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Lucknow News: जरूरत 15 हजार सफाईकर्मियों की, नगर निगम में हैं तीन हजार
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सफाईकर्मी न होने से शहर में लगा कूड़े का ढेर।
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लखनऊ। शहर से अवैध ठेलिया वालों को बाहर करने के बीच सफाई कर्मियों की कमी का मामला भी उठ रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करीब 15 हजार नियमित सफाई कर्मियों की जरूरत है, लेकिन नगर निगम में सिर्फ तीन हजार हैं। 10 हजार आउटसोर्सिंग कर्मियों से काम चलाया जा रहा है। नियमित कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए कई से साल कर्मचारी संगठन और पार्षद मांग कर रहे हैं, लेकिन भर्ती नहीं हो रही है।
करीब 64 साल पहले नगर निगम में 3,400 सफाई कर्मचारियों के पद स्वीकृत किए गए थे। तब आबादी आठ से 10 लाख थी, अब आबादी करीब पांच गुना बढ़ गई और शहर का विस्तार भी हुआ। इस हिसाब से करीब 15 हजार नियमित सफाई कर्मी होने चाहिए। वर्तमान में स्थायी संविदा के एक हजार कर्मी मिलाकर करीब तीन हजार सफाई कर्मचारी नगर निगम में हैं। वर्तमान में जितने पद स्वीकृत हैं उतने भी कर्मचारी नहीं हैं। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने और सफाई कर्मियों की कमी को पूरा करने के लिए करीब 10 हजार कर्मियों को ठेके पर रखा गया है। इसमें फर्जीवाड़ा होता है, जिसका असर सफाई पर पड़ता है।
पार्षदों ने कहा, जरूरत के आधे भी नहीं कर्मचारी
रानीलक्ष्मी बाई वार्ड के पार्षद शफीकुर्रहमान चचा ने बताया कि उनके वार्ड में करीब दो वर्ष में 20 सफाई कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन नियुक्ति एक भी नहीं हुई है। इसका असर सफाई पर दिखता है। इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड की पार्षद रंजना अवस्थी का कहना है कि उनके वार्ड में करीब 50 कर्मचारी कम हैं। एक साल से मांग करने के बाद भी कर्मचारी नहीं तैनात किए गए हैं। बालागंज वार्ड की पार्षद कमलेश कुमारी का कहना है कि वार्ड में करीब 60 सफाई कर्मचारी कम हैं।
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शहर का दायरा बढ़ा तो कर्मचारी भी बढ़ाए जाएं
सफाई कर्मचारी नेता राजेंद्र बाल्मीकि, अशोक बाल्मीकि, नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा, उपाध्यक्ष शमील एखलाक कहते हैं कि 1960 में शहर की आबादी आठ-दस लाख के करीब रही होगी। इसी आधार पर कर्मियों के पद स्वीकृत किए थे। अब शहर का दायरा बढ़ गया है, लेकिन सफाई कर्मियों की संख्या नहीं बढ़ी है। खाली पदों को भी नहीं भरा गया है। ठेके के कर्मियों से काम चलाया जा रहा है।
करीब 64 साल पहले नगर निगम में 3,400 सफाई कर्मचारियों के पद स्वीकृत किए गए थे। तब आबादी आठ से 10 लाख थी, अब आबादी करीब पांच गुना बढ़ गई और शहर का विस्तार भी हुआ। इस हिसाब से करीब 15 हजार नियमित सफाई कर्मी होने चाहिए। वर्तमान में स्थायी संविदा के एक हजार कर्मी मिलाकर करीब तीन हजार सफाई कर्मचारी नगर निगम में हैं। वर्तमान में जितने पद स्वीकृत हैं उतने भी कर्मचारी नहीं हैं। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने और सफाई कर्मियों की कमी को पूरा करने के लिए करीब 10 हजार कर्मियों को ठेके पर रखा गया है। इसमें फर्जीवाड़ा होता है, जिसका असर सफाई पर पड़ता है।
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पार्षदों ने कहा, जरूरत के आधे भी नहीं कर्मचारी
रानीलक्ष्मी बाई वार्ड के पार्षद शफीकुर्रहमान चचा ने बताया कि उनके वार्ड में करीब दो वर्ष में 20 सफाई कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन नियुक्ति एक भी नहीं हुई है। इसका असर सफाई पर दिखता है। इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड की पार्षद रंजना अवस्थी का कहना है कि उनके वार्ड में करीब 50 कर्मचारी कम हैं। एक साल से मांग करने के बाद भी कर्मचारी नहीं तैनात किए गए हैं। बालागंज वार्ड की पार्षद कमलेश कुमारी का कहना है कि वार्ड में करीब 60 सफाई कर्मचारी कम हैं।
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शहर का दायरा बढ़ा तो कर्मचारी भी बढ़ाए जाएं
सफाई कर्मचारी नेता राजेंद्र बाल्मीकि, अशोक बाल्मीकि, नगर निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आनंद वर्मा, उपाध्यक्ष शमील एखलाक कहते हैं कि 1960 में शहर की आबादी आठ-दस लाख के करीब रही होगी। इसी आधार पर कर्मियों के पद स्वीकृत किए थे। अब शहर का दायरा बढ़ गया है, लेकिन सफाई कर्मियों की संख्या नहीं बढ़ी है। खाली पदों को भी नहीं भरा गया है। ठेके के कर्मियों से काम चलाया जा रहा है।