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Lucknow News: लविवि में नए पीएचडी ऑर्डिनेंस को मंजूरी
Sat, 09 Aug 2025 01:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sat, 09 Aug 2025 01:43 AM IST
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लविवि में नए पीएचडी ऑर्डिनेंस को मंजूरी
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की बैठक में शुक्रवार को नए पीएचडी ऑर्डिनेंस को मंजूरी दी गई। यूजीसी की गाइडलाइंस के अनुरूप अब विश्वविद्यालय से संबद्ध स्नातक कॉलेजों के शिक्षक पीएचडी कराने के पात्र नहीं होंगे।
इस निर्णय का लखनऊ विश्वविद्यालय संयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने कड़ा विरोध किया है। अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि कुलपति से दो दौर की वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया है। इसमें धरना-प्रदर्शन, जेल भरो आंदोलन और आगामी परीक्षाओं के बहिष्कार जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
बैठक में 15 वर्षों के बाद डीलिट, डीएससी और एलएलडी कार्यक्रमों को शुरू करने की भी अनुमति दी गई। डीलिट साहित्य, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में विशिष्ट योगदान के लिए, डीएससी विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट शोध के लिए, जबकि एलएलडी कानून के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि के लिए दी जाती है।
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इसके अलावा, विभिन्न संकाय परिषद बैठकों के कार्यवृत्त को मंजूरी, शोधार्थियों को अधिकतम तीन माह की अतिरिक्त अवधि और स्नातक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा पाठ्यक्रम शामिल करने के प्रस्ताव भी पारित किए गए।
कोट
सभी निर्णय में यूजीसी की गाइडलाइंस का पालन हुआ है। विद्या परिषद की मंजूरी मिल गई है। इसे अब कार्य परिषद में रखा जाएगा। कार्य परिषद सदस्यों की संस्तुति के बाद कुलाधिपति को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
- डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव प्रवक्ता लविवि
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इस निर्णय का लखनऊ विश्वविद्यालय संयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने कड़ा विरोध किया है। अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि कुलपति से दो दौर की वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया है। इसमें धरना-प्रदर्शन, जेल भरो आंदोलन और आगामी परीक्षाओं के बहिष्कार जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
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बैठक में 15 वर्षों के बाद डीलिट, डीएससी और एलएलडी कार्यक्रमों को शुरू करने की भी अनुमति दी गई। डीलिट साहित्य, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में विशिष्ट योगदान के लिए, डीएससी विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट शोध के लिए, जबकि एलएलडी कानून के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि के लिए दी जाती है।
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इसके अलावा, विभिन्न संकाय परिषद बैठकों के कार्यवृत्त को मंजूरी, शोधार्थियों को अधिकतम तीन माह की अतिरिक्त अवधि और स्नातक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा पाठ्यक्रम शामिल करने के प्रस्ताव भी पारित किए गए।
कोट
सभी निर्णय में यूजीसी की गाइडलाइंस का पालन हुआ है। विद्या परिषद की मंजूरी मिल गई है। इसे अब कार्य परिषद में रखा जाएगा। कार्य परिषद सदस्यों की संस्तुति के बाद कुलाधिपति को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
- डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव प्रवक्ता लविवि