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मुजफ्फरनगर हिंसा: राहत शिविरों की सच्चाई परखेगी समिति
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sat, 14 Dec 2013 09:18 AM IST
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मुजफ्फरनगर हिंसा के बाद विस्थापितों के लिए बने शिविरों में
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मिलने वाली चिकित्सीय सहायता व अन्य राहत कार्यों की सच्चाई परखने के लिए
सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
मेरठ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित इस समिति को 18 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
राहत शिविरों में चिकित्सा के अभाव में बच्चों की बड़ी संख्या में मौत होने पर सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी के बाद उठाए गए कदम के बारे में गृह सचिव कमल सक्सेना ने शुक्रवार शाम को एनेक्सी के मीडिया सेंटर में जानकारी दी।
गृह सचिव ने बताया कि मेरठ के मंडलायुक्त मंजीत सिंह को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है और इस समिति में मुजफ्फरनगर व शामली के डीएम और सीएमओ शामिल किए गए हैं।
समिति को देखना होगा कि कितने राहत शिविर चल रहे हैं और उनमें कितने लोग मौजूद हैं। राहत शिविरों में हुई मौत के मामलों की असलियत की जानकारी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में अब तक कुल 11 लोगों की मौत होने की औपचारिक जानकारी है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।
मेरठ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित इस समिति को 18 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
राहत शिविरों में चिकित्सा के अभाव में बच्चों की बड़ी संख्या में मौत होने पर सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी के बाद उठाए गए कदम के बारे में गृह सचिव कमल सक्सेना ने शुक्रवार शाम को एनेक्सी के मीडिया सेंटर में जानकारी दी।
गृह सचिव ने बताया कि मेरठ के मंडलायुक्त मंजीत सिंह को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है और इस समिति में मुजफ्फरनगर व शामली के डीएम और सीएमओ शामिल किए गए हैं।
समिति को देखना होगा कि कितने राहत शिविर चल रहे हैं और उनमें कितने लोग मौजूद हैं। राहत शिविरों में हुई मौत के मामलों की असलियत की जानकारी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में अब तक कुल 11 लोगों की मौत होने की औपचारिक जानकारी है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।