तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं ने उठाई आवाज, कहा- ये कुरान के मुताबिक हो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन तलाक के खिलाफ एक बार फिर राजधानी की महिलाओं ने आवाज उठाई है। उनका कहना है कि तीन तलाक कुरान और शरीयत के मुताबिक होना चाहिए। लेकिन ऐसा न होने से महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है। यह विचार बृहस्पतिवार को लखनऊ चिंतन मंच की गोष्ठी में जुटी महिलाओं ने व्यक्त किए।
जयशंकर प्रसाद सभागार में महिला अधिकार पर गोष्ठी को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने कहा कि तीन तलाक का मसला सही हो सकता है अगर फैसले कुरान और शरीयत के मुताबिक हों। लेकिन दारुलकजा के काजी कुरान और शरीयत को ही बदल कर फैसले सुना रहे हैं।
उन्होंने विधवा महिलाओं के लिए दारुलकजा से आर्थिक मदद की भी मांग की। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की जकिया सोमन ने एक साथ तीन तलाक को महिला के अधिकार पर कुठाराघात बताया।
अपनी अक्ल व इल्म से गलतफहमी को दूर करें मुसलमान
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य डॉ. रुखसाना लॉरी ने कहा कि कुरान अल्लाह की किताब है। शरीयत में किसी सूरत में दखल मंजूर नहीं है। ये तीन तलाक व महिला अधिकार के मुद्दे राजनीतिक फायदे के लिए उठाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान अपनी अक्ल और अपने इल्म से इस गलतफहमी को दूर करें।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पूर्व कार्यकारिणी सदस्य और पूर्व अध्यक्ष विधि विभाग अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. मोहम्मद शब्बीर ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से मांग की कि एक कमेटी गठित करें जो उन देशों का अध्ययन कर सके जिन्होंने तलाक के मामले में बदलाव किया है।
प्रो. अतीक अहमद फारूकी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में तीन तलाक की वास्तविकता बताते हुए कहा कि इसका मकसद स्त्रियों का शोषण या उनके विरुद्ध अत्याचार करना नहीं बल्कि उन्हें मुसीबत से निजात दिलाना है। इस मौके पर डॉ. अंशू केडिया, डॉ. सबा तबस्सुम, डॉ. मोहम्मद इमरान खान ने भी विचार रखे।