मोदी व राहुल-प्रियंका आज चढ़ाएंगे यूपी का सियासी पारा
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उत्तर प्रदेश का सियासी पारा सोमवार को काफी ऊपर चढ़ा दिखाई दे सकता है। शीर्ष राजनेताओं की एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की दिलचस्प जंग भी देखने को मिल सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को जहां ग्रेटर नोएडा व मथुरा में रहेंगे, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा व ज्योतिरादित्य सिंधिया लखनऊ आ रहे हैं। पश्चिमी यूपी में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह भी सोमवार को ही मुजफ्फरनगर में रैली कर रहे हैं। स्वाभाविक है, ये नेता चुनावी समीकरणों के नजरिये से सियासी जमीन मजबूत करने की खातिर सियासी हथियारों को धार देने के साथ विरोधियों पर प्रहार भी करेंगे। इससे सियासी माहौल में गर्मी बढ़ना तय है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
भले ही लोकसभा चुनाव की अधिसूचना अभी जारी न हुई हो लेकिन सियासी पार्टियां राजनीतिक अंकगणित के लिहाज से देश में सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश की सियासी चौसर पर अपने-अपने समीकरणों के लिहाज से गोटें सजाने में जुट गई हैं। देश का सबसे बड़ा प्रदेश होने के साथ ही यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं। इस नाते प्रदेश के सियासी समीकरणों से निकलने वाले नतीजे न सिर्फ नेताओं की जीत-हार तय करते हैं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा व दशा भी निर्धारित करते हैं। इसीलिए लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हर सियासी दल अपने-अपने तरीके से उत्तर प्रदेश के समीकरणों को अनुकूल बनाने में जुटा है।
पीएम मोदी-राजनाथ से लेकर शाह तक साधेंगे समीकरण
प्रदेश में अगला एक पखवाड़ा सियासी गतिविधियों के लिहाज से सरगर्मी से भरा रहेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस एक पखवाड़े में चार दिन प्रदेश में रहेंगे। सोमवार को वह ग्रेटर नोएडा व मथुरा में रहेंगे। 15 फरवरी को झांसी में डिफेंस कारीडोर का शिलान्यास करेंगे। फिर 19 फरवरी को वह काशी में रहने वाले हैं। काशी के बाद उनका 24 को गोरखपुर में भाजपा की तरफ से आयोजित हो रहे किसानों के राष्ट्रीय अधिवेशन में आना तय हो चुका है।
हालांकि अभी तय नहीं है लेकिन संभावना जताई जा रही है कि मोदी 28 फरवरी को लखनऊ आ सकते हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव के पहले निवेश परियोजनाओं का शिलान्यास होना है। प्रदेश सरकार की कोशिश है कि शिलान्यास के साथ चारबाग से मुंशी पुलिया तक मेट्रो की शुरुआत लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले हो जाए। इसलिए सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री का समय पहले से ही मांगा जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के 13 फरवरी को प्रयागराज कुंभ में डुबकी लगाने के बाद मोदी भी किसी दिन प्रयाग आ सकते हैं। शाह भी 23 को गोरखपुर में किसानों के अधिवेशन में शामिल होंगे। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के भी 13 व 14 फरवरी तथा 23 व 24 फरवरी को लखनऊ में रहने के संकेत हैं।
वैसे तो प्रियंका गांधी का उत्तर प्रदेश की सियासत से नजदीकी वास्ता पुराना है। पर, अभी तक उनकी भूमिका अपनी मॉं सोनिया गांधी की सहायक और भाई की मददगार थी। इस बार वह पहली बार कॉंग्रेस के नेता के रूप में उत्तर प्रदेश आ रही हैं। वह भी उत्तर प्रदेश के उस क्षेत्र की प्रभारी होकर जहां से उनके परदादा और दादी की सियासत का डंका बजता था। जिस क्षेत्र में उनके पूर्वजों की पारिवारिक जड़ें भी हैं। प्रियंका भी इसे समझ रही होंगी। उन्हें एहसास है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों पर ही उनकी साख और जादू टिका हुआ है.। इसलिए वह आ भले ही राहुल के साथ रही हैं लेकिन उनके साथ लौटेंगी। वह चार दिन रुककर यूपी की सियासी नब्ज समझने की भी कोशिश करेंगी।
रालोद भी दम दिखाने में जुटा
चौधरी अजित सिंह सोमवार को मुजफ्फरनगर में रैली कर रहे हैं तो उनके पुत्र जयंत चौधरी 13 को मेरठ में रहने वाले हैं। उस दिन वह 16 अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। जयंत 17 को फिर उत्तर प्रदेश में ही बागपत आएंगे। अजित सिंह भी इसी मेरठ के फलावदा में रैली करेंगे। पिता-पुत्र के ये दौरे गन्ना किसानों की राजनीति पर भाजपा की घेराबंदी करने की कोशिश करेंगे।
सोमवार को ही दिल्ली में युवा राष्ट्रीय रालोद का दिल्ली में युवा अधिकार सम्मेलन है। रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे केमुताबिक मावलंकर हाल में हो रहे इस सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव, कांग्रेस के अहमद पटेल, माकपा के सीताराम येचुरी, आप के संजय सिंह, राजस्थान भाजपा के बागी नेता व भारत वाहिनी पार्टी के अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी, बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, तृणमूल कांग्रेस के नजमुद्दीन, गुजरात के हर्दिक पटेल, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष सहित गैर कांग्रेसी पार्टियों के युवा संगठनों के अध्यक्षों को बुलाया गया है।