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नीट फर्जीवाड़ा: एससी-एसटी को 23 की जगह दे दिया 78 फीसदी आरक्षण, सामान्य के हिस्से आईं सिर्फ नौ फीसदी सीटें

Mon, 01 Sep 2025 06:59 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 01 Sep 2025 06:59 AM IST
सार

Admission through NEET in UP: राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नीट के द्वारा हुए आवंटन पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट ने प्रवेश प्रक्रिया को पहले ही रद्द कर दिया था। 

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NEET fraud in UP: SC-ST given 78% reservation instead of 23%, general category got only 9% seats
नीट पीजी परीक्षा 2025 - फोटो : A

विस्तार

राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज, अंबेडकरनगर, जालौन और सहारनपुर में एमबीबीएस के दाखिलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति को 23 के बजाय 78 फीसदी आरक्षण दे दिया गया। वहीं अति पिछड़े वर्ग को 13 फीसदी और सामान्य का हिस्सा सिर्फ नौ फीसदी जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का कोटा लागू ही नहीं किया। ऐसे में हाईकोर्ट ने नीट 2025 की काउंसिलिंग रद्द करने का आदेश दिया है। हालांकि अब चिकित्सा शिक्षा विभाग दोबारा अपील की तैयारी में जुटा है।

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प्रदेश में अनुसूचित जाति को 21, अनुसूचित जनजाति को 2, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था है। मेडिकल कॉलेजों का निर्माण अलग-अलग समय पर हुआ है। कन्नौज, अंबेडकरनगर, जालौन और सहारनपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के निर्माण के वक्त समाज कल्याण विभाग की ओर से विशेष घटक के तहत 70 फीसदी बजट दिया गया। जबकि 30 फीसदी बजट सामान्य था।
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हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में बताया गया कि इन कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों को हॉस्टल में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों को 70 फीसदी आरक्षण देना था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इसकी गलत व्याख्या कर दी गई। इसके बाद एमबीबीएस के दाखिलों में अनुसूचित जाति और जनजाति को 23 फीसदी आरक्षण देने की जगह 78 फीसदी आरक्षण दे दिया गया। यह व्यवस्था कई साल से चल रही है। इस वर्ष की काउंसिलिंग में भी इसी व्यवस्था के तहत सीटें आवंटित की गई हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने काउंसिलिंग को ही रद्द कर दिया है।

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कॉलेजों में हैं 100-100 सीटें

इन चारों कॉलेजों में एमबीबीएस की 100 सीटें हैं। जिसमें 15 फीसदी सीटें केंद्र के कोटे की हैं। बची 85 फीसदी सीटों में 78 फीसदी एससी-एसटी को दी गईं। बाकी सीटों पर पिछड़े व सामान्य वर्ग के अभ्यार्थियों को दाखिला दिया गया। खास बात यह है कि इन चारों कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस को एक भी सीट नहीं दी गई।

दोबारा अपील की तैयारी में है चिकित्सा शिक्षा विभाग

हाईकोर्ट के आदेश को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग दोबारा अपील की तैयारी में है। इसके लिए संबंधित कॉलेजों के निर्माण से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। उन दस्तावेजों की भी पड़ताल शुरू की गई है, जिसमें निर्माण के वक्त आरक्षण की बात कही गई है। विभाग के अधिकारी यह भी तर्क दे रहे हैं कि संबंधित कॉलेजों में पहले से ही इसी आरक्षण व्यवस्था के तहत एमबीबीएस की सीटें आवंटित होती रही हैं। यही वजह है कि इस वर्ष भी पूर्व में लागू व्यवस्था के तहत सीटें आवंटित की गई है। प्रथम चरण की काउंसिलिंग रद्द किए जाने से सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की सीट मैट्रिक प्रभावित होगी। खाली सीटों के आवंटन में भी दिक्क्तें आएंगी।

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