{"_id":"5ee929a88ebc3e42b76ccc8c","slug":"neither-they-have-money-for-salery-and-pension-nor-they-are-recovering-from-big-defaulters110","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेतन-पेंशन देने के लाले, फिर भी बड़े बकायेदारों से वसूली बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वेतन-पेंशन देने के लाले, फिर भी बड़े बकायेदारों से वसूली बंद
विज्ञापन
प्रवेंद्र गुप्ता
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। एक ओर नगर निगम के पास कर्मचारियों को वेतन-पेंशन देने के पैसे नहीं हैं, वहीं बड़े गृहकर बकायेदारों से वसूली बंद है। ये निगम के 1200 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं। उधर, आधा जून गुजरने के बाद भी नगर निगम के नियमित, संविदा और कार्यदायी संस्था के मिलाकर करीब 15 हजार कर्मचारियों को मई का वेतन नहीं मिल सका है। यही हाल पेंशन का भी है। कोरोना की आड़ लेकर नगर निगम कर्मचारी वसूली के लिए नहीं जा रहे और न ही प्रशासन कोई सख्त कदम उठा रहा है। वहीं, अभी तक शासन से वेतन मद का पैसा नगर निगम को नहीं मिल पाया है। नगर निगम की सालाना गृहकर की मांग तो करीब 300 करोड़ रुपये है, लेकिन सरकारी भवनों और बड़े कामर्शियल बकायेदारों की ओर से टैक्स न जमा करने से निगम का करीब 1200 करोड़ गृहकर फंसा है। इनमें करीब 300 करोड़ केेंद्र और प्रदेश के सरकारी विभागों पर बकाया है। शेष पैसा बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों पर बकाया है। कई वर्षों से बकायेदारों के टैक्स न जमा करने से उन पर ब्याज भी बहुत हो गया है। नगर निगम 12 प्रतिशत की दर से ब्याज लेता है, जो अगले साल फिर बकाये में जुड़कर मूलधन हो जाता है और फिर उस पर ब्याज लगता है। 1200 करोड़ रुपये का जो बकाया है, उसमें करीब 480 करोड़ ब्याज का है।
कतार में लगकर टैक्स जमा कर रही आम जनता
इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अब नगर निगम में करीब 27 करोड़ रुपये हाउस टैक्स जमा हो चुका है। खास बात है कि यह कर उन आम छोटे भवन स्वामियों ने ही जमा किया है, जिनका सालाना टैक्स 1000 से 5000 रुपये के बीच है। ये छूट का लाभ लेने को समय से टैक्स अदा कर देते हैं और इसके लिए कतार भी लगाते हैं। मंगलवार को नगर निगम के जोन एक में कोरोना संकट के बाद भी आम गृहकरदाता टैक्स जमा करने को लाइन लगाए थे। प्रमुख बड़े बकायेदार राज्य संपत्ति विभाग : करीब 40 करोड़ जीएसआई : करीब 6 करोड़ शिक्षा निदेशक कार्यालय : 1.30 करोड़ ओपी चौधरी हॉस्पिटल : 3.18 करोड़ लक्ष्मणदास लधानी : 3.05 करोड़ डॉ. एमसी सक्सेना : 3.08 करोड़ सरदार पटेल इंस्टीट्यूट : 1.67 करोड़ फातिमा हॉस्पिटल : 2.27 करोड़ बादशाह नगर स्टेशन : 10 करोड़ -
बकायेदारों को लगातार बिल और नोटिस दिए जा रहे हैं। सरकारी विभागों को कई बार पत्र लिखे गए। महापौर और नगर आयुक्त की ओर से भी पत्र भेजे गए। केंद्र सरकार के विभागों को भी लिखा गया। लॉकडाउन में बहुत सख्ती नहीं की गई, पर अब ऐसा किया जाएगा। बकाया वसूली को नगर निगम अधिनियम के तहत नोटिस जारी होगा। इसमें बकाया जमा न करने पर कुर्की और सीलिंग की जाएगी। -अशोक सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ...और इधर चमकाए जा रहे अफसरों के कमरे लखनऊ। एक ओर नगर निगम के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं है, उधर अफसरों के ऑफिस चमकाए जा रहे हैं। मुख्य अभियंता, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, कई कर्मचारी संगठनों के बाद अब नगर निगम लेखा विभाग के नए कार्यालय को आलीशान बनाने में खूब पैसा खर्च किया जा रहा है। पूर्ण वातानुकूलित इस ऑफिस में वही अफसर बैठ रहे हैं, जिनके पाए शानदार कमरा पहले से है। उधर, कर्मचारियों और नगर निगम आने वाले करदाताओं के लिए बनाए शौचालय बदहाल हैं। नगर निगम के कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा ने भी सवाल भी उठाया है कि अफसरों के ऑफिस चमकाने को बजट कहां से आ रहा है। यह हाल तब है जब नगर आयुक्त खुद फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के निर्देश दे चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन