लखनऊ गैगरेप: अबूझ पहेली बना मामला
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मोहनलालगंज में दरिंदगी का शिकार महिला के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी दोनों किडनियों की मौजूदगी ने मामले को उलझा दिया है।
महिला द्वारा वर्ष 2011 में ही अपनी पति को एक किडनी दी जा चुकी थी। इसके बाद भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किडनियों की मौजूदगी से रिपोर्ट की गंभीरता पर उठे सवाल पर अब आला अफसर बगलें झांक रहे हैं।
डीआईजी नवनीत सिकेरा ने इसका कोई सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट की वीडियो रिकार्डिंग मंगा कर मामले की जांच की जाएगी।
दोनों किडनी सुरक्षित
महिला की किडनियों को लेकर यह सवाल तब उठ रहे हैं जबकि महिला के पिता पहले ही दावा कर चुके हैं कि उनकी बेटी ने अपनी एक किडनी बीमार पति को 2011 में डोनेट कर दी थी।
फिर भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों किडनी सुरक्षित होने की बात सामने आने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और राजधानी पुलिस कठघरे में खड़ी नजर आ रही है।
इससे इतने सनसनीखेज मामले में न सिर्फ डॉक्टरों की बल्कि पुलिस की भी लापरवाही सामने आ रही है।
वह भी तब जबकि हाई-प्रोफाइल इस मर्डर केस के फौरन बाद ही उच्च स्तर से महिला के शव का पोस्टमार्टम छह डाक्टरों के पैनल से वीडियो रिकार्डिंग में कराए जाने की बात कही गई थी।
कोर्ट में उजागर हुआ मामला
यह भी कहा गया था कि इस मामले में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इतनी बड़ी चूक सामने आने पर अब पुलिस अफसर कोई सीधा जवाब नहीं दे रहे हैं।
किडनी का मामला तब उजागर हुआ जब सोमवार शाम आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद अफसरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट ध्यान से पढ़ी।
रिपोर्ट के किडनी वाले कॉलम में लिखा है, 150 ग्राम ईच। यानि उसकी दोनों किडनी 150 ग्राम वजन की पाई गईं।
पुलिस ने महिला को बताया कमजोर
इससे एक बार फिर महिला को राम सेवक के अकेले दम पर काबू करने के पुलिस के दावे पर सवाल उठने लगे हैं।
अभी तक पुलिस अफसर ऑफ दि रिकार्ड यह तर्क दे रहे थे कि एक किडनी न होने के चलते महिला शारीरिक रूप से कमजोर थी इसलिए राम सेवक ने उसे काबू कर लिया।
रिपोर्ट से यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि पुलिस ने पोस्टमार्टम में खेल किया है।