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भूमंडलीकरण पर चोट करती हैं ये कहानियां
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Mon, 16 Sep 2013 01:02 PM IST
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‘त्रासदी... माई फुट’ हिंदी के वरिष्ठ व चर्चित कथाकार रमेश उपाध्याय का नया कथा संग्रह है, जिसमें उन्होंने तीन कहानियां ‘त्रासदी माई फुट’, ‘प्राइवेट पब्लिक’ तथा ‘हम किस देश के वासी हैं’ लिखी है।
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ये कहानियां भोपाल गैस कांड से लेकर मारुति उद्योग में हाल ही में हुए संघर्ष पर केंद्रित है। इन कहानियों पर रविवार को जन संस्कृति मंच की ओर से जायका फूड कोर्ट में संवाद आयोजित किया गया।
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अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार डॉ. गिरीशचन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि भूमंडलीकरण के द्वारा जो व्यवस्था थोपी गई है, उससे चंद लोग लाभान्वित हो रहे हैं। रमेश उपाध्याय की कहानियां इन व्यवस्था पर चोट करती है।
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वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि रमेश उपाध्याय की कहानियां विषय के रूप में मजबूत है, लेकिन कलात्मक स्तर पर कमजोर नजर आती है। आलोचक चंद्रेश्वर ने कहा कि कहानियां अमरीकी साम्राज्यवाद व भूमंडलीकरण के खिलाफ तीखी बहस छेड़ते हैं।
आज पर्सनल पॉलिटिकल है, प्राइवेट पब्लिक है और लोकल ग्लोबल है। कवि भगवान स्वरूप कटियार ने कहा कि लेखक शेखर जोशी, भीष्म साहनी व अमर कांत की परंपरा के कथाकार हैं।
कथाकार शकील सिद्दीकी ने कहा कि ये कहानियां वैचारिक अभियान की कहानियां हैं। मंच के संयोजक कौशल किशोर सहित तमाम साहित्यकार मौजूद रहे।