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Lucknow News: ट्रॉमा में लगेगी नई एआई स्कैनर सीटी स्कैन मशीन
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लखनऊ। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में नई एआई स्कैनर सीटी स्कैन मशीन लगाई जाएगी। मशीन लगाने के लिए शुक्रवार को भूमि पूजन होगा। एक माह में निर्माण पूरा कर मशीन लगा दी जाएगी। प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि सड़क हादसों में घायल होने वालों के लिए शुरुआती एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। पुरानी मशीनों में मरीज का नाम-पता टाइप करने और उन्हें लिटाकर सेट करने में समय बर्बाद होता था, जो अब नहीं होगा।
रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष ने बताया कि नई मशीन में इमरजेंसी मोड है। मरीज के स्ट्रेचर पर आते ही बिना डाटा एंट्री के स्कैन शुरू हो जाएगा। इसका स्मार्ट कैमरा मरीज को अपने आप सही स्थिति में सेट कर देता है।
मशीन खुद ढूंढ लेगी टूटी हड्डियां
डॉ. केके सिंह ने बताया कि हादसों के बाद कई बार रीढ़ की हड्डी या पसलियों के फ्रैक्चर पकड़ में नहीं आते हैं। इस मशीन का एआई सिस्टम रीढ़ और पसलियों की 3डी तस्वीर बनाकर खुद बता देगा कि चोट कहां लगी है। इसका खास कैमरा दिमाग की महीन नस की चोट को भी साफ दिखाएगा। दर्द के कारण मशीन पर लेटे मरीज अकसर हिलते-डुलते हैं, जिससे फोटो धुंधली आती है। नई मशीन मरीज के हिलने को खुद ठीक कर साफ फोटो देती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें पुरानी मशीनों के मुकाबले 80 फीसदी कम रेडिएशन निकलता है।
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रेडियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष ने बताया कि नई मशीन में इमरजेंसी मोड है। मरीज के स्ट्रेचर पर आते ही बिना डाटा एंट्री के स्कैन शुरू हो जाएगा। इसका स्मार्ट कैमरा मरीज को अपने आप सही स्थिति में सेट कर देता है।
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मशीन खुद ढूंढ लेगी टूटी हड्डियां
डॉ. केके सिंह ने बताया कि हादसों के बाद कई बार रीढ़ की हड्डी या पसलियों के फ्रैक्चर पकड़ में नहीं आते हैं। इस मशीन का एआई सिस्टम रीढ़ और पसलियों की 3डी तस्वीर बनाकर खुद बता देगा कि चोट कहां लगी है। इसका खास कैमरा दिमाग की महीन नस की चोट को भी साफ दिखाएगा। दर्द के कारण मशीन पर लेटे मरीज अकसर हिलते-डुलते हैं, जिससे फोटो धुंधली आती है। नई मशीन मरीज के हिलने को खुद ठीक कर साफ फोटो देती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें पुरानी मशीनों के मुकाबले 80 फीसदी कम रेडिएशन निकलता है।
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