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मार्ग प्रकाश का काम ठेके पर, फिर भी हो रहीं नियुक्तियां

Sat, 27 Mar 2021 11:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 27 Mar 2021 11:44 PM IST
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Nagar nigam
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लखनऊ। नगर निगम में आर्थिक तंगी है। इसी कारण मृतक आश्रितों की भर्ती पर भी रोक लगा दी गई थी, हालांकि विरोध के बाद नियुक्तियां की गईं। मगर दूसरी तरफ मार्ग प्रकाश विभाग में उन 11 संविदा कर्मचारियों की स्थाई नियुक्ति कर दी गई, जो आठ साल पहले हटा दिए गए थे।
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ऐसे में सिर्फ दस प्रतिशत कर्मचारियों की ही नियुक्ति किए जाने को लेकर मनमानी के आरोप लग रहे हैं। क्योंकि 123 कर्मचारी हटाए गए थे, मगर नौकरी सिर्फ 11 को दी गई। आरोप यह भी हैं कि बीते डेढ़ साल में नगर निगम ने शासन के आदेश पर कुल 29 नियुक्तियां गुपचुप तौर पर की हैं। इसमें नगर निगम से लेकर शासन तक जोड़-तोड़ की चर्चा आम है, क्योंकि शासन ने अपने ही पूर्व आदेश को बनाए रखने को लेकर न्यायालय में अपील नहीं की। शासन की ओर से संविदा कर्मियों को विनियमित करने को लेकर चार मार्च को जो पत्र भेजा गया था, उसमें कुल 13 कर्मचारियों के नाम शामिल थे, मगर उनमें से दो कर्मचारी नितिन गोयल व राहत हुसैन अपात्र पाए गए। संविदा कर्मियों को स्थाई नौकरी दे दी गई। इनमें इरफान, अखिलेश, इरशाद, अनिल कुमार, विनोद कुमार गुप्ता, समर मेंहदी, मकसूद आलम, नरेश प्रसाद, मजहर हुसैन, संत कुमार और मनोज कुमार शामिल हैं।
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शासन के आदेश के बाद करीब डेढ़ साल महानगर कल्याण मंडप में बाबू, माली और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिलाकर सात संविदा कर्मचारियों को स्थाई नौकरी दी गई थी। ऐसे ही उन 11 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी शासन के आदेश पर ज्वॉइनिंग दी गई थी, जिनको नियुक्ति बसपा सरकार में हुई थी। मगर विवाद के चलते उस समय उनकी ज्वॉइनिंग नहीं हो पाई थी।
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सभी की हो नियुक्ति
मार्ग प्रकाश विभाग के कर्मचारी नेता अशोक गोयल ने बताया कि 2012 में 123 संविदा कर्मचारी शासन के आदेश पर हटा दिए गए थे। उसके बाद से कर्मचारियों ने अलग-अलग कई याचिकाएं कोर्ट में दायर कीं। उसी में एक याचिका पर हुए अवमानना वाद के बाद शासन ने 11 को नियुक्ति कर दिया। बाकी को लेकर अभी कुछ नहीं किया। शासन को चाहिए वह सभी की नियुक्ति करे। सिर्फ 11 की ही नियुक्ति करना तो पक्षपात है।

शासन के आदेश पर दी गई नियुुक्ति
अपर नगर आयुक्त अमित कुमार का कहना है कि न्यायालय के आदेश के क्रम में शासन ने जो आदेश किया है, उसके तहत ही नियुक्ति दी गई है। नियुक्ति को लेकर संविदा कर्मियों की जो फाइनल सूची है, उसमें 73 लोग हैं जबकि नगर निगम में महज 23 पद ही रिक्त थे। ऐसे में 50 पद सृजन के लिए शासन को लिखा गया था ताकि सभी की नियुक्ति की जा सके। इसे लेकर अभी तक आदेश नहीं आया है। शासन ने जिन 11 लोगों केे नियुक्ति का आदेश दिया उनकी नियुक्ति का आदेश कर शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। निगम ने अपने स्तर पर 11 की कोई सूची नहीं बनाई थी। न्यायालय के आदेश पर आगे अपील शासन को करनी थी, क्योंकि याचिका में स्टेट पार्टी था।
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