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NCRB Crime Report : कम नहीं हो रही दुर्घटना में होने वाली मौतों की संख्या, शादी के लिए किडनैपिंग सबसे ज्यादा

Tue, 05 Dec 2023 06:27 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 05 Dec 2023 06:27 PM IST
सार

तमाम कवायदों के बाद भी महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराध में कमी नहीं हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में बीते सालों के मुकाबले इजाफा हुआ है। हालांकि हत्या के मामलों में कमी दर्ज की गयी है।

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NCRB Crime Report: Number of deaths in accidents is not decreasing
विशेष पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें कम करने की तमाम कवायदों के बावजूद वर्ष 2022 में यूपी में 21,392 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। वर्ष 2021 में यूपी में 18,972 लोगों की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हुई थी। आबादी के हिसाब से तुलना करें, तो सड़क दुर्घटना में होने वाली मौत के मामलेे में यूपी देश में 14वें स्थान पर आता है।

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वहीं यूपी में हिट एंड रन के सबसे ज्यादा 16,343 मामले बीते वर्ष दर्ज किए गये। वर्ष 2021 में इनकी संख्या 14,510 थी। इसमें भी करीब दस फीसद से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में हिट एंड रन के मामले होने की दर यूपी से अधिक है। उल्लेखनीय है कि बीते दो वर्ष के दौरान यूपी में रेल दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है।
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पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण पर कार्रवाई कम
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के बाद देश में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सबसे ज्यादा मामले बीते वर्ष यूपी में दर्ज हुए। महाराष्ट्र में इनकी संख्या 198 थी, जबकि यूपी में 103 मामले दर्ज हुए थे। वहीं बाकी राज्यों में इस अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या नगण्य रही। हालांकि यदि पर्यावरण एवं प्रदूषण संबंधी समस्त कानूनों की बात करें तो इसके तहत कार्रवाई करने में यूपी देश में पांचवें स्थान पर है। हालांकि ध्वनि प्रदूषण के मामले में यूपी में कार्रवाई पड़ोसी राज्य राजस्थान के मुकाबले नगण्य रही। राजस्थान में धवनि प्रदूषण से संबंधित 7300 मामले दर्ज हुए, जबकि यूपी में केवल एक मामला दर्ज हुआ।
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एसिड अटैक के मामले बढ़े
महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में सबसे जघन्य माने जाने वाले एसिड अटैक के 30 मामले बीते वर्ष दर्ज किए गये, जो वर्ष 2021 से अधिक हैं। वर्ष 2022 में एसिड अटैक के पीड़ितों की संख्या 32 रही। जबकि वर्ष 2021 में यह संख्या 25 थी। वर्ष 2022 में महिलाओं के शारीरिक शोषण के 4533 मामले दर्ज हुए, वर्ष 2021 में यह संख्या 3557 थी। हालांकि अन्य राज्यों की तुलना में यूपी में इनकी दर कम है। कार्यस्थल पर महिलाओं के शारीरिक शोषण के छह मामले यूपी में दर्ज हुए। वर्ष 2021 में इसकी संख्या 17 थी।

सरकारी कर्मचारियों पर हमले के 240 मामले
यूपी में वर्ष 2022 में सरकारी कार्य करने के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर हमले के 240 मामले दर्ज किए गये, जिसमें पीड़ितों की संख्या 246 थी। गोवा में इसकी दर सबसे ज्यादा है। वहीं यूपी देश भर में नौवें स्थान पर है।

शादी के लिए किडनैपिंग
एनसीआरबी की रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य है कि यूपी में शादी के लिए अपहरण की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। हालांकि आबादी के हिसाब से तुलना करें तो बिहार में इसकी दर सबसे ज्यादा है। यूपी में बीते वर्ष शादी के लिए अपहरण के 9598 मामले दर्ज किए गये थे।

यूपी में होने वाले अपराधों पर एक नजर
- यूपी में बीते वर्ष सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। हालांकि दो समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने के देश में सर्वाधिक 217 मामले यूपी में दर्ज किए गये थे।
- बीते वर्ष सार्वजनिक परिवहन के साधनों में महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण होने के सबसे ज्यादा 87 मामले यूपी में दर्ज हुए।
- शेल्टर होम्स में महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले शारीरिक शोषण के 126 मामले बीते वर्ष दर्ज किए गये।
- पति तथा उसके रिश्तेदारों द्वारा किए जाने वाले अत्याचार के 20,371 मामले दर्ज हुए, जिसमें पीड़ितों की संख्या 20,511 थी।

अन्य राज्यों की तुलना में अपराध दर
हत्या - 28
हत्या का प्रयास- 25
शीलभंग- 17
फिरौती हेतु अपहरण- 30
बलात्कार- 24
डकैती- 31
पाक्सो अधिनियम- 25
महिलाओं के विरुद्ध अपराध- 14
बच्चों के विरुद्ध अपराध- 29

आबादी के हिसाब से तुलना करने पर अन्य राज्यों के मुकाबले यूपी में क्राइम रेट कम है। वहीं अपराधियों को सजा दिलाने में यूपी बीते कई सालों से पहले स्थान पर है। - प्रशांत कुमार, स्पेशल डीजी कानून-व्यवस्था


 

महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में हुआ इजाफा

तमाम कवायदों के बाद भी महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराध में कमी नहीं हो रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में बीते सालों के मुकाबले इजाफा हुआ है। हालांकि हत्या के मामलों में कमी दर्ज की गयी है।

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में प्रदेश में संज्ञेय अपराध से संबंधित कुल 4,01,787 मामले दर्ज किए गये। इनमें प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के 65,743 मामले शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराध के वर्ष 2020 में 49,383 और वर्ष 2021 में 56,083 मामले दर्ज किए गए थे। इसी तरह बच्चों के साथ होने वाले अपराधों की बात करें तो वर्ष 2022 में इनकी संख्या 18,282 रही। जबकि वर्ष 2020 में यह संख्या 15,271 और वर्ष 2021 में 16,838 थी। जघन्य अपराध में यदि हत्या के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 में प्रदेश में 3491 हत्या के मामले सामने आए। जबकि वर्ष 2020 में यह संख्या 3779 और वर्ष 2021 में 3717 थी। प्रदेश में अपहरण के मामलों में बीते वर्ष 2022 में इजाफा दर्ज किया गया है। वर्ष 2022 में अपहरण के कुल 16263 मामले दर्ज किए गये। जबकि वर्ष 2020 में इनकी संख्या 12,913 और वर्ष 2021 में 14554 थी।

प्रेम संबंधों में हुई 253 हत्याएं
बता दें कि वर्ष 2022 में प्रेम संबंधों में 253 हत्याएं हुई, जबकि अवैध संबंधों में होने वाली हत्याओं की संख्या 38 रही। डकैती और लूट के दौरान सात लोगों की हत्या हुई। मानव अंग बेचने के लिए सात हत्या के मामले सामने आए। आपराधिक गिरोहों के बीच दुश्मनी को लेकर कुल 14 हत्याएं हुई। आपसी विवाद में 710 हत्याएं हुई, जबकि ऑनर किलिंग को लेकर हत्या का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ।

वर्ष 2022 में हुए अपराधों के आंकड़ें
दहेज हत्या - 2138
बलात्कार- 3690
बलात्कार का प्रयास- 198
दंगे- 4478
लूट- 1975
डकैती- 80
रंगदारी- 366

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