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जीन बताएगा थॉयरायड कैंसर होगा या नहीं

Sun, 16 Feb 2014 09:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 16 Feb 2014 09:33 AM IST
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new gene maping tecnique soon for thyroid

थॉयरायड कैंसर होगा या नहीं, इसका पता जीन मैपिंग से चलेगा। यदि कैंसर होने की आशंका होगी तो पहले ही इसका पता चल जाएगा।

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इससे बीमारी का इलाज कर उसे गंभीर स्थिति में पहुंचने से रोका जा सकेगा। विदेशों में ये तकनीक आ चुकी है।

देश में भी जल्दी ही इसकी सुविधा मिल सकेगी। केजीएमयू के सर्जरी विभाग के 59वें स्थापना दिवस पर शनिवार को यह जानकारी जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ के प्रधानाचार्य प्रो. तारिक मंसूर ने दी।

उन्होंने कहा कि थॉयरायड कैंसर तीन तरह के होते हैं। पहले तरह के कैंसर में मरीज इलाज के बाद लंबे समय तक जीवित रह सकता है।

दूसरे तरह के कैंसर में मरीज का जीवन सिर्फ पांच साल का होता है और एनाप्लास्टिक कैंसर में मरीज की मौत मौत मात्र 8 माह में हो जाती है। जीन मैपिंग से बीमारी को फैलने से पहले ही खत्म कर दिया जाएगा।
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प्रो. मंसूर ने बताया कि इस कैंसर में पांच फीसदी संभावना होती है कि आगे की पीढ़ी में भी वही बीमारी हो जाए।

यदि बच्चे में कैंसर की जीन होंगे तो छह साल की उम्र में ही इलाज कर कैंसर की संभावना को खत्म कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में बीमारियों का पता लगाने के लिए जीन मैपिंग पूरी तरह से प्रचलित हो चुकी है। एक लाख डॉलर खर्च कर सभी तरह की बीमारियों की होने की संभावना का पता लगाया जा सकता है।
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इससे पहले समारोह का उद्घाटन स्वास्थ्य एवं अनुसंधान मंत्रालय भारत सरकार के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक प्रो. वी.एम. कटोच ने किया।

इस मौके पर कुलपति प्रो. डी.के. गुप्ता, डीन प्रो. राज मेहरोत्रा, सीएमएस प्रो. एस.एन. शंखवार, सर्जरी विभाग के हेड प्रो. अभिनव अरुण सोनकर, प्रो. एच.एस. पहवा, आयोजन सचिव डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. संदीप तिवारी मौजूद थे।

देश में तैयार हो रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्जन
देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्जन तैयार हो रहे हैं। विश्व भर में जो भी सर्जरी हो रही है वो भारत के सर्जन यहां कर रहे हैं।

यही कारण है कि विदेशों से लोग भारत में सर्जरी कराने आते हैं। देश में 1949 के बाद से सर्जरी के उत्थान का यह सबसे बेहतरीन समय है।

एमसीआई के अनुसार 2021 तक देश में 45 हजार पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सक होंगे। एसजीपीजीआई के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के पूर्व हेड प्रो. एसपी कौशिक ने स्थापना दिवस समारोह के मौके पर प्रो. एससी मिश्रा मोमोरियल ओरेशन में ये जानकारी दी।


प्रो. कौशिक ने कहा कि पहले सभी तरह के ऑपरेशन जनरल सर्जरी विभाग में ही होते थे। धीरे-धीरे सभी सुपर स्पेशलिटी सर्जरी अलग होती गई।

देश में पहली सर्जरी क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर में 1948 हुई थी। यही से एमएस और एमसीएच कार्यक्रम शुरू हुआ।

प्रो. कौशिक ने बताया कि पहला गुर्दा प्रत्यारोपण बनारस में डॉ. उडप्पा ने किया था। इसके बाद मद्रास में दूसरा गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ। हालांकि दोनों ही सफल नहीं हुए। वर्तमान में देश में किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले 200 सेंटर हैं।

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