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बेघर बताकर सरकारी योजना में ली जमीन, कुछ ने बेच दी कुछ ने किराए पर दी

Tue, 07 Dec 2021 02:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Dec 2021 02:00 AM IST
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Municipal corporation employees did a scam in the housing scheme
प्रवेंद्र गुप्ता
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नगर निगम ने करीब 15 साल पहले कुर्सी रोड स्थित आदिल नगर आवासीय योजना कर्मचारियों के लिए शुरू की थी। इसमें बेघर करीब 100 कर्मचारियों को महज 25 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से जमीन लीज पर दी गई थी।
लीज पर मिली जमीन को बेचा व किराये पर नहीं दिया जा सकता। फिर भी ज्यादातर ने फर्जीवाड़ा किया। किसी ने जमीन बेच दी तो किसी ने बिल्डिंग बनाकर किराये पर अस्पताल को दे दी, जबकि 200 से अधिक कर्मचारी अभी भी आवास के इंतजार में हैं।
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मालूम हो कि करीब दो दशक पहले आशियाना न होने की परेशानी बताकर कर्मचारियों ने आवासीय योजना लाने की मांग की थी। इस पर निगम प्रशासन ने कार्यकारिणी और सदन में प्रस्ताव लाकर आदिल नगर आवासीय योजना लॉन्च की।
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इसमें कर्मचारियों को बहुत सस्ती कीमत पर मकान बनाने के लिए 30 साल की लीज और फिर उसके बाद दो बार उतनी ही अवधि के लिए लीज करने का प्रावधान किया गया। इसमें तीन श्रेणी 1300 वर्ग फीट, 650 वर्ग फीट और 450 वर्ग फीट के करीब 100 प्लॉट काटे गए।
आवंटन के साथ शर्त थी कि कर्मचारी नौकरी के दौरान न तो जमीन को बेचेगा न किसी दूसरे को देगा। सेवानिवृत्ति के बाद ही कर्मचारी अनुमति लेकर बेच पाएगा।
आवंटन के बाद कर्मचारी न तो भू उपयोग बदलेगा और न ही किराए पर किसी अन्य को देगा। इसके बावजूद कर्मचारियों ने तथ्य छिपाकर जमीन को बेचा।
इसके अलावा आवासीय की जगह व्यावसायिक उपयोग किया और किराये पर भी उठा दिया। इसे लेकर कई बार शिकायत हुई, पर नगर निगम में मामले को दबा दिया गया।
मकान नहीं बनाया, बेचने की जुगत
योजना में दो प्लॉटों पर एक अस्पताल चल रहा है, जबकि ये दोनों प्लॉट दो अलग-अलग कर्मचारियों को आवंटित थे। शर्त के तहत आवंटन के पांच साल में मकान बनाना था, पर ऐसा नहीं हुआ। कई आवंटी ऐसे हैं, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद जमीन बेच दी। अब भी कई आवंटी रिटायरमेंट के बाद जमीन बेचने का इंतजार कर रहे हैं। उसके लिए एडवांस भी ले चुके हैं। इस समय जमीन का रेट करीब तीन हजार रुपये प्रति वर्ग फीट है।
ज्यादातर जुगाड़ियों को ही मिले प्लॉट
योजना में करीब 100 कर्मचारियों को प्लॉट मिले। इनमें से ज्यादातर जुगाड़ूवालों के हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, अभी भी 200 से अधिक ऐसे कर्मचारी हैं जो किराये का सरकारी मकान पाने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जिस आधार पर जमीन का आवंटन किया गया, उसी आधार पर जमीन का उपयोग किया जा रहा है कि नहीं। जो आवंटी नियम शर्तों के उल्लंघन के दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- यमुनाधर चौहान, सहायक नगर आयुक्त-डिप्टी कलेक्टर नगर निगम
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