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Munawwar Rana : लखनऊ अदब का गहवारा, मुझे यहीं दफनाना, आवास पर पहुंचकर अखिलेश यादव ने दी श्रद्धाजंलि

Tue, 16 Jan 2024 08:14 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 16 Jan 2024 08:14 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मुनव्वर राना के निधन की सूचना से दुख हुआ। उन्होंने कहा कि राना ने उर्दू साहित्य और शायरी को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

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Munawwar Rana: Lucknow is the cave of literature, bury me here, Akhilesh Yadav paid tribute
मुन्नवर राना के आवास पर परिवार से मुलाकात करते अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अदब तो रायबरेली के खून में है, पर मुझे इसी लखनऊ में दफनाना, ये भी अदब का गहवारा (पालना) है। अपनी वसीयत में दिवंगत शायर मुनव्वर राना ने यह इच्छा जताई थी। इसी के मुताबिक, उन्हें ऐशबाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले उनके शव को नदवा ले जाया गया जहां नमाजे जनाजा हुई, जिसे मौलाना जाफर हसनी नदवी ने पढ़वाया। इसके बाद शव को ऐशबाग ले जाया गया।

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मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना ने बताया कि वे कहते थे कि अदब का गहवारा है लखनऊ। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि रायबरेली का भी अदब से गहरा ताल्लुक है, बावजूद इसके वे चाहते थे कि उन्हें लखनऊ में ही दफनाया जाए। हमने उनकी वसीयत के हिसाब से ही उन्हें दफनाया। सुमैया ने बताया कि बीते वर्ष साढ़े तीन महीने तक वेंटीलेटर पर थे। इस बार उनकी तबीयत बिगड़ी तो मेदांता ले जाया गया। वहां तबीयत बिगड़ी तो उन्हें पीजीआई ले आए। उसके बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और रविवार रात उनकी मौत हो गई।
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रविवार रात को पीजीआई से उनके पार्थिव शरीर को लालकुआं स्थित उनके आवास पर लाया गया था। सुबह से ही उनके घर पर श्रद्धांजलि देने आने वालों का तांता लगा था। नाते-रिश्तेदारों की भीड़ के बीच जाने-माने लेखक, शायर व गीतकार जावेद अख्तर, मशहूर शायर व उनके जिगरी यार हसन काजमी भी मौजूद रहे। सैफ बाबर, तारिक कमर, प्रोफेसर जां निसार, सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा समेत कई जानी-मानी हस्तियां भी पहुंचीं। यहां मौजूद लोगों की आंखें मुनव्वर राना के बेबाक अंदाज-ए-बयां को याद कर नम हो गईं। इस बीच सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचा, एआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार और देवबंद से काफी लोग आवास पर मौजूद रहे।
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जनाजे में बड़ी तादाद में मौजूद रहे प्रशंसक
मशहूर शायर मुनव्वर राना का जनाजा सोमवार दोपहर करीब 12.30 बजे हुसैनगंज के लालकुआं स्थित उनके घर से नदवा के लिए निकला। 20 मिनट का सफर तय कर शव वाहन से उनके पार्थिव शरीर को नदवा कॉलेज लाया गया जहां मौलाना जाफर हसन नदवी ने नमाजे जनाजा अदा कराई। यहां भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। इसके बाद उनके जनाजे को सीधे ऐशबाग कब्रिस्तान ले जाया गया। वहां पर काफी तादाद में लोग पहले से ही मौजूद थे। ऐशबाग कब्रिस्तान पहुंचते ही लोग अपने चहेते शायर के जनाजे को कंधा देने के लिए आगे बढ़े। ऐशबाग पुलिस चौकी से कब्रिस्तान तक गली के अंदर लोगों का हुजूम लगा था।

सभी ने इस तरह व्यक्त की संवेदनाएं

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जनाजे में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

हिंदुस्तान की तहजीब का एक हिस्सा गिरा है आज : जावेद अख्तर
जावेद अख्तर ने कहा कि हकीकत है कि आज शायरी का, उर्दू का और हिंदुस्तान की तहजीब का नुकसान हुआ है। हिंदुस्तान की तहजीब का यह एक अहम हिस्सा था, जो गिर गया। एक नस्ल धीरे-धीरे जा रही है। निदा फाजली, राहत साहब और अब मुनव्वर साहब का जाना। इसकी भरपाई तो नहीं हो पाएगी। पर हकीकत है जो आता है वो जाता है। उनके परिवार को हिम्मत मिले। उन्हें हमेशा शायरी के लिए ही जानेंगे लोग। मां को उन्होंने पहली बार शायरी का हिस्सा बनाया। उनका शेर कहने का अपना रंग था।

लिखकर जगाने का काम किया : अखिलेश यादव
प्रदेश के बड़े शायर थे, उन्होंने लिखकर लोगों को जगाने का काम किया। मैंने खुद देखा है कि उनकी मां पर लिखी लाइनों को सुनने के लिए लोग निवेदन करते थे। ऐसे शायर कम आते हैं, जो मन में है उसे बिना छिपाए कह जाते थे। कहा कि आजम खां साहब उन्हें लेकर पहली बार सैफई आए, फिर अक्सर मुलाकात होती थी। भगवान उनके परिवार को दुख सहने को शक्ति दे। मुनव्वर राना की शायरी को याद करते हुए कहा- तो अब इस गांव से रिश्ता हमारा खत्म होता है, फिर आंखें खोल ली जाएं कि सपना खत्म होता है।

अपनी शायरी के लिए याद रखे जाएंगे : इब्राहिम अल्वी
उर्दू पत्रकारिता से जुड़े पूर्व संपादक अहमद इब्राहिम अल्वी ने मुनव्वर राना को याद करते हुए बताया कि उन्होंने जिंदगी के हर पहलू पर शायरी की थी। महबूबा की गोद से लेकर मां के आंचल तक मुनव्वर राना के हर शेर याद रखे जाएंगे।

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