राज्यसभा में सपा के नए नेता का नहीं हुआ चयन, रामगोपाल ने रखा पक्ष
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्यसभा में सपा संसदीय दल के नेता का चयन अभी नहीं हो पाया है। सपा से निष्कासित रामगोपाल यादव ने ही बुधवार को दल के नेता की हैसियत से नोटबंदी के फैसले पर उच्च सदन में पार्टी का पक्ष रखा।
पार्टी की ओर से राज्यसभा के सभापति को उच्च सदन में नया नेता चुने जाने का का कोई पत्र नहीं सौंपा गया। माना जा रहा है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने बातचीत का रास्ता खुला रखने के लिए रामगोपाल को दल के नेता पद से नहीं हटाया है।
रामगोपाल यादव को 23 अक्तूबर को सपा से निष्कासित किया गया था। 13 नवंबर को सपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में राज्यसभा में नए नेता के चुनाव का अधिकार मुलायम सिंह को सौंप दिया गया।
माना जा रहा था कि संसद का सत्र शुरू होते ही सपा इस संबंध में राज्यसभा के सभापति को सूचित कर देगी। राज्यसभा में सपा के नेता पद के लिए कई नाम चर्चा में थे।
'अब नजरें राजनीतिक घटनाक्रम पर'
बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो रामगोपाल सदन में बतौर दल के नेता उपस्थित ही नहीं रहे, बल्कि नोटबंदी पर जोरदार तरीके से सपा का पक्ष भी रखा। राज्यसभा में पार्टी के एक सांसद का कहना है कि अब संभावना नहीं दिखती कि रामगोपाल को राज्यसभा में सपा संसदीय दल के नेता पद से हटाया जाएगा।
अगले कुछ दिनों का राजनीतिक घटनाक्रम तय करेगा कि दल के नेता पद पर रामगोपाल बने रहेंगे या हटाए जाएंगे।
क्या असंवैधानिक था निष्कासन
रामगोपाल ने तीन दिन पहले ही प्रेसवार्ता में पार्टी से पिछले दिनों हुए निष्कासनों को असंवैधानिक बताया था। सपा के एक नेता के मुताबिक राष्ट्रीय महासचिव को राष्ट्रीय अध्यक्ष ही निष्कासित कर सकता है।
रामगोपाल का निष्कासन पत्र मुलायम के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने जारी किया था। इसमें उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि रामगोपाल के निष्कासन का पत्र मुलायम ने खुद क्यों नहीं जारी किया जबकि युवा संगठनों में नियुक्ति तक की चिट्ठी वे अपने हस्ताक्षर से जारी कर रहे हैं।
सुलह की संभावना से जोड़ा जा रहा है ये पक्ष
मुलायम बुधवार को जौनपुर में मंत्री पासरनाथ यादव के बेटे के तिलकोत्सव में शामिल होने गए थे। वे शाम को दिल्ली पहुंचे। बृहस्पतिवार को वे संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।
उधर, सपा नेताओं में दिन भर रामगोपाल के मुद्दे पर चर्चाएं होती रहीं। कुछ लोग इसे पार्टी में सुलह की संभावना से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि नेताजी के दिल्ली न पहुंचने के कारण राज्यसभा के नए नेता का चयन नहीं हो सका है। वे सांसदों से विचार-विमर्श के बाद ही इस संबंध में फैसला लेंगे।
रामगोपाल ने विशेष अधिवेशन की उठाई है मांग
रामगोपाल ने तीन दिन पहले सपा नेतृत्व के सामने तीन मांगें रखी हैं। इन्हें पूरा न किए जाने पर उन्होंने पार्टी का विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की है।
उनका कहना है कि असंवैधानिक तरीके से बर्खास्त किए गए नेताओं को तत्काल बहाल किया जाए, टिकट वितरण में मुख्यमंत्री की सहमति अनिवार्य रूप से ली जाए और मुलायम खुद घोषणा करें कि 2017 का चुनाव अखिलेश यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और वही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग भी रामगोपाल को नेता पद से न हटाए जाने की वजह हो सकती है।