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34 पन्नों में मौत का अहसास लिख मर गई ‘रहस्यमयी’ लड़की

Tue, 15 Dec 2015 04:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 15 Dec 2015 04:00 PM IST
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mysterious girl death case in kanpur

कानपुर के दबौली के एक मकान में सोमवार को संदिग्ध हालात में ज्योति (25) नाम लड़की की लाश मिली। मकान मालिक ने सबसे पहले युवती का शव कमरे में पड़ा देखा। उसके चेहरे पर रजाई थी। नाक और मुंह से खून निकल रहा था। लड़की और उसकी मौत सबके लिए रहस्य बनी हुई है।

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मकान मालिक की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पड़ताल की तो कमरे में एक कॉपी मिली जिसमें किसी गंभीर बीमारी का जिक्र है। युवती कहां की रहने वाली है, यहां क्या करती थी ये अनसुलझे सवाल पुलिस के लिए चुनौती हैं। युवती की छाती पर नीले निशान मिले और गले में स्टोल लिपटा था। उसकी हत्या की गई या फिर उसकी साधारण मौत हुई इसका भी खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर निर्भर है।
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पुलिस को कमरे से एक कॉपी मिली है जिसके 34 पन्नों में ज्योति ने अपनी किसी गंभीर बीमारी का जिक्र किया है। कॉपी के हरेक पन्ने पर बढ़ती बीमारी के साथ मौत के एहसास का जिक्र करते हुए अपनों से दूर रहने की बातें लिखीं गई हैं।
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कॉपी में यह भी लिखा है कि वह कहां है, और क्या कर रही है, यह भी घरवालों को नहीं पता। इसके अलावा भगवान से भी नाराजगी जताई गई है। कॉपी में लिखा है कि मेरा अंतिम संस्कार यह मानकर किया जाए कि मेरा अपना कोई नहीं है।

मकान मालिक विजय सिंह ने पुलिस को बताया कि ज्योति पहले भी उनके मकान के इसी कमरे में ढाई साल रह चुकी है। पिछली मर्तबा दिसंबर 14 में उसने कमरा खाली किया था, वह कहां से आती थी, और कहां जाती थी, इस बारे में न तो कभी उन्होंने पूछा और न ही ज्योति ने कभी कुछ बताया।

मकान मालिक को नहीं लगती थी बीमार

mysterious girl death case in kanpur

सीओ का कहना है कि किराएदारों से भी पूछताछ में यही पता चला है कि ज्योति अकेले ही रहती थी, किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी।

मकान मालिक के मुताबिक ज्योति कभी कभी यह कहकर जरूर निकलती थी कि वह किसी काम से दिल्ली जा रही है, फिर दो एक दिन में वापस भी आ जाती थी।

ज्योति के कमरे से नौकरी के आवेदन के कुछ कागज मिले हैं, जिसमें धनकुट्टी और हरबंश मोहाल के पते मिले हैं, इसके अलावा पेन कार्ड पर पिता का नाम रमेश सिंह चौहान लिखा मिला है।

फिलहाल तो यह पता किया जा रहा है, ज्योति कहां की रहने वाली है, और उसके माता-पिता कौन हैं। मामला हत्या का है कि आत्महत्या का, या फिर बीमारी से मौत हुई है इसका खुलासा तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने पर ही हो सकेगा।

पुलिस ने कॉपी पढ़ने के बाद कमरे की छानबीन की तो वहां एक भी डॉक्टर का पर्चा नहीं था। न ही कोई दवाइयों का डब्बा मिला। सिर्फ एलर्जी की एक दवा मिल सकी।

सवाल है कि ज्योति जब इतनी गंभीर बीमारी से पीड़ित थी तो दवा क्यों नहीं चल रही थी। वह पुरानी किराएदार थी तो पड़ोसियों ने उसके एक बार भी बीमार होने का एहसास नहीं किया। मकान मालिक के अनुसार वह बीमार नहीं लगती थी।

काफी देर तक करती थी मोबाइल

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कॉपी में लिखा है कि मेरी कभी भी मौत हो सकती है, इसलिए उसने अपनों से दूर रहना ही मुनासिब समझा है। सवाल यह है कि कॉपी में यह सब कब लिखा गया, कोई नहीं जानता। न तो तिथि पड़ी है न ही कोई को दूसरी कॉपी मिली है जिससे उसकी हैंडराइटिंग का मिलान हो सके।

मकान मालिक और किराएदारों की मानें तो ज्योति अक्सर कमरे के छज्जे पर काफी देर तक किसी से मोबाइल पर बातें किया करती थी, पुलिस ने शव के पास से बरामद मोबाइल को कब्जे में लेकर उसकी काल डिटेल खंगालनी शुरू कर दी है।

मकान मालिक विजय सिंह के प्राइवेट कर्मी के बेटे संजीव ने बताया कि ज्योति 1500 रुपये महीने का किराया समय से देती थी, रुपये कहां से लाती थी, इसकी जानकारी नहीं है।

इससे पहले जब ढाई साल रही थी तब वह कहीं नौकरी तो करती थी लेकिन कहां इस बारे में कुछ नहीं पता। वहीं पड़ोसियों के अनुसार ज्योति घर से कुछ घंटों के लिए कभी-कभी निकलती थी।

सवाल यह है कि यदि वह नौकरी नहीं करती थी तो अपना खर्चा कैसे चलाती थी। पुलिस को शक है कि कोई परिचित उसे नियमित रुपये देता होगा।

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