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नीट यूजी 2025 रिजल्ट : लखनऊ के मेधावियों ने जुनून, संघर्ष और अनुशासन से सपनों में भरी जान
Sun, 15 Jun 2025 02:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 15 Jun 2025 02:13 AM IST
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नीट यूजी 2025 रिजल्ट : लखनऊ के मेधावियों ने जुनून, संघर्ष और अनुशासन से सपनों में भरी जान
लखनऊ। हर सपना तब तक अधूरा रहता है... जब तक उसे मेहनत की आग में तपाया न जाए। नीट यूजी 2025 के नतीजे इस बात की गवाही हैं कि अगर इरादे सच्चे हों और हौसला बुलंद तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। लखनऊ के इन होनहारों ने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि अपने जुनून, संघर्ष और अनुशासन से मिसाल भी कायम की। किसी ने सोशल मीडिया को अलविदा कहा, तो किसी ने तीन बार हारने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। इनकी कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि उस सफर की है... जिसमें हर मोड़ पर था आत्मविश्वास और उम्मीद का उजाला। आइए मिलते हैं... नीट यूजी 2025 में शानदार प्रदर्शन करने वाले इन सितारों से, जिन्होंने अपनी मेहनत से सपनों को हकीकत बना दिया...।
ईमानदारी से पढ़ाई और आत्मनिर्भरता बनीं सफलता की कुंजी
- अद्विता श्रीवास्तव, एआईआर : 325
नीट की तैयारी करने वाले युवा पढ़ाई में ईमानदारी का महत्व समझते होंगे। इसलिए ईमानदारी से पढ़ना है। मैंने कोचिंग में जो पढ़ा उसका घर पर कड़ा अभ्यास किया। खुद के नोट्स बनाए जो टॉपिक समझ नहीं आए, उन्हें बार बार अध्यापकों से पूछा। इसी से सफलता मिली। परिवार में अकेली हूं। पिता डॉ. आलोक श्रीवास्तव और मां प्रियंका राय डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में चिकित्सक हैं और मेरी प्रेरणा हैं। माता पिता को डॉक्टर के रूप में देखती थी तो हमेशा से मन में ये सपना रहता था कि मैं डॉक्टर कब बनूंगी। अब इस सपने के करीब हूं तो इतनी खुशी हो रही है कि शब्दों में बयां करना मुश्किल है। माता पिता और परिवार के आशीर्वाद से ही ये लक्ष्य हासिल हो पाया है।
समय प्रबंधन और सोशल मीडिया से दूरी रही निर्णायक
यश्मित गर्ग, एआईआर : 805
नीट की तैयारी के दौरान समय प्रबंधन सबसे जरूरी था। इस बीच सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और इंटरनेट का उपयोग पढ़ाई के लिए ही किया। तैयारी के दौरान कोचिंग के मॉक टेस्ट, रिवीजन की गतिविधियां करने का खूब फायदा मिला। डॉक्टर का सपना रखने वाले विद्यार्थियों के लिए सलाह है कि पढ़ाई के दौरान घबराएं नहीं। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहे। जो समझ में न आए उसे नोट कर लें और फिर शिक्षकों से पूछकर दोबारा याद करें। इससे पढ़ाई करने में तो आसानी होगी। याद भी जल्दी होगा। पिता डॉ. उत्तम गर्ग विवेकानंद हॉस्पिटल में हड्डी के डॉक्टर हैं और मां रुचिका गर्ग महिला रोग विशेषज्ञ हैं। उन्हीं से चिकित्सा के क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली।
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पहले प्रयास में सफलता, सोशल मीडिया अकाउंट किए डिलीट
सनिष्का श्रीवर्त, एआईआर : 815
मैंने कोचिंग के बाद उतना ही समय घर पर पढ़ाई को दिया। इस बीच सभी सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए। इंटरनेट का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया और व्हाट्सएप का इस्तेमाल केवल सूचना के लिए किया। यही कारण रहा कि पहले प्रयास में सफलता हासिल की। अब एम्स ऋषिकेष से मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती हूं। तैयारी करने वाले युवाओं से कहना कि सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दें। पार्टी कम कर दें, अलग से नोट्स तैयार करें और जो भी समझ न आए उसे बार-बार समझ कर सीखें और याद करें। पिता पीके वर्मा डीएचओ हैं और मां राजकीय डिग्री कॉलेज में शिक्षक हैं।
जीव विज्ञान बना मजबूत आधार
- शांभवी जायसवाल, रैंक : 3391
शांभवी ने बताया कि नीट यूजी में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान से सवाल पूछे गए थे। इनमें सबसे ज्यादा प्रश्न जीव विज्ञान के थे। इसी विषय की तैयारी बेहतर रही। पुराने प्रश्न पत्र हल करने के साथ नियमित अध्ययन से सफलता मिली।
तीसरे प्रयास में हासिल की मंजिल
तनिष्का गुप्ता, रैंक : 4288
तनिष्का ने बताया कि वर्ष 2022 में इंटरमीडिएट किया था। तब से अभी तक तीन बार नीट यूजी की परीक्षा दी। लेकिन, प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। पर हिम्मत नहीं हारी और इस बार ऑल इंडिया रैंक में बेहतर प्रदर्शन रहा। जीव विज्ञान में अच्छे नंबर आए और यह संभव हुआ हर दिन पांच से छह घंटे की नियमित पढ़ाई से।
बचपन का सपना बना वास्तविकता
- हिंमाशु द्विवेदी, रैंक : 4881
हिंमाशु बताते हैं कि डॉक्टर बनने का सपना बचपन से ही है। इसके लिए हाईस्कूल से ही तैयारी कर रहा था। इंटरमीडिएट के बाद नीट यूजी की परीक्षा दी और परिणाम सामने है। पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। हर दिन छह से आठ घंटे की नियमित पढ़ाई से सफलता मिली।
पुराने प्रश्न पत्रों से मिला मार्गदर्शन
- युवराज प्रजापति, रैंक : 5462
युवराज ने बताया कि किताबें पढ़ने के साथ ही नियमित रूप से प्रश्न पत्र हल करते थे। साथ ही पिछले पांच साल के पुराने पेपर के प्रश्नों को समझने और उसके आधार पर आगे की तैयारी में मदद मिली। परिवार की भी इच्छा है मैं डॉक्टर बनूं। सफलता में माता-पिता व शिक्षकों का अहम योगदान है।
दैनिक 10 घंटे की पढ़ाई ने आसान की राह
- सश्वी वर्मा, रैंक : 7380
सश्वी ने बताया कि वर्ष 2024 में इंटरमीडिएट किया था। एक साल के नियमित प्रयास और हर दिन आठ से 10 घंटे की पढ़ाई से सफलता हासिल हुई है। इस दौरान माता-पिता और शिक्षकों का अहम योगदान रहा है। उम्मीद है कि बेहतर मेडिकल संस्थान मिल जाए। पहला लक्ष्य एमबीबीएस बनना है।
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ईमानदारी से पढ़ाई और आत्मनिर्भरता बनीं सफलता की कुंजी
- अद्विता श्रीवास्तव, एआईआर : 325
नीट की तैयारी करने वाले युवा पढ़ाई में ईमानदारी का महत्व समझते होंगे। इसलिए ईमानदारी से पढ़ना है। मैंने कोचिंग में जो पढ़ा उसका घर पर कड़ा अभ्यास किया। खुद के नोट्स बनाए जो टॉपिक समझ नहीं आए, उन्हें बार बार अध्यापकों से पूछा। इसी से सफलता मिली। परिवार में अकेली हूं। पिता डॉ. आलोक श्रीवास्तव और मां प्रियंका राय डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में चिकित्सक हैं और मेरी प्रेरणा हैं। माता पिता को डॉक्टर के रूप में देखती थी तो हमेशा से मन में ये सपना रहता था कि मैं डॉक्टर कब बनूंगी। अब इस सपने के करीब हूं तो इतनी खुशी हो रही है कि शब्दों में बयां करना मुश्किल है। माता पिता और परिवार के आशीर्वाद से ही ये लक्ष्य हासिल हो पाया है।
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समय प्रबंधन और सोशल मीडिया से दूरी रही निर्णायक
यश्मित गर्ग, एआईआर : 805
नीट की तैयारी के दौरान समय प्रबंधन सबसे जरूरी था। इस बीच सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और इंटरनेट का उपयोग पढ़ाई के लिए ही किया। तैयारी के दौरान कोचिंग के मॉक टेस्ट, रिवीजन की गतिविधियां करने का खूब फायदा मिला। डॉक्टर का सपना रखने वाले विद्यार्थियों के लिए सलाह है कि पढ़ाई के दौरान घबराएं नहीं। बीच-बीच में ब्रेक लेते रहे। जो समझ में न आए उसे नोट कर लें और फिर शिक्षकों से पूछकर दोबारा याद करें। इससे पढ़ाई करने में तो आसानी होगी। याद भी जल्दी होगा। पिता डॉ. उत्तम गर्ग विवेकानंद हॉस्पिटल में हड्डी के डॉक्टर हैं और मां रुचिका गर्ग महिला रोग विशेषज्ञ हैं। उन्हीं से चिकित्सा के क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली।
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पहले प्रयास में सफलता, सोशल मीडिया अकाउंट किए डिलीट
सनिष्का श्रीवर्त, एआईआर : 815
मैंने कोचिंग के बाद उतना ही समय घर पर पढ़ाई को दिया। इस बीच सभी सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए। इंटरनेट का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए किया और व्हाट्सएप का इस्तेमाल केवल सूचना के लिए किया। यही कारण रहा कि पहले प्रयास में सफलता हासिल की। अब एम्स ऋषिकेष से मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती हूं। तैयारी करने वाले युवाओं से कहना कि सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दें। पार्टी कम कर दें, अलग से नोट्स तैयार करें और जो भी समझ न आए उसे बार-बार समझ कर सीखें और याद करें। पिता पीके वर्मा डीएचओ हैं और मां राजकीय डिग्री कॉलेज में शिक्षक हैं।
जीव विज्ञान बना मजबूत आधार
- शांभवी जायसवाल, रैंक : 3391
शांभवी ने बताया कि नीट यूजी में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान से सवाल पूछे गए थे। इनमें सबसे ज्यादा प्रश्न जीव विज्ञान के थे। इसी विषय की तैयारी बेहतर रही। पुराने प्रश्न पत्र हल करने के साथ नियमित अध्ययन से सफलता मिली।
तीसरे प्रयास में हासिल की मंजिल
तनिष्का गुप्ता, रैंक : 4288
तनिष्का ने बताया कि वर्ष 2022 में इंटरमीडिएट किया था। तब से अभी तक तीन बार नीट यूजी की परीक्षा दी। लेकिन, प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। पर हिम्मत नहीं हारी और इस बार ऑल इंडिया रैंक में बेहतर प्रदर्शन रहा। जीव विज्ञान में अच्छे नंबर आए और यह संभव हुआ हर दिन पांच से छह घंटे की नियमित पढ़ाई से।
बचपन का सपना बना वास्तविकता
- हिंमाशु द्विवेदी, रैंक : 4881
हिंमाशु बताते हैं कि डॉक्टर बनने का सपना बचपन से ही है। इसके लिए हाईस्कूल से ही तैयारी कर रहा था। इंटरमीडिएट के बाद नीट यूजी की परीक्षा दी और परिणाम सामने है। पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। हर दिन छह से आठ घंटे की नियमित पढ़ाई से सफलता मिली।
पुराने प्रश्न पत्रों से मिला मार्गदर्शन
- युवराज प्रजापति, रैंक : 5462
युवराज ने बताया कि किताबें पढ़ने के साथ ही नियमित रूप से प्रश्न पत्र हल करते थे। साथ ही पिछले पांच साल के पुराने पेपर के प्रश्नों को समझने और उसके आधार पर आगे की तैयारी में मदद मिली। परिवार की भी इच्छा है मैं डॉक्टर बनूं। सफलता में माता-पिता व शिक्षकों का अहम योगदान है।
दैनिक 10 घंटे की पढ़ाई ने आसान की राह
- सश्वी वर्मा, रैंक : 7380
सश्वी ने बताया कि वर्ष 2024 में इंटरमीडिएट किया था। एक साल के नियमित प्रयास और हर दिन आठ से 10 घंटे की पढ़ाई से सफलता हासिल हुई है। इस दौरान माता-पिता और शिक्षकों का अहम योगदान रहा है। उम्मीद है कि बेहतर मेडिकल संस्थान मिल जाए। पहला लक्ष्य एमबीबीएस बनना है।