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स्नातक में बहुविकल्पीय सवाल आधारित परीक्षा अब खत्म होगी, बीएससी में हर सेमेस्टर में होंगे प्रैक्टिकल
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर बहुविकल्पीय सवाल आधारित परीक्षा (एमसीक्यू) जल्द समाप्त होगी। इसके साथ ही बीएससी में अब हर सेमेस्टर में प्रैक्टिकल की व्यवस्था शुरू हो जाएगी। इस समय लविवि में बीएससी में सिर्फ सम सेमेस्टर में ही प्रैक्टिकल हो रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हिसाब से लविवि में स्नातक पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। कई अन्य बड़े बदलाव भी देखने को मिलेंगे।
लविवि में इस समय जारी व्यवस्था के अनुसार, सम सेमेस्टर की परीक्षा बहुविकल्पीय सवाल आधारित प्रणाली पर ओएमआर पर होती है। ज्यादातर विद्वानों का मानना है कि यह व्यवस्था अच्छी नहीं है। स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में विश्लेषण और लिखने की क्षमता विकसित करने के लिए लिखित प्रणाली पर परीक्षा होनी चाहिए। इसको देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हिसाब से होने वाले बदलाव में उसको शामिल किया जाएगा।
प्रदेश सरकार की ओर से लागू किए जा रहे न्यूनतम समान पाठ्यक्रम में भी यह व्यवस्था है कि सभी राज्य विवि में 70 फीसदी पाठ्यक्रम एक समान हों और उनके पेपर भी एक तरह हों। ऐसे में लविवि अपनी परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करेगा। इसके साथ ही प्रैक्टिकल की उपयोगिता को देखते हुए विज्ञान संकाय के हर सेमेस्टर में प्रैक्टिकल को शामिल किया जाएगा।
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लविवि में चलेंगे सिर्फ ऑनर्स कोर्स
स्नातक स्तर पर ऑनर्स पाठ्यक्रमों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए लविवि ने स्नातक स्तर पर सिर्फ ऑनर्स पाठ्यक्रम संचालित करने का फैसला किया है। कुलपति ने पहले भी साफ किया है कि विवि परिसर में स्नातक स्तर पर सिर्फ ऑनर्स पाठ्यक्रम का संचालन होगा। वहीं डिग्री कालेजों में सामान्य स्नातक पाठ्यक्रमों का संचालन होगा।
चार साल के स्नातक में जितने साल पढ़ें, उतने का मिलेगा प्रमाणपत्र
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्नातक पाठ्यक्रम चार साल का करने की बात कही गई है। इसके साथ ही हर स्तर पर विद्यार्थियों को एक प्रमाणपत्र प्राप्त करके कोर्स छोड़ने का विकल्प देने की बात भी की गई है। इसको देखते हुए लविवि ने स्नातक के चौथे साल का पाठ्यक्रम भी तैयार करने की योजना बनाई है। ऐसा होने पर स्नातक पाठ्यक्रम में पहले साल की पढ़ाई पूरी करने पर विद्यार्थी को डिप्लोमा, दो साल पर एडवांस डिप्लोमा, तीन साल की पूरी करने पर डिग्री दी जाएगी। चौथे साल की परीक्षा पास करने पर उसे रिसर्च ग्रेजुएशन की उपाधि मिलेगी। इतना ही नहीं रिसर्च ग्रेजुएशन की उपाधि वाले विद्यार्थियों को परास्नातक पाठ्यक्रम में सीधे दूसरे साल में दाखिला मिलेगा। इस तरह चार साल का स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को परास्नातक पाठ्यक्रम सिर्फ एक साल का ही करना होगा।
नई शिक्षा नीति के तहत होगा बदलाव
कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि लविवि में इस साल 10 खूबियों वाला देश का सर्वश्रेष्ठ सीबीसीएस पाठ्यक्रम लागू किया गया है। परास्नातक पाठ्यक्रम के बाद अब स्नातक स्तर पर सिलेबस में बदलाव होगा। यह बदलाव नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसमें प्रैक्टिकल के पार्ट पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
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लविवि में इस समय जारी व्यवस्था के अनुसार, सम सेमेस्टर की परीक्षा बहुविकल्पीय सवाल आधारित प्रणाली पर ओएमआर पर होती है। ज्यादातर विद्वानों का मानना है कि यह व्यवस्था अच्छी नहीं है। स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में विश्लेषण और लिखने की क्षमता विकसित करने के लिए लिखित प्रणाली पर परीक्षा होनी चाहिए। इसको देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हिसाब से होने वाले बदलाव में उसको शामिल किया जाएगा।
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प्रदेश सरकार की ओर से लागू किए जा रहे न्यूनतम समान पाठ्यक्रम में भी यह व्यवस्था है कि सभी राज्य विवि में 70 फीसदी पाठ्यक्रम एक समान हों और उनके पेपर भी एक तरह हों। ऐसे में लविवि अपनी परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करेगा। इसके साथ ही प्रैक्टिकल की उपयोगिता को देखते हुए विज्ञान संकाय के हर सेमेस्टर में प्रैक्टिकल को शामिल किया जाएगा।
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लविवि में चलेंगे सिर्फ ऑनर्स कोर्स
स्नातक स्तर पर ऑनर्स पाठ्यक्रमों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए लविवि ने स्नातक स्तर पर सिर्फ ऑनर्स पाठ्यक्रम संचालित करने का फैसला किया है। कुलपति ने पहले भी साफ किया है कि विवि परिसर में स्नातक स्तर पर सिर्फ ऑनर्स पाठ्यक्रम का संचालन होगा। वहीं डिग्री कालेजों में सामान्य स्नातक पाठ्यक्रमों का संचालन होगा।
चार साल के स्नातक में जितने साल पढ़ें, उतने का मिलेगा प्रमाणपत्र
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्नातक पाठ्यक्रम चार साल का करने की बात कही गई है। इसके साथ ही हर स्तर पर विद्यार्थियों को एक प्रमाणपत्र प्राप्त करके कोर्स छोड़ने का विकल्प देने की बात भी की गई है। इसको देखते हुए लविवि ने स्नातक के चौथे साल का पाठ्यक्रम भी तैयार करने की योजना बनाई है। ऐसा होने पर स्नातक पाठ्यक्रम में पहले साल की पढ़ाई पूरी करने पर विद्यार्थी को डिप्लोमा, दो साल पर एडवांस डिप्लोमा, तीन साल की पूरी करने पर डिग्री दी जाएगी। चौथे साल की परीक्षा पास करने पर उसे रिसर्च ग्रेजुएशन की उपाधि मिलेगी। इतना ही नहीं रिसर्च ग्रेजुएशन की उपाधि वाले विद्यार्थियों को परास्नातक पाठ्यक्रम में सीधे दूसरे साल में दाखिला मिलेगा। इस तरह चार साल का स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को परास्नातक पाठ्यक्रम सिर्फ एक साल का ही करना होगा।
नई शिक्षा नीति के तहत होगा बदलाव
कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि लविवि में इस साल 10 खूबियों वाला देश का सर्वश्रेष्ठ सीबीसीएस पाठ्यक्रम लागू किया गया है। परास्नातक पाठ्यक्रम के बाद अब स्नातक स्तर पर सिलेबस में बदलाव होगा। यह बदलाव नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इसमें प्रैक्टिकल के पार्ट पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।