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सूर्य नमस्कार पर विवाद : AIMPLB ने कहा- इस्लाम में इसकी अनुमति नहीं, कार्यक्रम से दूर रहें मुस्लिम छात्र-छात्राएं

Tue, 04 Jan 2022 11:57 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 04 Jan 2022 11:57 AM IST
सार

भारत सरकार की ओर से सभी राज्यों को एक जनवरी से सात जनवरी तक अपने स्कूलों में सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्देश दिया गया है। मौलाना ने कहा कि भारतीय संविधान में सभी धर्मों के लोगों को अपने अपने धर्म के अनुसार पूजा-प्रार्थना आदि करने की छूट दी गई है।

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Muslim students should stay away from Surya Namaskar program: Muslim Personal Law Board opposed the worship of any particular religion in schools
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड - फोटो : amar ujala

विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर स्कूलों में सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश का विरोध किया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने बयान जारी कर कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। यहां पर बहुसंख्यक समुदाय के रीति-रिवाज और पूजा पद्धति को सभी धर्मों के ऊपर थोपा नहीं जा सकता है। मौलाना ने सूर्य नमस्कार कार्यक्रम से मुस्लिम छात्र-छात्राओं को दूर रहने की हिदायत दी है।

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आदेश को मौलाना ने संविधान के खिलाफ बताया
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के जरिए सभी राज्यों को जारी किया गया आदेश को मौलाना ने संविधान के खिलाफ बताया। दरअसल, भारत सरकार की ओर से सभी राज्यों को एक जनवरी से सात जनवरी तक अपने स्कूलों में सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्देश दिया गया है। मौलाना ने कहा कि भारतीय संविधान में सभी धर्मों के लोगों को अपने अपने धर्म के अनुसार पूजा-प्रार्थना आदि करने की छूट दी गई है। इसलिए किसी भी धर्म विशेष की पूजा पद्धति को सभी धर्मों के लोगों पर थोपा नहीं जा सकता है। उनका कहना है कि इस्लाम व अन्य धर्मों में सूर्य को देवता मानकर उसकी पूजा करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान करते हुए इस तरह के आदेश को वापस ले। अगर सरकार वाकई देश से मोहब्बत का इजहार करने चाहती है तो उसे देश की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
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किसी खास धर्म की पूजा पद्धति को कराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए
मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि स्कूलों में सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं। इसलिए स्कूलों में किसी खास धर्म की पूजा पद्धति को कराने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस पर अगर सरकार को स्कूलों में कोई कार्यक्रम आयोजित कराना है तो उसे देशप्रेम से जुड़े हुए गीत-संगीत आदि का कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए ताकि उसमें सभी धर्मों के लोग उसमें बढ़-चढ़कर के हिस्सा ले सकें। स्कूलों में इस तरह का कार्यक्रम बिल्कुल भी आयोजित नहीं किया जाना चाहिए, जिससे अन्य धर्मों के लोगों को उसे करने में परेशानी पेश आए। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम और योजनाएं बनाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम छात्र-छात्राओं से आह्वान किया है कि वह स्कूलों में आयोजित होने वाले सूर्य नमस्कार के कार्यक्रम का बहिष्कार करें और उसमें बिल्कुल भी शामिल नहीं हों। उन्हें इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होने से बचना चाहिए क्योंकि इस्लाम उन्हें इस तरह के कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति नहीं देता है।

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