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नगर निगम ने ठेकेदार को दिया गाड़ियां उठाने का ठेका, अपनी क्रेनें ठेकेदार को सौंपी, हर माह लेगा एक निश्चित रकम
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ट्रैफिक पुलिस के बाद अब नगर निगम ने भी नो-पार्किंग से गाड़ियों को उठाने का ठेका ठेकेदार को दे दिया है। अपनी नौ क्रेनें भी उसके हवाले कर दी हैं। उसके एवज में ठेकेदार नगर निगम को प्रति क्रेन एक निश्चित राशि देगा। क्रेनों के संचालन पर आने वाला खर्च और ड्राइवर का वेतन भी ठेकेदार ही देगा। इस संबंध में नगर निगम प्रशासन की ओर आदेश भी जारी कर दिया है।
नगर निगम अभी मुंशीपुलिया, फन मॉल, पत्रकारपुरम, चाइना बाजार रोड, लालबाग, हजरतगंज, सहारा गंज के आसपास नो-पार्किंग से गाड़ियों को उठाने का काम कर रहा था। उनका संचालन भी अब नगर निगम ने निजी फर्म मैसर्स ट्रीनिटी सर्विसेज को दे दिया है। इसके एवज में ठेकेदार नगर निगम को प्रति क्रेन प्रति माह 50 हजार रुपये देगा। इसके अलावा ठेकेदार जो अपनी आठ क्रेनें चलाएगा उसके एवज में वह 30 हजार रुपये महीना नगर निगम को देगा।
आय से अधिक हो रहा था संचालन पर खर्च
अपर नगर आयुक्त अमित कुमार का कहना है कि नौ क्रेनों के संचालन पर नगर निगम का जितना खर्च आ रहा था, उससे कम आय थी। इसके अलावा क्रेन कम होने से नगर निगम सभी जगह अभियान भी नहीं चला पा रहा था। उसको देखते हुए निजी फर्म को ठेका दिया गया है।
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ठेेके में ये रखी गईं शर्तें :
- सुबह नौ बजे से रात आठ बजे तक क्रेनें चलाई जाएंगी।
- चार पहिया का एक हजार और दो पहिया का तीन सौ रुपये नो-पार्किंग शुल्क लिया जाएगा।
- क्रेन से गाड़ी उठाने के दौरान गाड़ी में किसी तरह का नुकसान होने पर उसकी भरपाई ठेेकेदार करेगा।
- नगर निगम के बूथ से ही क्रेनों का संचालन करना होगा।
- क्रे न संचालन का रूट चार्ट देना होगा।
एक साल के लिए ठेका दिया गया है। नगर निगम के पास पर्याप्त क्रेनें नहीं थीं। ऐसे में पूरे शहर में अभियान भी नहीं चल पा रहा था। नो-पार्किंग से गाड़ियों को उठाने में कर्मचारियों की लापरवाही भी दिखी। इस सबके चलते निजी फर्म को काम दिया गया है। यदि वह गड़बड़ी करेगी तो काम वापस ले लिया जाएगा।
- अमित कुमार, अपर नगर आयुक्त
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नगर निगम अभी मुंशीपुलिया, फन मॉल, पत्रकारपुरम, चाइना बाजार रोड, लालबाग, हजरतगंज, सहारा गंज के आसपास नो-पार्किंग से गाड़ियों को उठाने का काम कर रहा था। उनका संचालन भी अब नगर निगम ने निजी फर्म मैसर्स ट्रीनिटी सर्विसेज को दे दिया है। इसके एवज में ठेकेदार नगर निगम को प्रति क्रेन प्रति माह 50 हजार रुपये देगा। इसके अलावा ठेकेदार जो अपनी आठ क्रेनें चलाएगा उसके एवज में वह 30 हजार रुपये महीना नगर निगम को देगा।
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आय से अधिक हो रहा था संचालन पर खर्च
अपर नगर आयुक्त अमित कुमार का कहना है कि नौ क्रेनों के संचालन पर नगर निगम का जितना खर्च आ रहा था, उससे कम आय थी। इसके अलावा क्रेन कम होने से नगर निगम सभी जगह अभियान भी नहीं चला पा रहा था। उसको देखते हुए निजी फर्म को ठेका दिया गया है।
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ठेेके में ये रखी गईं शर्तें :
- सुबह नौ बजे से रात आठ बजे तक क्रेनें चलाई जाएंगी।
- चार पहिया का एक हजार और दो पहिया का तीन सौ रुपये नो-पार्किंग शुल्क लिया जाएगा।
- क्रेन से गाड़ी उठाने के दौरान गाड़ी में किसी तरह का नुकसान होने पर उसकी भरपाई ठेेकेदार करेगा।
- नगर निगम के बूथ से ही क्रेनों का संचालन करना होगा।
- क्रे न संचालन का रूट चार्ट देना होगा।
एक साल के लिए ठेका दिया गया है। नगर निगम के पास पर्याप्त क्रेनें नहीं थीं। ऐसे में पूरे शहर में अभियान भी नहीं चल पा रहा था। नो-पार्किंग से गाड़ियों को उठाने में कर्मचारियों की लापरवाही भी दिखी। इस सबके चलते निजी फर्म को काम दिया गया है। यदि वह गड़बड़ी करेगी तो काम वापस ले लिया जाएगा।
- अमित कुमार, अपर नगर आयुक्त