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यूपीः 80 लाख हेक्टेयर फसल पर प्रकृति की बड़ी मार
Sat, 28 Sep 2019 04:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 28 Sep 2019 04:38 AM IST
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प्रदेश में पिछले तीन दिनों से हो रही झमाझम बारिश अधिकतर किसानों के लिए मुसीबत साबित हुई है। करीब 80 लाख हेक्टेयर फसल पर इसका असर देखा जा रहा है। धान, अनाज और सब्जी उत्पादक किसानों पर सबसे ज्यादा प्रकृति की मार पड़ी है। इससे अन्न उत्पादक कराह रहा है, वहीं सरकार ने नुकसान के बाबत सर्वे कराने की बात कही है।
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यूपी के कमोबेश सभी जिलों में बुधवार से भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 27 सितंबर को प्रदेश की अभी तक की सामान्य वर्षा 1.6 मिमी रही है, जबकि इस बार 29.9 मिमी बारिश हुई। हालांकि अधिकतर जिलों में इस बार मानसून सीजन में 27 सितंबर तक की वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई है, लेकिन महज तीन दिनों में ही भारी बारिश होने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
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प्रदेश में खरीफ की बोआई व रोपाई कुल 120 लाख हेक्टेयर जमीन में की जाती है। इसमें से आधे रकबे में धान होता है। 9 लाख हेक्टेयर में बाजरा, 2 लाख हेक्टेयर में ज्वार, 7 लाख हेक्टेयर में मक्का और 5-6 लाख हेक्टेयर में सब्जी लगाई जाती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसान पंकज मिश्रा और अवध के किसान अम्बा प्रसाद बताते हैं कि जिन किसानों ने धान की जल्दी रोपाई की।
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मसलन, जुलाई के प्रथम सप्ताह तक रोपाई कर दी थी, उनमें अब बाली निकल आई है। बारिश के साथ चली हवा से यह पौधे गिर गए हैं। इससे जहां उत्पादन घटेगा, वहीं धान की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। अलबत्ता जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त में रोपे गए धान की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। प्रदेश के कमोबेश हर इलाके में इस बारिश बाजरा, ज्वार और मक्का की खेती को भारी नुकसान पहुंचा है।
ये फसलें कम पानी की जरूरत वाली हैं, इसलिए एकाएक ज्यादा पानी के साथ हवा चलने पर यह तबाह हो जाती हैं। मौजूदा स्थितियों में लौकी, तोरई, पालक, मेथी, मूली और भिंडी जैसी फसलें भी खेतों में ही सड़ जाएंगी। एक मोटे अनुमान के मुताबिक, करीब 80 लाख हेक्टेयर रकबे में उगाई जा रहीं इन फसलों के लिए पिछले तीन दिन काफी खराब साबित हुए हैं।
33 फीसदी नुकसान होने पर सरकारी राहत दिए जाने का प्रावधान
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बारिश रुकने पर नुकसान के बाबत सर्वे कराया जाएगा। 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान होने पर सरकार की ओर से किसानों को राहत राशि दिए जाने का प्रावधान है। सिंचित जमीन पर राहत राशि प्रति हेक्टेयर 13500 रुपये और असिंचित जमीन पर 8000 रुपये है। वहीं, जिन किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया है, उन्हें गारेंटेड उत्पादन में कमी आने पर बीमा कंपनियां उसी अनुपात में भुगतान करेंगी।
अभी बारिश से फसलों को किसी बड़े नुकसान की जानकारी हमारे पास नहीं आई है। प्रदेश के जिलों में बाढ़ भी रिपोर्ट नहीं की गई है। तीन दिनों में हुई बारिश से नुकसान के बाबत सर्वे रिपोर्ट मिलने पर ही कोई जानकारी दे सकूंगा।
-सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार