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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Nikay Chunav: Muslims did not get support, Dalits also left BSP's hand, after the assembly a shock

Nikay Chunav : मुस्लिमों का नहीं मिला साथ, दलितों ने भी छोड़ा बसपा का हाथ, विधानसभा के बाद करारा झटका

Sun, 14 May 2023 12:40 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 14 May 2023 12:40 AM IST
सार

नगर निकाय चुनाव 2017 की बात करें तो दो नगर निगमों में महापौर पद बसपा ने कब्जाकर दूसरे स्थान पर जगह बना ली थी। कुल 16 में से 14 पदों पर भाजपा का कब्जा हुआ था जबकि मेरठ और अलीगढ़ में बसपा ने भाजपा का विजयी रथ रोक दिया था।

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Nikay Chunav: Muslims did not get support, Dalits also left BSP's hand, after the assembly a shock
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

विस्तार

चार बार उप्र में सत्ता के शिखर तक पहुंची बसपा के दुर्दिन जारी हैं। नगर निकाय चुनाव का परिणाम आया तो बसपा दूसरे नंबर से खिसककर जीरो पर पहुंच गई। बसपा प्रमुख मायावती ने इस चुनाव में दलित मुस्लिम समीकरण साधा था लेकिन मुस्लिमों ने ही बसपा का साथ नहीं दिया। उल्टा काडर वोटर दलितों ने भी बसपा को एकतरफा वोट नहीं किया। परिणाम यह रहा कि बसपा इस बार महपौर पद पर खाता भी नहीं खोल पाई।

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नगर निकाय चुनाव 2017 की बात करें तो दो नगर निगमों में महापौर पद बसपा ने कब्जाकर दूसरे स्थान पर जगह बना ली थी। कुल 16 में से 14 पदों पर भाजपा का कब्जा हुआ था जबकि मेरठ और अलीगढ़ में बसपा ने भाजपा का विजयी रथ रोक दिया था। सपा और कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुला था। इस बार बसपा भी चारों खाने चित हो गई और उसकी मेरठ और अलीगढ़ की सीट भी भाजपा ने जीत ली। इसके अलावा आगरा, झांसी व सहारनपुर में बसपा नंबर दो पर ही थी। सहारनपुर में तो बसपा ने जमकर मुकाबला किया था और मामूली अंतर से ही हारी थी। चूंकि सहारनपुर में बसपा का काडर वोटर काफी है, इसलिए इस बार भी माना जा रहा था कि बसपा वहां तगड़ा मुकाबला करेगी।
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बसपा ने इस बार दलित मुस्लिम दांव खेला। 17 में से 11 महापौर प्रत्याशी के रूप में मुस्लिमों को टिकट दिया था। बसपा थिंक टैंक का मानना था कि यदि दलितों के साथ मुस्लिम आ गए तो नैया पार हो ही जाएगी। चूंकि विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों ने सपा का साथ दिया था पर सपा सत्ता प्राप्त नहीं कर सकी थी। ऐसे में बसपा मुस्लिमों को यह संदेश देना चाहती थी कि दलित मुस्लिम समीकरण से ही भाजपा को रोका जा सकता है और यह समीकरण बसपा के पास है। बावजूद इसके यह गणित पूरी तरह से फ्लॉप ही साबित हुई। मुस्लिम भी बंटे तो दलितों ने भी अपना वोट बांटा। इससे पहले विधानसभा चुनाव में भी बसपा की दुर्गति हुई थी। बसपा का मात्र एक विधायक ही जीता था। ऐसे में यह माना जा रहा था कि इस बार बसपा मेहनत कर रही है और नगर निकाय चुनाव में कुछ इसकी भरपाई करेगी पर ऐसा नहीं हो पाया।
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वर्ष 2017 में बसपा का प्रदर्शन
महापौर  02
पालिका अध्यक्ष   29
पंचायत अध्यक्ष    45
पार्षद  147
पालिका सदस्य  262
पंचायत सदस्य   218

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