि, दस फीसदी तक ओवरलोडिंग माफ कर दी जाएगी।
उन्होंने स्वीकारा कि पीपीपी मोड में राजमार्गों के निर्माण होने से उतने अंडरपास या फ्लाईओवर नहीं बनाए गए जितने की जरूरत है। इससे हादसे बढ़ रहे हैं। अब इस पर मोदी सरकार खास ध्यान देगी। कहा, हादसों पर काबू पाने के लिए जल्द ही रोड सेफ्टी बिल भी लाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि टोल टैक्स की प्री पेड व्यवस्था के लिए आईसीआईसीआई बैंक से अनुबंध किया गया है। कुछ जगहों पर बतौर पायलट प्रोजेक्ट इसे शुरू भी किया जा रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, लागत निकलने के बाद कहीं भी टोल टैक्स नहीं वसूला जाएगा लेकिन यूपी के पीडब्ल्यूडी मंत्री ने उनसे मिलकर राजमार्गों पर टोल टैक्स को लेकर एतराज जताया था। अगर हम टोल टैक्स नहीं वसूलेंगे, तो अच्छी सेवा भी नहीं दे पाएंगे।
हर दिन 30 किमी सड़क का लक्ष्य
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अगले दो साल में 30 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क बनाने का लक्ष्य रखा है। सौ दिन में 54 में से 33 प्रोजेक्ट्स को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की एनओसी दिलाई जा चुकी है। पीपीपी मोड के 34 प्रोजेक्ट्स से ठेकेदारों ने हाथ खींच लिए। इन्हें पीपीपी मोड में बनाया जाएगा।
अमर उजाला ने उनसे पूछा कि जिस जिले में आदिवासी है ही नहीं, वहां आदिवासियों के बारे में रिपोर्ट मांगकर राजमार्गों का निर्माण कार्य क्यों लटकाया जाता है? इस पर गडकरी ने कहा, इस प्रक्रिया को सरल बनाने पर विचार हो रहा है।
बस पोर्ट और ई- रिक्शा
गडकरी ने बताया कि एयरपोर्ट की तर्ज पर ही देश में बस पोर्ट बनाए जाएंगे। इनका निर्माण बीओटी (बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) मोड में किया जाएगा।
आदमी को आदमी खींचे, यह बहुत अमानवीय है। इसलिए ई-रिक्शा को अनुमति देना जरूरी है। इसके लिए दस दिन के भीतर अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
15 पैसे प्रति लीटर में साफ पानी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ज्यादातर राज्यों में साफ पानी के प्लांट बिजली की किल्लत से काम नहीं कर पा रहे हैं। अब सौर ऊर्जा से चलने वाले प्लांट लगाए जाएंगे। हवा से भी पानी का शोधन किया जा सकता है, जिसमें मात्र 15 पैसे प्रति लीटर का खर्च आता है।
इस तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की योजना है। गडकरी के अनुसार गांवों में टॉयलेट इस्तेमाल न होने की मुख्य वजह पानी का ठीक इंतजाम न होना है। इसके लिए कंसल्टेंट एजेंसियों की मदद ली जा रही है। जल्द ही हम राज्यों को कम से कम 25 ऐसी तकनीक देंगे, जिससे सस्ते और अच्छे टॉयलेट बनाए जा सकें।
गंगा में नौ परिवहन पर जोर
गंगा में ऐसे प्रयोगों को और बढ़ाया जाएगा। पानी पर तैरने वाले रेस्टोरेंट भी बनेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनके अधीन विभाग देश की जीडीपी में दो प्रतिशत योगदान दे सकें, इसके लिए कारगर रणनीति बन रही है।
हर 50 किमी पर रेस्टोरेंट व बाजार
राजमार्गों पर हर 50 किलोमीटर पर वाशरूम, पीने का साफ पानी, रेस्टोरेंट, पार्किंग सुविधा और हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट सामान की बिक्री की भी योजना है। जगह-जगह हेलीपैड भी बनाए जाएंगे।
तीन साल में कम से कम पांच स्थानों पर यह सहूलियतें देने की योजना है। पानी, बिजली और गैस पाइप लाइन हाईवे के नीचे से गुजारने की प्लानिंग भी है। साथ ही राजमार्ग मंत्रालय ऐसी वेब पोर्टल तैयार करवा रहा है, जिस पर किसी भी सड़क के बारे में पूरी जानकारी रहेगी।