आखिर ये क्या हो रहा है लखनऊ में, छह दिन के भीतर फेंकी गई तीसरी बिटिया
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शहर-ए-तहजीब में बेटियों के प्रति संवेदनहीनता लगातार बढ़ती जा रही है। नवजात बच्चियों को लावारिस छोड़ देने के मामले कई गुना बढ़ते जा रहा है। फिर एक नवजात शुक्रवार को उतरेठिया में लावारिस मिली है।
बीते छह दिनों में यह तीसरा मामला है। इनमें से एक बच्ची की मौत हो गई थी। वहीं दो बच्चियां इस समय अस्पतालों में भर्ती हैं, जहां डॉक्टर उनका जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ताजा मामला एसजीपीजीआई क्षेत्र के उतरेठिया का है, जहां ओपी चौधरी अस्पताल के पास शुक्रवार रात मौजूद लोगों को किसी नवजात के रोने की आवाज आई। वे आवाज के पास पहुंचे तो अस्पताल की बाउंड्री के निकट वह बच्ची लावारिस अवस्था में रोती मिली।
महराजगंज रायबरेली की रहने वाली राधिका ने बच्ची को अपनी गोद में लिया और उसे संभाला। साथ ही पुलिस व चाइल्ड लाइन को सूचित किया गया। राधिका ने बताया इस दौरान एक कार में कुछ लोग उसे नजर आए,उन्हाेंने देखा कि राधिका ने बच्ची को उठा लिया है तो वे वहां से चलते बने।
राधिका का कहना है कि उसे नहीं पता वे लोग कौन थे, लेकिन वे बच्ची की ओर देख रहे थे। उसने अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी। यहां के मैनेजर विवेक सिंह ने बताया कि बच्ची को ठंड लगी है।
बीतें 10 साल में फेंकी गई सर्वाधिक बेटियां
उसे एनआईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची तीन दिन की है। उसकी नाल में क्लैंप कॉर्ड लगी हुई मिली है, जिससे संभावना जताई जा रही है कि शायद यह प्रसव सामान्य था।
वहीं पुलिस व चाइल्ड लाइन की टीम के मौके पर पहुंचने के बाद उसके बारे में सूचनाएं दर्ज की गई। राधिका का कहना था कि वह बच्ची को गोद लेना चाहती हैं, लेकिन चाइल्ड लाइन ने कानूनी मजबूरी बताते हुए उसे बच्ची देने से इन्कार कर दिया।
बीते 10 वर्ष में सर्वाधिक बेटियां
साल : बालक - बालिका
2007 : 05 - 06
2008 : 03 - 17
2009 : 09 - 11
2010 : 05 - 11
2011 : 01 - 06
2012 : 05 - 03
2013 : 03 - 10
2014 : 06 - 10
2015 : 03 - 06
2016 : 02 - 10
आंकडे़ : चाइल्ड लाइन में दर्ज मामले, 25 नवंबर 2016 तक