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यूजीसी के नए नियम: अखिलेश ने तोड़ी चुप्पी, कहा- यह भाजपा की चाल, संस्थानों में काबिज हैं गैर पीडीए के लोग

Tue, 27 Jan 2026 10:44 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 27 Jan 2026 10:44 PM IST
सार

New UGC rules: यूजीसी के नए नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इन नियमों में तब तक कोई बुराई नहीं है जब तक निर्दोष इसमें फंस न जाए। 

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New UGC rules: Akhilesh breaks silence, says this is a BJP ploy; non-PDA people occupy institutions
अखिलेश यादव - फोटो : सपा पार्टी

विस्तार

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूजीसी के विनियम-2026 पर कहा कि कोई दोषी बचना नहीं चाहिए और निर्दोष फंसना नहीं चाहिए। उन्होंने इसे भाजपा की चाल बताया। कहा कि इन नियमों से पीडीए समाज को कोई राहत नहीं मिलेगी, कोईं अधिकतर संस्थाओं पर गैर पीडीए समाज के लोग काबिज हैं।
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यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र
 विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) एक्ट 2026 की नई गाइडलाइन को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। सैकड़ों छात्रों ने गेट नंबर-1 पर धरना-प्रदर्शन कर यूजीसी के नए नियमों को विभाजनकारी बताते हुए उन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की। छात्रों ने यूजीसी रोल बैक के नारे लगाए। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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मंगलवार सुबह से ही विश्वविद्यालय गेट पर छात्रों की भीड़ जुटने लगी। हालात को देखते हुए किसी अप्रिय घटना से बचाव के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि यूजीसी का नया नियम समानता नहीं, बल्कि छात्रों को जातीय आधार पर बांटने का प्रयास है। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर सरकार से गाइडलाइन को तत्काल निरस्त करने की मांग की। इस आंदोलन में शक्ति दुबे, अभिषेक वर्मा, आयुष सिंह राठौड़, राजन यादव, उदयवीर, हिमालय भारत, नमन राय, संजराज सहित सैकड़ों छात्र शामिल रहे।
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बांटने वाला है यूजीसी का नया नियम : एबीवीपी
एबीवीपी छात्र नेता उज्ज्वल त्रिपाठी का कहना है कि यूजीसी का नया नियम बांटने वाला है। विश्वविद्यालय और कॉलेज ऐसे स्थान होते हैं, जहां अलग-अलग पृष्ठभूमि, जिलों और जातियों से आए छात्र एक साझा पहचान के साथ पढ़ते-लिखते हैं। हॉस्टल, कैंटीन और कक्षाओं में सभी बिना किसी भेदभाव के एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

कानून का होगा दुरुपयोग, झूठे आरोपों की होगी बाढ़
एबीवीपी के छात्र नेता आलोक मिश्रा का कहना है कि यूजीसी के नए कानून से यह आशंका है कि इसका दुरुपयोग कर सवर्ण छात्रों व शिक्षकों पर झूठे आरोपों की बाढ़ न आ जाए। यदि शिकायतों की निष्पक्ष, साक्ष्य-आधारित और समयबद्ध जांच की स्पष्ट व्यवस्था नहीं हुई तो सवर्ण छात्रों और शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा, मानसिक शांति और शैक्षिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।
 
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दलित और ओबीसी छात्र भी विरोध में

जतिन शुक्ला और शशि प्रकाश ने कहा कि यूजीसी के इस काले कानून के विरोध में बड़ी संख्या में एससी, एसटी और ओबीसी छात्र भी शामिल हैं। नई गाइडलाइन हमारे स्वाभाविक सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करेगी। छात्रों के बीच संदेह व भय का माहौल पैदा करेगी। इससे आपसी संवाद, मित्रता और शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा।

बढ़ेगा आपसी भेदभाव व तनाव
एबीवीपी छात्र नेता आलोक मिश्रा ने आशंका जताई कि नए प्रावधान सामान्य वर्ग के छात्रों को पहले से दोषी मानने जैसी मानसिकता को बढ़ावा देते हैं, जिससे परिसर में तनाव और भेदभाव बढ़ सकता है। इसी कारण यूजीसी के नियमों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

ये है यूजीसी की नई गाइडलाइन
यूजीसी ने 13 जनवरी को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन-2026 अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना है। इसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

नए नियमों के कुछ प्रमुख बिंदु
- हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में ईक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर और इक्वलिटी स्क्वाड का गठन अनिवार्य। शिकायत मिलने पर 24 घंटे में बैठक और तय समय सीमा में कार्रवाई ।
- भेदभाव से जुड़े मामलों की वार्षिक रिपोर्ट यूजीसी को भेजना जरूरी। नियमों के उल्लंघन पर अनुदान रोकने, पाठ्यक्रमों पर प्रतिबंध और गंभीर स्थिति में मान्यता रद्द करने का प्रावधान।

यूजीसी के नए नियम से छात्र दो धड़ों में बंटा
यूजीसी की नई गाइडलाइन के मुद्दे पर छात्र जातिगत आधार पर एससी, एसटी और ओबीसी एक तरफ हैं, तो वहीं सवर्ण और सामान्य वर्ग अलग थलग हैं। - प्रिंस प्रकाश, राष्ट्रीय संयोजक, एनएसयूआई

यूजीसी के नए नियम का है पूरा समर्थन

हम और हमारे संगठन के छात्र पूरी तरह से यूजीसी के नए नियम के समर्थन में हैं। इस बिल का सकारात्मक परिणाम आने वाला है।- प्रिंस कुमार, इकाई अध्यक्ष, समाजवादी छात्र सभा



 
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