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UP: इन 6 चुनौतियों से मोदी को करना होगा दो-दो हाथ

Sun, 18 May 2014 02:41 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 18 May 2014 02:41 PM IST
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Narendra Modi may face these problems in Uttar Pradesh

नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। चुनाव के दौरान मोदी ने कहा था, ‘उत्तर प्रदेश पर बड़ी जिम्मेदारी है। उसे भारत का भाग्य बदलने की शुरुआत करनी है।

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यूपी सामर्थ्यवान बना तो देश भी समर्थ बन जाएगा। उत्तर प्रदेश को इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।

उसे ‘सबका’ (सपा, बसपा, कांग्रेस) का विनाश करना है। लोगों को याद दिलाना है कि ‘सबका’ ने सबको लूटा है।’

हालांकि मोदी के लिए यह सब करना आसान नहीं है। उन्हें छह बड़ी चुनौतियों को पार करना होगा।

उप चुनावों में भी परीक्षा

Narendra Modi may face these problems in Uttar Pradesh

यूपी में भाजपा के 47 विधायकों में 12 मोदी लहर में सांसद बन गए हैं। इन स्थानों पर निकट भविष्य में उप चुनाव होगा।

भाजपा के कब्जे वाली इन सीटों में से एक पर भी पराजय मोदी की जीत की खुशी को कसैला बना देगी।

विधायकों की संख्या कम होने को लेकर सपा, बसपा और कांग्रेस भी उनकी पहुंच व पकड़ को लेकर सवाल उठा सकते हैं। इसके उपाय भी मोदी व अमित शाह को सोचने होंगे।

साथ ही मुलायम सिंह के त्यागपत्र से खाली होने वाली संसदीय सीट पर भी मजबूती से चुनाव लड़ने का इंतजाम करना होगा।

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आस्था के सवाल

Narendra Modi may face these problems in Uttar Pradesh

कोई भी इससे इन्कार नहीं कर सकता कि भाजपा को फर्श से अर्श पर पहुंचाने में यूपी के राम मंदिर आंदोलन ने बड़ी भूमिका निभाई।

सत्ता में आने के पहले संघ परिवार के साथ भाजपा भी अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की मुक्ति अभियान में मुखर रूप से शामिल होने के अलावा इसके नेता काशी के विश्वनाथ मंदिर और मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि स्थल की मुक्ति का सार्वजनिक रूप से संकल्प व्यक्त करते रहे हैं।

भाजपा की तरफ से कई बार यह भी कहा जा चुका है कि जिस दिन उसे केंद्र में पूर्ण बहुमत मिला, उसी दिन वह इन स्थलों के बारे में कुछ न कुछ ऐसा करेगी कि लोगों की इच्छा पूरी हो जाए।

अब जब जनता ने भाजपा की यह इच्छा पूरी कर दी है तो स्वाभाविक रूप से वह इन तीनों स्थलों के बारे में मोदी व भाजपा की भूमिका का इंतजार करेगी।

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महंगाई, भ्रष्टाचार व तुष्टीकरण से निजात पाना

Narendra Modi may face these problems in Uttar Pradesh

भाजपा को मिले बहुमत की चाहे जितनी व्याख्याएं की जाएं लेकिन यह बात मोदी व भाजपा के रणनीतिकार भी भलीभांति जानते होंगे कि उनके समर्थक और वोट देने वालों के मन में कहीं न कहीं इन स्थलों को लेकर भी टीस व इच्छाएं बैठी हुई हैं।

वे भाजपा व मोदी से महंगाई, भ्रष्टाचार, मुस्लिम तुष्टीकरण से निजात के साथ इन स्थलों के बारे में भी ठोस आश्वासन पाना चाहेंगे।

भाजपा व मोदी के पास अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की तरह इस बार यह तर्क भी नहीं है कि वह यह कैसे करें, सहयोगी दल समर्थन वापस ले लेंगे।

मोदी के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों की इन आकांक्षाओं को पूरा करना किसी परीक्षा से कम नहीं होगा।

कैसे पूरी करेंगे महत्वाकांक्षाएं

Narendra Modi may face these problems in Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश से जिस तरह का समर्थन मोदी को मिला है, उसके मद्देनजर यहां भाजपा का हर बड़ा नेता भावी सरकार में अपनी प्रमुख भूमिका चाहेगा।

डॉ. मुरली मनोहर जोशी अब तक जिस तरह की भूमिका में सामने आते रहे हैं, उसको देखते हुए यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाता है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी यूपी से और वह भी अटल बिहारी वाजपेयी की सीट से चुनकर दिल्ली पहुंचे हैं।
स्वाभाविक है कि राजनाथ भी उसी भूमिका में काम करना चाहेंगे जो उनकी वरिष्ठता बरकरार रखे।

कलराज मिश्र भले ही पहली बार सांसद चुने गए हों लेकिन वे भी अपनी वरिष्ठता के तर्क के साथ सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका चाहेंगे।

इन चेहरों से भी कम चुनौती नहीं

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मेनका गांधी पहले भी मंत्री रह चुकी हैं। इसलिए उन्हें भी मंत्रिमंडल में लेने का दबाव तो मोदी पर रहेगा ही। साथ ही उनके पुत्र वरुण गांधी की महत्वाकांक्षाएं भी मोदी की कसौटी बनेंगी।

उमा भारती के बारे में तो मोदी खुद ही केंद्र में बनने वाली सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका की बात कह चुके हैं। सातवीं बार चुनाव जीते संतोष गंगवार भी कुछ न कुछ खास ओहदा चाहेंगे।

पांचवीं बार सांसद चुने जाने वाले और गोरखपुर में लगातार भाजपा का झंडा फहरा रहे योगी आदित्यनाथ भी अपनी मेहनत का कुछ न कुछ मूल्यांकन जरूर चाहेंगे।

यूपी से भाजपा की बढ़त में पश्चिम के समीकरणों ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में संसद पहुंचने वाले हुकुम सिंह को लेकर भी मोदी पर दबाव रहेगा।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी चाहेंगे कि यूपी से इतनी बड़ी जीत की कुछ खुशी उनसे भी बांटी जाए।

ये समीकरण भी लेंगे इम्तिहान

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यही नहीं, यूपी से पांच जाट सांसद बने हैं। इसलिए मोदी को किसी न किसी रूप में किसी जाट चेहरे का भी समायोजन करना होगा।

क्योंकि खुद मोदी नहीं चाहेंगे कि जिन वोटों की बदौलत वे अजित सिंह व उनके पुत्र जयंत को पराजित करने में कामयाब रहे हैं, वे कहीं से भी दरकें।

इसी के साथ उन्हें यूपी में कुछ दलित व अति पिछड़े नेताओं को भी महत्वपूर्ण भूमिका देकर इस वोट बैंक को भी अपने साथ जोड़े रखने की जुगत सोचनी होगी।

वजह, वह कभी नहीं चाहेंगे कि उनके पास आए पिछड़े व दलित वोट किन्हीं कारणों से छिटकें।

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