{"_id":"5b3df86f4f1c1b54238b4990","slug":"municipal-corporation-sealed-the-stationery-of-central-bank-in-a-house","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सेंट्रल बैंक ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार, सील स्टेशनरी दिलवा दें ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेंट्रल बैंक ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार, सील स्टेशनरी दिलवा दें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 05 Jul 2018 04:22 PM IST
विज्ञापन
डेमेो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बताया है कि लखनऊ नगर निगम ने उसकी 109 शाखाओं में काम आने वाली स्टेशनरी एक मकान में सील कर दी है। जनवरी से यह स्टेशनरी सील पड़ी हैं और अगर यह उसे नहीं मिलती है तो बेकार हो जाएगी, ऐसे में उसे स्टेशनरी जल्द से जल्द दिलवाई जाए।
हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए निर्णय दिया कि बैंक नगर निगम के समक्ष अपना मामला रखे, जिस पर निगम 15 दिन में उचित निर्णय लेगा। इस अनूठे मामले में बैंक के चीफ मैनेजर की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि उसने एक नागरिक के परिसर को अपना स्टोर बनाया था।
यहां वह अपने रीजनल ऑफिस की स्टेशनरी रखता था। उनके रीजनल ऑफिस के तहत 109 शाखाएं आती हैं। जिस नागरिक से बैंक ने यह परिसर किराये पर लिया था, उसने समय पर गृहकर नहीं भरा। इसकी वजह से नगर निगम ने उसके परिसर को सील कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए निर्णय दिया कि बैंक नगर निगम के समक्ष अपना मामला रखे, जिस पर निगम 15 दिन में उचित निर्णय लेगा। इस अनूठे मामले में बैंक के चीफ मैनेजर की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि उसने एक नागरिक के परिसर को अपना स्टोर बनाया था।
विज्ञापन
यहां वह अपने रीजनल ऑफिस की स्टेशनरी रखता था। उनके रीजनल ऑफिस के तहत 109 शाखाएं आती हैं। जिस नागरिक से बैंक ने यह परिसर किराये पर लिया था, उसने समय पर गृहकर नहीं भरा। इसकी वजह से नगर निगम ने उसके परिसर को सील कर दिया है।
विज्ञापन
नगर आयुक्त के समक्ष रखें मामला : हाईकोर्ट
डेमो
जनवरी 2018 में की गई इस कार्रवाई के बाद से बैंक को स्टेशनरी नहीं मिल पा रही है। इसके लिए निगम को बैंक ने फरवरी और अप्रैल में दो दफा लिखा ताकि वह सील खोले और बैंक अपना सामान स्टोर से निकाल सके। बैंक ने यह आश्वासन भी दिया कि वह परिसर मालिक को बकाया गृहकर चुकाने केलिए राजी करेगा। लेकिन समस्या बनी हुई है। ऐसे में हाईकोर्ट उचित निर्देश दे।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने अपने निर्णय मे कहा कि याची बैंक ने जो निवेदन नगर निगम से किया है, उसे उचित ढंग से नगर आयुक्त को प्रस्तुत करें। इस पर नगर आयुक्त उचित आदेश पारित करेंगे। इसके लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया जाता है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने अपने निर्णय मे कहा कि याची बैंक ने जो निवेदन नगर निगम से किया है, उसे उचित ढंग से नगर आयुक्त को प्रस्तुत करें। इस पर नगर आयुक्त उचित आदेश पारित करेंगे। इसके लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया जाता है।