जानें 'टीम अखिलेश' में किसकी ताकत बढ़ी तो कौन हुआ कमजोर
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मंत्रियों को विभागों के बंटवारे में उनकी सियासत और छवि का खास ख्याल रखा गया। सियासी समीकरणों का ही नतीजा है कि गोंडा में तमाम आरोपों से घिरे विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को अखिलेश की टीम में खासी तवज्जो मिली।
सपा मुखिया मुलायम सिंह के करीबी और उनके संसदीय क्षेत्र के क्षत्रप बलराम यादव को भी कैबिनेट में महत्वपूर्ण जगह मिली है। लेकिन पारस नाथ यादव और महबूब अली के खिलाफ शिकायतों की वजह से उनका कद घटा दिया है।
रघुराज प्रसाद सिंह राजा भैया, दुर्गा प्रसाद यादव और अवधेश प्रसाद को भी अपेक्षाकृत कम महत्व के विभाग मिले हैं। विभागों के आवंटन में अहमद हसन की अहमियत बरकरार रही हालांकि उनका विभाग बदल दिया गया है।
शिक्षामित्रों की चुनौती से अब अहमद हसन जूझेंगे
अहमद हसन को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नजदीकी माना जाता है। सेहत की वजह से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लेकर उन्हें बेसिक शिक्षा विभाग दिया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग को भी अहम माना जाता है, लेकिन शिक्षामित्रों की नियुक्ति रद्द किए जाने के हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस महकमे की भूमिका और खास हो गई है। 2017 के चुनाव के मद्देनजर 1.37 लाख शिक्षामित्रों के समायोजन का मुद्दा सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है। जाहिर है यह काम मुख्यमंत्री अपने भरोसे के मंत्री के जरिये कराना चाहेंगे।
मुलायम के करीबी का रुतबा बढ़ाया
मुलायम सिंह यादव परिवार से नजदीकी संबंधों के चलते बलराम यादव से कारागार लेकर उन्हें माध्यमिक शिक्षा जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया गया है। वर्ष 2014 में हुए फेरबदल में उनसे पंचायती राज लेकर अपेक्षाकृत कम महत्व वाला कारागार विभाग दिया गया था। अब माध्यमिक शिक्षा मंत्री बनाकर उनका रुतबा लौटाया गया है।
ढीली पकड़ अवधेश पर भारी पड़ी
अवधेश प्रसाद की समाज कल्याण विभाग और क्षेत्र में ढीली पकड़ भारी पड़ी है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद विभागीय योजनाओं को ऑनलाइन किए जाने में उन्होंने खास रुचि नहीं दिखाई थी। उन्हें पंचायत चुनाव में करारा झटका लगा था। वे अपनी पत्नी और बेटे को चुनाव नहीं जिता सके थे। उनसे समाज कल्याण विभाग लेकर होमगार्ड्स जैसा कम महत्व वाला विभाग दिया गया है।
पारसनाथ पर भारी पड़ीं शिकायतें
खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री रहे पारसनाथ यादव की छवि और उनके खिलाफ शिकायतों के कारण उन्हें अपेक्षाकृत कम महत्व वाला ग्रामीण अभियंत्रण विभाग मिला है। उनके खिलाफ विभागीय अधिकारियों तक ने आवाज उठाई थी। जौनपुर में विवादों से घिरे रहने के कारण भी उनका कद सीमित किया गया है। उनके खिलाफ मुख्यमंत्री तक शिकायतें पहुंची थीं।
इन्हें फिर मिली अहम जिम्मेदारी
राम गोविंद चौधरी से बेसिक शिक्षा विभाग लेकर समाज कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण एवं सैनिक कल्याण विभाग दिया गया है। बेसिक शिक्षा की तरह यह विभाग भी जनता से जुड़ा और अहम माना जाता है। बतौर बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद का कामकाज आम तौर पर ठीक माना जाता रहा है। हालांकि उनके कार्यकाल में सहायक अध्यापक बनाए गए शिक्षामित्रों की नियुक्ति रद्द करके हाईकोर्ट ने जरूर सरकार को झटका दिया।
परिवहन से वन पहुंचे दुर्गा
दुर्गा प्रसाद यादव को परिवहन की जगह वन विभाग दिया गया है। हालांकि वन विभाग को भी महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन परिवहन विभाग जितना नहीं। उन पर विभागीय अफसरों से तालमेल न बिठा पाने के आरोप थे। मुख्यमंत्री और सपा मुखिया तक उनकी कुछ शिकायतें पहुंची थीं।
ब्रह्माशंकर को नहीं मिल पाई बड़ी जिम्मेदारी
होमगार्ड्स एवं प्रांतीय रक्षक दल मंत्री केरूप में अक्सर चर्चा में रहने वाले ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिल सकी। मुख्यमंत्री ने उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री बनाया है। होमगार्ड्स विभाग में अधिकारियों ने ही उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। यह उन्हें बड़ी जिम्मेदारी न दिए जाने की वजह मानी जा रही है।
राजा भैया को मिला राजा का विभाग
मुख्यमंत्री ने रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से खाद्य एवं रसद विभाग लेकर स्टांप तथा न्यायालय शुल्क, पंजीयन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग दिया है। यह विभाग पहले राजा महेंद्र अरिदमन सिंह के पास था। खाद्य एवं रसद विभाग की तुलना में स्टांप एवं पंजीयन विभाग को कमतर आंका जाता है। राजा भैया पर खाद्य एवं रसद मंत्री के रूप में मनमाने फैसले लेने के आरोप थे।
इकबाल का कद बढ़ा, पर नहीं लौटा रुतबा
इकबाल महमूद से मत्स्य एवं सार्वजनिक उद्यम विभाग लेकर औषधि एवं खाद्य प्रशासन मंत्री बनाया गया है। फूड सेफ्टी एक्ट बनने के बाद से यह विभाग काफी अहम हो गया है। इस लिहाज से उनका कद बढ़ा है। अभी तक यह विभाग मुख्यमंत्री के पास था। हालांकि उन्हें वह रुतबा नहीं मिल सका जो लोकसभ चुनाव के बाद छीन लिया गया था। तब उनके पास माध्यमिक शिक्षा विभाग था।
महबूब अली पर भारी पड़ीं शिकायतें
महबूब अली से माध्यमिक शिक्षा विभाग लेकर उन्हें अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण मत्स्य एवं रेशम उद्योग विभाग दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग मिलने के बाद से ही वे चर्चा में आ गए थे। उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने, उच्च शिक्षित न होने और तबादलों में मनमानी के आरोप थे। यही वजह है कि अपने परिवार के पांच जिला पंचायत सदस्य जिताने के बावजूद उनका कद कम दिया गया है।
इनका बना रहेगा रुतबा
कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रोन्नत किए गए अरविंद सिंह गोप ग्राम्य विकास में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री थे। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्हें यही विभाग देकर उनका रुतबा बरकरार रखा है। गोप का कामकाज आम तौर पर ठीक रहा है। वे सपा के प्रदेश महासचिव भी हैं। उन पर मुख्यमंत्री का भरोसा कायम रहेगा।
कमाल को मिली तवज्जो
राज्यमंत्री से प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री बनाए गए कमाल अख्तर को मुख्यमंत्री ने खासी तवज्जो दी है। पहले वे पंचायतीराज राज्य मंत्री थे। मुख्यमंत्री की यूथ टीम में शामिल कमाल को अब खाद्य एवं रसद जैसा अहम विभाग दिया गया है।
पंडित सिंह को बड़े महकमे का इनाम
विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह को मुख्यमंत्री ने बड़े महकमे का इनाम दिया है। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री के रूप प्रोन्नत किए गए पंडित सिंह को कृषि मंत्री बनाया गया है। शुरुआत में यह विभाग उनके गृह जिले गोंडा के आनंद सिंह के पास था जिन्हें लोकसभा चुनाव से पहले बर्खास्त कर दिया गया था। जिले की राजनीति को साधने के लिए विवादों में रहने के बावजूद पंडित सिंह को अहम जिम्मेदारी दी गई है।
इन्हें मिली खास अहमियत
मुख्यमंत्री ने राज्यमंत्री से स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री के रूप में प्रोन्नत किए गए सात मंत्रियों में फरीद महफूज किदवई और यासर शाह को विशेष अहमियत दी है।
फरीद महफूज पहले वन एवं नियोजन राज्यमंत्री थे। अब उन्हें प्राविधिक शिक्षा विभाग दिया गया है। पहले यह विभाग बर्खास्त किए गए कैबिनेट मंत्री शिवाकांत ओझा देखते थे। इसी तरह उर्जा राज्यमंत्री रहे यासर शाह अब परिवहन विभाग देखेंगे।
पहले इसे दुर्गा प्रसाद यादव देखते थे। दोनों विभागों को काफी अहम माना जाता है। फरीद और यासर को मुख्यमंत्री से नजदीकी का लाभ मिला है। ये दोनों जिन महकमों के राज्यमंत्री थे, उन्हें खुद मुख्यमंत्री देखते थे।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग को भी अहम माना जाता है। भगवत शरण गंगवार को बर्खास्त किए जाने के बाद यह विभाग सपा महासचिव व राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल के पुत्र नितिन अग्रवाल को दिया गया है।