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26 दिन 35 फॉल्ट, कैसे मिलेगी 16 घंटे बिजली?
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 30 Jun 2014 03:01 AM IST
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माल उपकेंद्र के दायरे में आने वाले 250 गांव के लोग निर्बाध बिजली पाना तो दूर करीब एक हफ्ते से अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
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वजह यह कि घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने से नई 33 केवी लाइन के चालू होने के बाद 26 दिन में 35 फॉल्ट आए।
अंतिम बार 21 जून की रात फॉल्ट आया जो अब तक ठीक नहीं हो पाया। यह नमूना है मध्यांचल निगम की बिजली सुधार कार्य की हकीकत का।
दरअसल डेढ़ साल में इस बिजली लाइन को तैयार करने के दौरान सामग्री बेचने वाली कंपनियों, इंजीनियरों एवं ठेकेदार ने जमकर लूट मचाई।
जबकि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम का दावा था कि राजधानी से मात्र 35 किमी दूर स्थित इस उपकेंद्र से जुड़े गांवों के 10 हजार से अधिक कनेक्शनधारकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलेगी।
इसके लिए निगम ने सरकार से आठ करोड़ रुपये की नई 33 केवी लाइन बनाने की मंजूरी भी ले ली।
मध्यांचल निगम के बिजनेस प्लान 2012-13 में इस लाइन को बनाने की योजना तैयार हुई और बिजनेस प्लान 2013-14 में इसका कार्य शुरू हुआ।
हरदोई रोड स्थित 132 केवी रहीमाबाद उपकेंद्र से करीब 20 किमी लंबी लाइन में 12 किमी भूमिगत केबल बिछाया गया और 8 किमी पोल लगाकर ओवर हेड तार खींचे गए।
इसमें करीब 7 करोड़ रुपये का केबल शामिल है। निर्माण इकाई ने यह बिजली लाइन बनाकर 27 मई को वितरण इकाई के हवाले कर दी।
सेस खंड दो अधिशासी अभियंता अनूप सक्सेना की मानें तो पहले दिन बिजली चालू की गई तो कई इंसुलेटर क्षतिग्रस्त हो गए।
इससे सप्लाई ठप हो गई। इसके बाद जब-जब नई लाइन को चालू करने का प्रयास किया तब-तब फॉल्ट हुए।
कभी इंसुलेटर क्षतिग्रस्त हो गए, तो कभी लाइन में गड़बड़ी तो कभी केबल बॉक्स ने दगा दे दिया। अंतिम बार 21 जून की रात फॉल्ट आया जो अब तक ठीक नहीं हो पाया।
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माल उपकेंद्र को 220 केवी हरदोई रोड उपकेंद्र से जाने वाले मलिहाबाद फीडर से चालू किया गया तो 29 जून तड़के चार बजे उसमें भी फॉल्ट आ गया।
दूसरी तरफ डीके सक्सेना का कहना कि ठेकेदार को 80 लाख रुपये में लाइन बनाने का ठेका दिया गया था। ठेकेदार को करीब 60 लाख रुपये का भुगतान हो चुका है।
जबकि यह बिजली लाइन वितरण इकाई के इंजीनियरों के लिए नासूर बन गई है।
अनफिट लाइन को बताया दिया फिट
निर्माण की खंडीय इकाई ने यह लाइन तकनीकी दृष्टि से अनफिट होते हुए भी फिट होने का दावा करके वितरण इकाई के हवाले कर दी।
इलाके के जूनियर इंजीनियर अनिल वाजपेयी की माने तो यह लाइन सरकारी दस्तावेजों में अभी हस्तांतरित नहीं है।
लाइन में लगाए घटिया इंसुलेटर
माल की नई 33 केवी लाइन में जो घटिया इंसुलेटर ठेकेदार ने लगाए वह मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की सामग्री प्रबंध इकाई ने खरीदे थे।
खुर्जा स्थित सूरी इलेक्ट्रिकल एंड सिरेमिक कंपनी से यह इंसुलेटर खरीदे गए थे।
इंसुलेटरों की गुणवत्ता परखने में इंजीनियरों की टीम ने भी अनदेखी की और सिर्फ कागजी खानापूर्ति करके चले आए।
इससे 33 केवी लाइन को चालू करते ही पिन इंसुलेटर क्षतिग्रस्त यानी फट जाता है।