छात्रों की फीस वापसी पर बने नए नियम
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पत्राचार के माध्यम से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अब राज्य सरकार से मदद नहीं मिलेगी। शुल्क प्रतिपूर्ति की नई नियमावली में यह व्यवस्था की गई है। अभी तक उन्हें पुस्तक भत्ता मिलता था। इसके अलावा रेगुलर छात्रों की फीस की भरपाई में 12 हजार रुपये तक सालाना आमदनी पर तरजीह दी जाएगी।
नई नियमावली में पत्राचार पाठ्यक्रमों को छात्रवृत्ति की सूची से बाहर कर दिया गया है, जबकि पुरानी नियमावली में ये पाठ्यक्रम भी शामिल थे।
अफसरों का कहना है कि हर साल 8-10 लाख रेगुलर छात्र ही शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति की सुविधा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में पत्राचार पाठ्यक्रमों को इस सूची से बाहर करने का निर्णय लेना पड़ा।
नई नियमावली में तय किए गए भारांक
शुल्क प्रतिपूर्ति में मनमानी रोकने के लिए आय, योग्यता और पाठ्यक्रम समूह के आधार पर भारांक (वेटेज अंक) भी तय किए गए हैं। ज्यादा वेटेज अंक वाले विद्यार्थियों को पहले शुल्क की भरपाई की जाएगी। यानी वेटेज अंक के घटते क्रम में वरीयता सूची तैयार की जाएगी।
परिवार की सालाना आय के लिए दिए गए अंक
आय स्लैब (रुपये में)--वेटेज अंक
12000 तक--10
12000-24000--08
24000-36000--06
36000-48000--04
48000 से अधिक--02
पिछली कक्षा में मिले अंकों के लिए वेटेज अंक
अंकों का प्रतिशत--वेटेज अंक
33% तक--2
33%-45%--4
45%-60%--6
60%-75%--8
75% से अधिक--10
समूहवार पाठ्यक्रम के लिए अंक
समूहवार पाठ्यक्रम--वेटेज अंक
समूह-1 (बीएएमएस, बीटेक, एमबीए आदि)--1
समूह-2(बीए, बीएड, एलएलबी, बीएससी आदि)--4
समूह-3(विदेशी भाषा में डिप्लोमा, बीकॉम, बीएससी-आईटी)--7
समूह-4 (आईटीआई, पॉलीटेक्निक, कक्षा-11,12)--10
एनआईसी से अनुमति के बाद मिलेगी रकम
नई नियमावली-2014 में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की राज्य इकाई को डाटा जांच की जिम्मेदारी दी गई है। उसके बाद ही खातों में रकम भेजी जाएगी। एनआईसी को इन बिंदुओं पर जांच करनी होगी-
-विद्यार्थियों के हाईस्कूल के अनुक्रमांक, वर्ष और बोर्ड का मिलान संबंधित बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध डाटा से किया जाएगा।
-आय, निवास एवं जाति प्रमाणपत्रों का सत्यापन राजस्व परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध डाटा के माध्यम से किया जाएगा।
-विद्यार्थियों द्वारा भरी गई शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि का मिलान जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए शुल्क के ढांचे से किया जाएगा।