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सीनियर सिटीजन को सुरक्षा देगा ‘राष्ट्रीय आयोग’

Sat, 23 Nov 2013 11:20 AM IST
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
अतुल भारद्वाज/लखनऊ Updated Sat, 23 Nov 2013 11:20 AM IST
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national commission for senior citizen

देश में बुजुर्गों की खराब स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही नई राष्ट्रीय नीति लागू करेगी।

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इसके लिए नेशनल पॉलिसी फॉर सीनियर सिटीजन का खाका तैयार कर लिया गया है।

बुजुर्गों की समस्याओं को समझने और उनके निस्तारण के कदम उठाने को राष्ट्रीय सीनियर सिटीजन आयोग का गठन भी किया जाएगा।

शुक्रवार को अखिल भारतीय वरिष्ठ नागरिक महासंघ (एआईएससी) के 13वें दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन एआईएससीकॉन-2013 में यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव सुधीर भार्गव ने दी।

उनका कहना था कि देश में बुजुर्गों की संख्या और समस्या गंभीर हो गई है। इसके लिए एक ढांचागत व्यवस्था की जरूरत है।

नई राष्ट्रीय नीति इस जरूरत को ही पूरा करने का काम करेगी। इसमें उनकी विकास में भूमिका बनाए रखने के लिए विशेष प्रशिक्षण के साथ स्वास्थ्य और भोजन की गारंटी भी शामिल है।
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भार्गव का कहना था कि पहले से ही वृद्धों के लिए राष्ट्रीय वृद्ध देखभाल कार्यक्रम, राष्ट्रीय पहल जैसी योजनाएं हैं। वर्तमान में सीनियर सिटीजन के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जेरियाट्रिक हेल्थ वर्कर्स की मांग बढ़ गई है।
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उन्होंने राज्य सरकारों से मांग की कि सामुदायिक केंद्र जो ज्यादातर समय अनुपयोगी रहते हैं। उन्हें वृद्धों के लिए डे केयर सेंटर में तब्दील किया जाए।

यहां उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की मदद से स्वास्थ्य सेवाएं और फिजियोथेरेपी की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जा सकती है।

तो 2021 में होंगे 15 करोड़ बुजुर्ग
सुधीर भार्गव के मुताबिक 1991 में बुजुर्गों की संख्या 5.7 करोड़ थी। 2001 में यह बढ़कर 7.2 हो गई। 2011 में यह 10 करोड़ को पार कर चुकी है। यही हाल रहा तो 2021 में यह 15 करोड़ पार कर जाएगी।


मिलेगा 1600 करोड़
राष्ट्रीय नीति बनाने में केंद्र सरकार की सलाहकार टीम के सदस्य और एआईएससी के अध्यक्ष दिना चापके ने बताया कि राष्ट्रीय नीति जल्द लागू होने जा रही है। इसमें करीब 1600 करोड़ रुपये का बजट सरकारी मद में रहेगा।

एकल परिवार बने मुसीबत
एकल परिवार के चलन ने सामाजिक ढांचे को बिगाड़ा है। इसके चलते सीनियर सिटीजन को सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देना मुश्किल है।

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