400 से 600 करोड़ का था मुन्ना बजरंगी का सालाना टर्नओवर, यूपी-बिहार से लेकर मुंबई तक था वसूली नेटवर्क
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माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या पर भले ही सवाल खड़े हो रहे हों, पर उसकी मौत से पूर्वांचल में रंगदारी और गुंडा टैक्स वसूली से जुड़े बडे़ नेटवर्क को झटका लगा है। माना जा रहा है कि मुन्ना की मौत से खासकर पूर्वांचल के दो दर्जन से अधिक जिलों के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाकों तक फैला नेटवर्क कमजोर होगा।
मुन्ना बजरंगी ने जरायम की दुनिया में हत्या व लूट के जरिये एंट्री की थी, लेकिन दबदबा कायम करने के बाद उसका पूरा फोकस धन कुबेरों से वसूली पर ही रहा। पहले उसके निशाने पर व्यवसायियों के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग रहे। बाद में उसने वसूली का दायरा अन्य वर्गों में भी बढ़ाया।
जैसे-जैसे वसूली नेटवर्क बढ़ा, उसी अनुपात में उसका गैंग भी फलता-फूलता गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो वर्तमान में बजरंगी के वसूली नेटवर्क की जद में पूर्वांचल के सैकड़ों डॉक्टर, रियल एस्टेट के कारोबारियों केअलावा कालीन, होटल, साड़ी व आभूषण के व्यापारी हैं। मुन्ना की मौत के बाद इन्हें अब राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
यूपी, बिहार, एमपी से लेकर मुंबई तक था नेटवर्क
पुलिस सूत्रों के मुताबिक मौजूदा समय में रंगदारी व गुंडा टैक्स वसूली का सबसे तगड़ा नेटवर्क मुन्ना बजरंगी का ही माना जा रहा था। यूपी में यह पूर्वांचल के वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, जौनपुर, लखनऊ, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ, भदोही, मिर्जापुर व सोनभद्र, बिहार के कैमूर, रोहतास, बक्सर, झारखंड के धनबाद, रांची व हजारीबाग से लेकर मध्य प्रदेश में भोपाल और महाराष्ट्र में मुंबई तक फैला था।
400 से 600 करोड़ रुपये तक का सालाना टर्नओवर
अपराधियों की गतिविधियों का ब्योरा जुटाने वाले विभाग के एक उच्च पदस्थ सूत्र का कहना है कि मौजूदा समय में बजरंगी नेटवर्क का सालाना टर्नओवर 400 से 600 करोड़ रुपये तक था। हालांकि इसका कुछ हिस्सा अन्य गिरोहों के बीच बंटने की भी बात कही जा रही है।
‘सेनापति’ की मौत से टूटेगा सेना का मनोबल : विक्रम सिंह
प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि पूर्वांचल में रंगदारी व गुंडा टैक्स वसूली करने वाले सक्रिय गिरोहों में से एक बड़े गिरोह का ‘सेनापति’ मुन्ना बजरंगी था। यह काम उसके गुर्गे एक सैन्यकर्मी की तरह करते थे। ऐसे में सेनापति की मौत से सेना का मनोबल जरूर टूटेगा। पुलिस को और अधिक क्रियाशील होकर बजरंगी के गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। उनकी चल व अचल संपत्ति को कुर्क कर उस पर थाने और पुलिस चौकी खोल देना चाहिए। विक्रम सिंह कहते हैं कि उन्होंने बिना सरकारी पैसा खर्च किए दुर्दांत अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला के मकान को कुर्क किया था और उसे एसटीएफ का इंट्रोगेशन रूम बनाया था। एसटीएफ का मुख्यालय भी लखनऊ स्थित विज्ञानपुरी के जिस भूखंड पर बना है, वह भी एक नामी अपराधी की संपत्ति है।
मुन्ना और मुख्तार गैंग की कमर तोड़ना जरूरी : एके जैन
प्रदेश के एक अन्य पूर्व पुलिस महानिदेशक एके जैन का मानना है कि मुन्ना की मौत से रंगदारी व गुंडा टैक्स वसूली के नेटवर्क पर असर तो पड़ेगा, लेकिन पीड़ितों को बहुत राहत नहीं मिलेगी। मुन्ना-मुख्तार जैसे लोगों के गैंग की कमर तोड़ना जरूरी है।
पूर्वांचल में डॉक्टर, इंजीनियर, कोचिंग संचालक, कोयला, होटल व कालीन व्यवसायी दो दशक से अधिक समय से ऐसे अपराधियों के गैंग को रंगदारी और गुंडा टैक्स के रूप में हर महीने करोड़ों रुपये देते आ रहे हैं। जेल में रहकर तो ये अपराधी संगठित अपराध को और भी बेहतर तरीके से संचालित करते हैं। इसलिए पुलिस को और सक्रिय होकर इनके गिरोह का सफाया करना होगा।