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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Negligence: Dr. M Khan Hospital in Bareilly fined 55.74 lakh for leaving cotton in the stomach during operation of pregnant woman

लापरवाही : गर्भवती महिला के ऑपरेशन के दौरान पेट में कॉटन छोड़ने पर बरेली के डॉ. एम खान हॉस्पिटल पर 55.74 लाख का जुर्माना

Thu, 07 Oct 2021 02:04 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 07 Oct 2021 02:04 PM IST
सार

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, लखनऊ के सदस्य राजेंद्र सिंह ने साबिहा हामिद के शिकायती वाद पर बुधवार को यह फैसला सुनाया।

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Negligence: Dr. M Khan Hospital in Bareilly fined 55.74 lakh for leaving cotton in the stomach during operation of pregnant woman
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बरेली के डॉक्टर एम खान हॉस्पिटल और डॉ. यास्मीन खान पर 55 लाख 74 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एक मरीज के इलाज में गंभीर लापरवाही सामने आने पर यह कार्रवाई की गई है। आयोग के आदेश के अनुसार, यह राशि 12 प्रतिशत ब्याज समेत चुकानी होगी।

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राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, लखनऊ के सदस्य राजेंद्र सिंह ने साबिहा हामिद के शिकायती वाद पर बुधवार को यह फैसला सुनाया। आयोग से मिले ब्यौरे के अनुसार, साबिहा हामिद गर्भवती थीं, जिसके लिए वह डॉ. एम. खान हॉस्पिटल गईं। वहां डॉ. यास्मीन खान ने सिजेरियन ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद उन्हें लगातार दर्द की शिकायत बनी रही। साबिहा ने अस्पताल जाकर कई बार डॉ. यास्मीन खान को दिखाया, पर वह उसका कोई इलाज नहीं कर सकीं। फिर डॉ. यास्मीन ने उन्हें मुरादाबाद के डॉ. राजीव गुप्ता के पास भेजा, लेकिन वह भी उनके रोग का इलाज नहीं कर सके।
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साबिहा खान ने लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में आकर अपनी जांच कराई, तब मालूम हुआ कि सिजेरियन ऑपरेशन के समय उनके पेट में कॉटन का बंडल लापरवाही से छोड़ दिया गया था। इससे हालत अत्यंत गंभीर हो गई। एसजीपीजीआई में उनका तीन बार ऑपरेशन किया गया और वह अक्तूबर 2010 से जनवरी 2012 तक तक इस पीड़ा का सामना करती रहीं।
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निर्णय में कई नजीरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस मामले में संबंधित अस्पताल और डॉक्टर ने मरीज के ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही बरती। निर्णय पारित करते हुए 55.74 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश पारित किया। इस राशि पर 1 नवंबर 2010 से से 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज भी देने का आदेश दिया गया।

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