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Nazool Land Bill: अयोध्या में एसपी विजिलेंस ऑफिस को ही कर दिया बेदखल... 90 साल से चल रहे SBI को भी किया बाहर
Sun, 04 Aug 2024 03:09 PM IST
शाहरुख खान
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 04 Aug 2024 03:09 PM IST
सार
अयोध्या में नजूल की जमीन पर बने एसपी विजिलेंस को ही बाहर कर दिया गया है। मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा करीब 90 साल से बसे भारतीय स्टेट बैंक को भी नजूल की जमीन से लगभग बाहर कर दिया है।
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Nazool Land Bill
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अयोध्या में नजूल की जमीन को फ्री होल्ड कराने का बड़ा खेल सामने आया है। यहां नजूल की जमीन यानी सरकारी जमीन पर बने एसपी विजिलेंस के ऑफिस को फ्री होल्ड कराकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सरकारी जमीन से सरकारी विभाग को बेदखल करने का मामला अयोध्या का है।
इसके अलावा करीब 90 साल से बसे भारतीय स्टेट बैंक को भी नजूल की जमीन से लगभग बाहर कर दिया है। सरकारी जमीन से सरकारी दफ्तरों को ही बेदखल किए जाने से हैरत में पड़े आवास विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
विभाग कई बिंदुओं पर इसकी जांच कर रहा है कि आखिर नजूल की जमीन को कैसे फ्री होल्ड किया गया, किन लोगों ने कराया, इसमें सरकारी महकमों और अधिकारियों की क्या भूमिका रही और इसे किस आधार पर खाली कराया गया।
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नजूल की आड़ में हावी सिंडीकेट का दवाब इतना जबरदस्त है कि सरकार अपनी ही जमीन नहीं बचा पा रहा है। अयोध्या में 1935 से जिस जमीन पर भारतीय स्टेट बैंक चल रहा है उसकी कीमत 300 करोड़ से ज्यादा है। नजूल की जमीन कब्जाने की रणनीति पूरे प्रदेश में संगठित रूप से चल रही है। ये हाल तब है जब नजूल की जमीन को फ्री होल्ड कराने का कोई प्रावधान ही नहीं है।
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इसके अलावा करीब 90 साल से बसे भारतीय स्टेट बैंक को भी नजूल की जमीन से लगभग बाहर कर दिया है। सरकारी जमीन से सरकारी दफ्तरों को ही बेदखल किए जाने से हैरत में पड़े आवास विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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विभाग कई बिंदुओं पर इसकी जांच कर रहा है कि आखिर नजूल की जमीन को कैसे फ्री होल्ड किया गया, किन लोगों ने कराया, इसमें सरकारी महकमों और अधिकारियों की क्या भूमिका रही और इसे किस आधार पर खाली कराया गया।
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नजूल की आड़ में हावी सिंडीकेट का दवाब इतना जबरदस्त है कि सरकार अपनी ही जमीन नहीं बचा पा रहा है। अयोध्या में 1935 से जिस जमीन पर भारतीय स्टेट बैंक चल रहा है उसकी कीमत 300 करोड़ से ज्यादा है। नजूल की जमीन कब्जाने की रणनीति पूरे प्रदेश में संगठित रूप से चल रही है। ये हाल तब है जब नजूल की जमीन को फ्री होल्ड कराने का कोई प्रावधान ही नहीं है।
कार्रवाई से डरते हैं अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक नजूल जमीनों को खाली कराने वाले सिंडीकेट इतने मजबूत हैं कि बड़े-बड़े अफसरों के हाथ कांपते हैं। डर के मारे अधिकारी कार्रवाई करने से कतराते हैं। शासन ने जब ऐसे ही नजूल रजिस्टर की जांच की तो बड़ा खेल पकड़ में आया। नजूल की जमीन पर तीन-तीन बार जमीन पर नाम बदल दिए गए।
सूत्रों के मुताबिक नजूल जमीनों को खाली कराने वाले सिंडीकेट इतने मजबूत हैं कि बड़े-बड़े अफसरों के हाथ कांपते हैं। डर के मारे अधिकारी कार्रवाई करने से कतराते हैं। शासन ने जब ऐसे ही नजूल रजिस्टर की जांच की तो बड़ा खेल पकड़ में आया। नजूल की जमीन पर तीन-तीन बार जमीन पर नाम बदल दिए गए।
इन जमीनों पर मूल नाम के बाद अन्य नाम कैसे बदले गए, इसका कोई जिक्र नहीं है। इसे कैसे किया गया, ये भी किसी को नहीं पता। राजकीय आस्थान की जमीन को फ्री होल्ड कराने के लिए बड़ा खेल किया गया। पहले इस जमीन को नजूल में शामिल किया गया। फिर फ्री होल्ड करा ली गई। अब शासन फर्जी तरीके से फ्री होल्ड कराई गई जमीन को निरस्त करेगा।
राम मंदिर पर फैसले के बाद से ही जम गई थी नजर
राम मंदिर पर फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने की ओर से भव्य राम मंदिर बनाने की घोषणा के साथ ही यहां जमीनों का खेल शुरू हो गया। सिर्फ पांच साल में अयोध्या की जमीनें सोना उगलने लगीं। बीघों में बिकने वाले प्लाट नोएडा-लखनऊ की तरह वर्गफुट में बिकने लगे। नजूल की अरबों की जमीन पर सफेदपोशों की नजर भी पड़ गई। करीब 92 एकड़ जमीन को फ्री होल्ड कराने के लिए हर दांव आजमाया जा रहा है।
राम मंदिर पर फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने की ओर से भव्य राम मंदिर बनाने की घोषणा के साथ ही यहां जमीनों का खेल शुरू हो गया। सिर्फ पांच साल में अयोध्या की जमीनें सोना उगलने लगीं। बीघों में बिकने वाले प्लाट नोएडा-लखनऊ की तरह वर्गफुट में बिकने लगे। नजूल की अरबों की जमीन पर सफेदपोशों की नजर भी पड़ गई। करीब 92 एकड़ जमीन को फ्री होल्ड कराने के लिए हर दांव आजमाया जा रहा है।