सीएम योगी ने हटाए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के अफसर
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के 25वें दिन 20 आईएएस अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल कर दिया है। योगी सरकार का यह पहला बड़ा प्रशासनिक फेरबदल है।
अखिलेश यादव सरकार में अहम भूमिका में रहे प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल व प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री रहीं अनीता सिंह सहित कई चर्चित अफसरों को हटाकर वेटिंग में डाल दिया गया है।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी को प्रमुख सचिव सूचना सहित वह सभी जिम्मेदारियां सौंपी गईं हैं जो सहगल के पास थीं। अच्छी छवि के आईएएस अधिकारी मृत्युंजय कुमार नारायण को मुख्यमंत्री ने अपना सचिव बनाया है।
शासन में अभी और तबादलों की संभावना है जबकि जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती में भी जल्द बड़े पैमाने पर फेरबदल हो सकता है।
सपा-बसपा सरकार में प्रमुख पदों पर रहे सहगल वेटिंग में
प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल का पिछली सपा और बसपा राज में एक जैसा जलवा रहा था। वह दोनों सरकारों में अहम भूमिका में रहे। अब उनको दी गई सभी जिम्मेदारियों से हटाकर प्रतीक्षा में डाल दिया गया है।
इसके अलावा प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास रमारमण का भी सपा और बसपा राज में एक जैसा जलवा रहा। दोनों ही सरकारों में उनकी नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी में तैनाती रही।
उनकी तैनाती को लेकर हाईकोर्ट तक ने तल्ख टिप्पणी की, लेकिन अखिलेश सरकार ने उन्हें नोएडा में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा दी। बाद में जब हटाना पड़ा तो तीनों ही प्राधिकरणों पर नियंत्रक की भूमिका वाली प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास की कुर्सी सौंप दी।
इसके अलावा नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण का चेयरमैन भी बनाए रखा। रमारमण की नोएडा में तैनाती के दौरान ही यादव सिंह को अच्छी तरह से फलने-फूलने का मौका मिला। ऐसे रमारमण अब वेटिंग में डाल दिए गए हैं।
अखिलेश-मुलायम की करीबी वेटिंग में
अखिलेश यादव के साथ लगभग पूरे समय सचिव या प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री की भूमिका में रहीं अनीता सिंह भी वेटिंग में हैं। अनीता को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का भरोसेमंद माना जाता रहा है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में लंबे समय तक तैनात रहे सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आमोद कुमार, सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पंधारी यादव को कम महत्व का माने जाने वाले राजस्व परिषद, इलाहाबाद में बतौर सदस्य भेज दिया गया है।
ग्रेटर नोएडा व नोएडा के सीईओ दीपक अग्रवाल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय कुमार यादव को हटाकर वेटिंग में रख दिया गया है।
पिछली सरकार में अवैध खनन बड़ा मुद्दा बना। मामला हाईकोर्ट में गया और कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश किया। यह जांच चल रही है। विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के दौरान तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को बर्खास्त तक किया गया।
उन्हीं के साथ अपर मुख्य सचिव भूतत्व एवं खनिकर्म डॉ. गुरदीप सिंह को भी हटा दिया गया था, लेकिन सपा की आंतरिक कलह के दबाव में जब गायत्री की मंत्रिमंडल में फिर वापसी हुई तो गुरदीप भी पुरानी कुर्सी पाने में सफल हो गए। अब गुरदीप भी प्रतीक्षा सूची में डाल दिए गए हैं। उनकी जगह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राज प्रताप सिंह को लेनी है।
ये संभालेंगे योगी सरकार की खनन नीति
योगी सरकार की नई खनन नीति बनाने से लेकर विभाग को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी सिंह संभालेंगे। यशभारती सम्मान वितरण को लेकर चर्चा में रहे सचिव एवं निदेशक संस्कृति डॉ. हरिओम भी वेटिंग में भेज दिए गए हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में पुष्टाहार के नाम पर होने वाली अंधेरगर्दी सपा से लेकर बसपा सरकार खासा चर्चा में रही।
बिना टेंडर सैकड़ों करोड़ का पुष्टाहार बांटने की बात सामने आई। विभाग की प्रमुख सचिव डिंपल वर्मा को भी हटा दिया गया है। उन्हें भी नई तैनाती नहीं दी गई है। अनीता सी. मेश्राम अब सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार की जिम्मेदारी देखेंगी।