‘डीएम खुद चला रहे स्कूल तो कैसे मिले गरीबों को दाखिला’
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जब डीएम खुद स्कूल चला रहे हैं तो फिर गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिला मिलने की उम्मीद बेमानी है। मैग्सेसे अवार्ड विजेता समाजसेवी संदीप पांडेय ने कहा है कि डीएम सत्येंद्र सिंह राजधानी में न्यू मिलेनियम के नाम से विद्यालय का संचालन कर रहे हैं।
इसी वजह से वे आरटीई अधिनियम के तहत गरीब बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला नहीं होने दे रहे हैं और दोषी विद्यालयों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। इसके बजाय वे 120 गरीब बच्चों के दाखिले की फाइल एक महीने से ज्यादा समय से दबाए हुए हैं।
समाजसेवी संदीप पांडेय ने कहा डीएम राजधानी में न्यू मिलेनियम के नाम से विद्यालय का संचालन कर रहे हैं। वे शुक्रवार को यूपी प्रेस क्लब में मीडिया से बात कर रहे थे।
उन्होंने निजी स्कूल चलाने वाले सत्येंद्र सिंह को डीएम के पद से हटाने की मांग की है। संदीप पांडेय ने गरीब बच्चों को निशुल्क दाखिला न मिलने के मुद्दे पर सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया है।
उनका कहना है कि सीएमएस, वीरेंद्र स्वरूप, सिटी इंटरनेशनल, सेंट मेरी कॉन्वेंट, नवयुग रेडियंस, दिल्ली पब्लिक जैसे बड़े स्कूलों ने अधिनियम के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला देने से साफ मना कर दिया है।
लागू हो समान शिक्षा कानून
इसके बाद भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि नियमानुसार राज्य सरकार के निर्देश न मानने पर इन विद्यालयों की एनओसी रद्द कर देनी चाहिए।
संदीप पांडेय ने अमीर और गरीब सभी बच्चों को एक समान शिक्षा दिलाने के लिए वर्ष 1968 के कोठारी आयोग की समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की है।
कोठारी आयोग में सभी निजी विद्यालयों के सरकारीकरण की सिफारिश की गई थी। सभी विद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने की बात भी सिफारिशों में कही गई थी। इससे सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकती है।