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गृहकर: जीआईएस सर्वे पर नगर निगम ने लगाई रोक, गड़बड़ियों के चलते लिया गया फैसला

Thu, 17 Nov 2022 06:20 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 17 Nov 2022 06:20 PM IST
सार

लखनऊ नगर निगम ने जीआईएस सर्वे पर रोक लगा दी है। गड़बड़ियों के चलते यह फैसला लिया गया है। सर्वे के तहत दो माह तक इस पर अमल नहीं होगा।

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Ngar Nigam meeting in Lucknow.
सदन में कार्रवाई के दौरान मेयर संयुक्ता भाटिया व नगर आयुक्त। - फोटो : amar ujala

विस्तार

छह लाख शहरवासियों पर बोझ बढ़ाने वाले गलत तरीके से किए गए जीआईएस सर्वे पर नगर निगम सदन ने रोक लगा दी है। अब जीआईएस सर्वे के तहत जारी नोटिसों और उसके तहत टैक्स वसूली पर दो महीने तक रोक रहेगी। जीआईएस सर्वे में तमाम गड़बड़ियों को लेकर सभी दलों के पार्षद इसे निरस्त करने की मांग कर रहे थे, लेकिन महापौर ने फिलहाल इसे दो महीने के लिए स्थगित करने और बाद में समीक्षा के बाद आगे की कार्यवाही करने का भरोसा दिया।

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जीआईएस सर्वे में गड़बड़ियों का मुद्दा अमर उजाला ने बीते माह प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद पार्षद सर्वे निरस्त करने का प्रस्ताव सदन में लाए। महापौर ने नगर निगम चुनाव को देखते हुए व्यापारियों की मांग पर सीलिंग, कुर्की की कार्रवाई भी दो माह के लिए रोक दी है। वहीं, हर वार्ड में 25 नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें भी दी जाएंगी। इसके साथ सफाई में सुधार के लिए कार्यदायी संस्था के जरिये 1500 सफाई कर्मचारी रखे जाने का प्रस्ताव भी पास हुआ।
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गृहकर जीआईएस सर्वे सामने आ रही गड़बड़ियों पर सपा पार्षद दल नेता यावर हुसैन रेशू ने सदन में कहा कि पूरा सर्वे गलत है। इसमें 500 वर्ग फीट का मकान 2000 वर्ग फीट का दिखाया जा रहा है। मकान को दुकान बताकर टैक्स कॉमर्शियल कर दिया जा रहा है। पॉलिथीन डालकर बनी झुग्गी और डिवाइडर को मकान बताकर टैक्स का नोटिस जारी कर दिया गया। नगर निगम 5.68 लाख मकानों से टैक्स लेता है, लेकिन सर्वे में 8.50 लाख मकान कर दिए गए। नगर निगम में जो मकान दर्ज हैं उनमें करीब 2.50 लाख मकानों का डेटा ही रिकॉर्ड से मैच नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर सर्वे फर्जी है, इसे निरस्त किया जाए। 
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कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी, भाजपा पार्षद दल के उप नेता कौशलेंद्र द्विवेदी, पार्षद रामकृष्ण यादव, गिरीश मिश्र, दिलीप श्रीवास्तव, शैलेंद्र सिंह बल्लू, मो. सलीम, मुन्ना मिश्रा ने भी सर्वे को निरस्त करने के प्रस्ताव का समर्थन किया। इस पर सफाई देने आए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह ने सदन को बताया कि सर्वे का काम 2020 से चल रहा है। शुरू में काम सही हुआ, लेकिन बाद में गड़बड़ियां आईं, जिन्हें सुधारा जा रहा है।

सर्वे के बाद जोन चार व कई अन्य जोनों में गृहकर से आय भी बढ़ी है। इस पर पार्षद सहमत नहीं हुए तो महापौर ने जीआईएस सर्वे दो माह के लिए स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि बिना गड़बड़ी दूर किए आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी। दो महीने बाद इसकी समीक्षा होगी, फिर आगे का निर्णय होगा।

जनता पर बोझ बढ़ाने वाले फैसलों पर भी मुहर

सदन में जनता पर भार बढ़ाने वाले कई फैसलों को भी हरी झंडी दे दी गई। इसके बाद नक्शा पास कराने का शुल्क, वेंडिंग शुल्क और गाय व कुत्तों के लाइसेंस शुल्क में बढ़ोत्तरी लागू हो गई है। झूलेलाल वाटिका का किराया व ट्रांसपोर्ट नगर पार्किंग शुल्क की दरें भी बढ़ गई हैं। इसके साथ ही शहर में चलने वाली ट्रेवेल एजेंसियों, पेट्स क्लीनिक के लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य हो गया। इसके लिए लाइसेंस शुल्क देना होगा। निगम की आय बढ़ाने वाले इन प्रस्तावों को कार्यकारिणी पहले ही मंजूरी दे चुकी है।

दो गुना हुआ मानचित्र पास करने पर लगने वाला शुल्क
एलडीए जो मानचित्र पास करता है, उस पर नगर निगम से भी अनापत्ति ली जाती है। इसमें नगर निगम अभी तक 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मलबा/अंबार शुल्क लेता है। इसे नगर निगम सदन ने 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। इसी तरह सुदृढ़ीकरण शुल्क 100 रुपये वर्ग मीटर से बढ़ाकर 192 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया है।

तीन गुना हो गया झूलेलाल वाटिका का किराया
गोमती तट स्थित झूलेलाल वाटिका में व्यावसायिक आयोजन का एक दिन का किराया 40 हजार से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं, सरकारी आयोजन का किराया 10 हजार रुपये, यदि सरकारी आयोजन व्यवसायिक है तो 25 हजार रुपये लिया जाएगा। यदि व्यावसायिक आयोजन की बुकिंग 15 दिन या उससे अधिक के लिए कराई जाएगी और उस दौरान कई आवेदक होंगे तो बुकिंग के लिए ई टेंडर किया जाएगा।

गाय और कुत्ता पालने का शुल्क बढ़ा
नगर निगम सदन ने गाय पालने का लाइसेंस का शुल्क सालाना 30 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये करने को मंजूरी दे दी है। इसी तरह विदेशी कुत्तों का लाइसेंस शुल्क 500 से बढ़ाकर 1000 रुपये किया गया है।

फूड वैन को जारी होगा वेंडिंग लाइसेंस
नगर निगम सदन ने मोबाइल फूड वैन से शुल्क लिए जाने के प्रस्ताव मंजूरी दे दी। अब फूड वैन को वेंडिंग लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके लिए सालाना 3600 रुपये शुल्क लिया जाएगा।

दो गुना हुआ पोस्टर लगाने पर जुर्माना
बिना अनुमति सार्वजनिक जगहों पर पोस्टर लगाने वालों से अब दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा। नगर निगम सदन ने इसका प्र्रस्ताव पास कर दिया है। इसके बाद जुर्माना 10 हजार की जगह 20 हजार रुपये किया गया है। इसी तरह तय समय में जुर्माना न जमा करने पर दंड शुल्क भी 500 की जगह 1000 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।

तीन गुना हुआ ट्रांसपोर्टनगर पार्किंग का शुल्क
वाहन                                पुराना शुल्क  नया शुल्क
कार व छह पहिया                     40         100
छह से अधिक 10 पहिया तक        60          200
10 पहिया से अधिक                 100         300
बस                                    300         300

सपा विधायक के बयान पर नगर निगम सदन में बवाल

नगर निगम सदन के पदेन सदस्य सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के बयान पर बृहस्पतिवार को मौजूदा महापौर व पार्षदों के कार्यकाल के अंतिम सदन की बैठक में बवाल हो गया। विधायक ने कहा, नगर निगम गुजरात की तीन कंपनियों को सालाना 15 करोड़ रुपये लाभांश दे रहा है। इस कारण विकास कार्यों के लिए पैसे का संकट है। इस पर भाजपा पार्षद हंगामा करने लगे और कहा कि आरोप गलत है। इस पर विधायक ने कहा, यदि उनकी बात गलत होगी तो वह सदन में माफी मांगेंगे। हालांकि, इससे बवाल थमा नहीं और सपा व भाजपा के पार्षद आमने-सामने आ गए।

महापौर के निर्देश पर अपर नगर आयुक्त अभय पांडेय ने बताया कि किसी कंपनी को लाभांश नहीं दिया जा रहा है। म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी कर नाफेड, यूपीसीएल और यूपी कोऑपरेटिव बैंक सहित उन 18 कंपनियों को ब्याज दिया जाता है, जिनसे 200 करोड़ जुटाए गए हैं। इसके बाद भाजपाई और हमलावर हो गए। बवाल बढ़ता देख महापौर ने सदन स्थगित कर दिया और चली गईं। विधायक  रविदास भी सपा पार्षदों के सुरक्षा घेरे में बाहर निकल गए। करीब पौन घंटा सदन स्थगित रहने के बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो भाजपा पार्षद रामकृष्ण यादव, दिलीप श्रीवास्तव, कौशलेंद्र द्विवेदी, रजनीश गुप्ता ने फिर मुद्दा उठाते हुए कहा कि सपा विधायक गलत बयान के लिए माफी मांगे।

उधर, सपा पार्षद दल के नेता रेशू ‘जनता का धन बर्बाद किया’ के नारे लगाते रहे। इसी बीच म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने पर नगर निगम को पुरस्कृत किए जाने की बात बताने के साथ यूपीडेस्को की ओर से दिए गए प्रशास्ति पत्र, मोमेंटो को दिखाया गया। इसके बाद फिर हंगामा शुरू हो गया, जो आधे घंटे तक चला। कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी और भाजपा पार्षद दिलीप के बीच जबरदस्त नोकझोंक  हुईं। भाजपाई मांग उठाते रहे कि सपा विधायक को सदन में माफी मांगने के लिए बुलाया जाए। इस दौरान एक ओर से ‘योगी-मोदी जिंदाबाद’ तो दूसरी ओर से ‘अखिलेश यादव जिंदाबाद’ के नारे लगे। दोनों दलों के वरिष्ठ पार्षदों ने मामला शांत कराया।

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