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राम मंदिर के लिए गठित ट्रस्ट पर निर्मोही अखाड़ा ने उठाए सवाल, बोले- इसमें कई खामियां

Thu, 13 Feb 2020 06:58 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, अयोध्या Published by: ishwar ashish Updated Thu, 13 Feb 2020 06:58 PM IST
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Nirmohi akhara raises questions on ram mandir trust
- फोटो : अमर उजाला

राममंदिर के लिए गठित ट्रस्ट को लेकर निर्मोही अखाड़े में असंतोष गहरा रहा है। निर्मोही अखाड़ा के सरपंच राजा रामचंद्राचार्य ने कहा कि नए ट्रस्ट में कई खामियां हैं। सरकार ने ट्रस्ट गठन के दौरान निर्मोही अखाड़ा की राय नहीं ली। निर्मोही अखाड़ा का जो प्रतिनिधित्व दिया है, वह अधिकार विहीन बताया जा रहा है। कहा कि नए ट्रस्ट को लेकर पंचों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने के भी संकेत दिए।

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सुप्रीम कोर्ट से 9 नवंबर को रामलला के पक्ष में आए फैसले में प्रमुख पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के लिए सिर्फ इतना निर्देश था कि नए ट्रस्ट में सरकार प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करेगी। सरकार ने निर्मोही अखाड़े के अयोध्या के महंत दिनेंद्र दास को ट्रस्टी नियुक्त किया है। अब ट्रस्टी की स्वीकारोक्ति के आए दस्तावेज पर अंतिम निर्णय के लिए अहमदाबाद से मंगलवार देर रात अयोध्या पहुंचे सरपंच राजाराम चंद्राचार्य ने बुधवार को संत-महंतों के साथ बैठक कर ट्रस्ट गठन पर सवाल उठाया।
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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा को ट्रस्ट में रखने की बात कही थी। निर्मोही अखाड़ा एक संस्था है, यहां एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पंचायती व्यवस्था है। महंत दिनेंद्र दास को ट्रस्टी बनाते समय पंचों से कोई   राय नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को लेकर असहमति है। अब जो ट्रस्ट गठित हुआ है, उसको लेकर सभी पंचों के साथ बाद में चर्चा करेंगे। ट्रस्टी बनाए गए महंत दिनेंद्र दास की भी राय ली जाएगी। इसके बाद इस प्रस्ताव को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाएंगे।
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उन्होंने समुचित प्रतिनिधित्व न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट जाने का संकेत देेते हुए कहा कि सरकार यदि उनसे पूछेगी तो जवाब जरूर देगें, नहीं तो  कानूनी मार्ग खुला हुआ है। कहा कि हमारी इच्छा है कि अयोध्या में दिव्य-भव्य राममंदिर बने। अब इस कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए राममंदिर अतुलनीय व अलौकिक बनना चाहिए।

जमीन बेच लड़ा मुकदमा

हिंदू पक्षकार राजा रामचंद्राचार्य ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा ने जमीन बेचकर मुकदमा लड़ा है। यदि हम हाईकोर्ट न गए होते थे तो 2.77 एकड़ भूमि मुस्लिमों के पास चली जाती। बावजूद इसके निर्मोही अखाड़ा की सरकार द्वारा घोर उपेक्षा की गयी है। ट्रस्ट गठन में मनमानी हुई। पंचों से राय नहीं ली गई।

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