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नीट पीजी : 180 सवालों की क्लीनिकल चुनौती में उलझे अभ्यर्थी
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लखनऊ। नीट पीजी में इस बार सवालों की संख्या तो कम हुई लेकिन अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा आसान नहीं हुई। रविवार को राजधानी में आयोजित ऑनलाइन परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नों की संख्या 200 से घटाकर 180 कर दी गई लेकिन इसका फायदा समय के स्तर पर नहीं मिला। वन लाइनर प्रश्नों की संख्या कम रही और जटिल क्लीनिकल केस अधिक पूछे गए। लंबे सवालों को पढ़ने और उनका सही अर्थ समझने में अधिक समय लगा। ऐसे में समय प्रबंधन चुनौती बन गया।
देशभर में करीब 339 केंद्रों पर आयोजित परीक्षा के साथ लखनऊ में भी 10 केंद्रों पर सैकड़ों मेडिकल छात्र परीक्षा में शामिल हुए। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा एक ही शिफ्ट में सुबह नौ बजे से दोपहर 12:30 बजे तक चली। बिजनौर रोड स्थित आजाद इंस्टीट्यूट, उसके निकट भुनवाल टीसीएस आईओएन डिजिटल जोन समेत शहर के कई प्रमुख संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) से जुड़े प्रश्नों को पढ़ने और समझने में खासा समय लगा। लंबे सवालों के कारण एक-एक प्रश्न पर अपेक्षाकृत अधिक समय देना पड़ा। क्लीनिकल और गायनी से जुड़े सवाल भी अधिक रहे। मेडिसिन और फार्माकोलॉजी के प्रश्न कई अभ्यर्थियों को उलझाऊ लगे।
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देशभर में करीब 339 केंद्रों पर आयोजित परीक्षा के साथ लखनऊ में भी 10 केंद्रों पर सैकड़ों मेडिकल छात्र परीक्षा में शामिल हुए। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा एक ही शिफ्ट में सुबह नौ बजे से दोपहर 12:30 बजे तक चली। बिजनौर रोड स्थित आजाद इंस्टीट्यूट, उसके निकट भुनवाल टीसीएस आईओएन डिजिटल जोन समेत शहर के कई प्रमुख संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
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परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम (सीएनएस) से जुड़े प्रश्नों को पढ़ने और समझने में खासा समय लगा। लंबे सवालों के कारण एक-एक प्रश्न पर अपेक्षाकृत अधिक समय देना पड़ा। क्लीनिकल और गायनी से जुड़े सवाल भी अधिक रहे। मेडिसिन और फार्माकोलॉजी के प्रश्न कई अभ्यर्थियों को उलझाऊ लगे।
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