मुलायम की सीख, चुगलखोरों से सावधान रहना
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बृहस्पतिवार को नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुगलखोरों से सावधान किया। उन्होंने कहा कि चुगली करने वाले मतभेद पैदा करा देते हैं। ऐसे ही लोगों ने एक बार अलग होने पर चौधरी चरण सिंह और राजनारायण को फिर एक नहीं होने दिया।
मुलायम सपा मुख्यालय में लोकबंधु राजनारायण की 29वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राजनारायण राजनीति के इतिहास पुरुष हैं। उन्हें पूरी तरह नहीं समझा गया। आने वाले समय में उनका सही मूल्यांकन होगा।
कहा, जहां अन्याय होता था, राजनारायण सबसे आगे दिखते थे। उनसे मेरे भावनात्मक संबंध थे। 1967 में मेरे पहले चुनाव अभियान का उद्घाटन राजनारायण ने ही किया था। उन्हीं के प्रयासों से चौधरी चरण सिंह के बीकेडी और सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं में एका हुआ।
डॉ. लोहिया के निधन के बाद समाजवादियों ने चौधरी साहब को नेता माना और भारतीय लोकदल नाम से पार्टी बनाई। राजनारायण, चौधरी साहब को बहुत मानते थे।
...इसलिए इंदिरा के खिलाफ लड़े थे राजनारायण
मुलायम बोले, उन्हीं के कहने पर 1977 में राजनारायण ने इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव लड़ा था। कई लोग इसके पक्ष में नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि राजनारायण लोकसभा में नहीं पहुंच पाएंगे, लेकिन चौधरी साहब ने कहा कि वे चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे भी।
सपा मुखिया ने कहा, एक दौर ऐसा आया जब चौधरी साहब और राजनारायण के बीच मतभेद हो गए। हम लोग चौधरी साहब के साथ थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं एमएलए बनने के लिए चरण सिंह के साथ चला गया हूं। मैंने और जनेश्वर मिश्र ने राजनारायण को फिर चौधरी साहब के साथ लाने की कोशिश की।
बातचीत हो गई थी, लेकिन कुछ चुगलखोरों ने उन्हें एक नहीं होने दिया। वे जानते थे कि राजनारायण साथ आ गए तो चौधरी साहब किसी और की बात नहीं सुनेंगे। उन्होंने पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं से कहा, राजनीति में चुगलखोरों से सावधान रहना। ये इधर की बात उधर लगाकर मतभेद करा देते हैं।
समारोह की अध्यक्षता पूर्व मंत्री भगवती सिंह और संचालन नारद राय ने किया। मंत्री ओमप्रकाश सिंह, पारसनाथ यादव, शतरुद्र प्रकाश, रंजना वाजपेयी, शारदा प्रताप शुक्ल, मधु गुप्ता ने भी विचार रखे।
वो मुझे गाली दें, तो भी उनके जिंदाबाद के नारे लगाना
मुलायम ने कहा, चौधरी साहब से नाराज होकर राजनारायण उनके गढ़ बागपत में चुनाव लड़ने चले गए। इससे चौधरी साहब घबरा गए थे।
उन्होंने क्षेत्र के सभी प्रमुख लोगों को बुलाकर सख्त निर्देश दिए कि राजनारायण यदि मुझे गाली दें तो भी उनके जिंदाबाद के नारे लगाने हैं। चुनाव में कहीं भी बवाल नहीं होना चाहिए। लोगों ने ऐसा ही किया। चौधरी साहब को डर था कि यदि बवाल हो गया तो चुनाव स्थगित हो सकता है।
1977 में मुझे सीएम बनाना चाहते थे चरण सिंह
मुलायम सिंह ने खुलासा किया कि 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने पर चौधरी चरण सिंह मुझे प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन कुछ तिकड़मी लोग ऐसा नहीं चाहते थे।
उन्होंने कहा, चरण सिंह उन्हें बहुत मानते थे। 1977 में वे मुझे मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। उन्होंने मुझे दिल्ली बुलाया। इसकी भनक लगते ही तिकड़मी लोग सक्रिय हो गए। इटावा से जुड़े दो नेताओं ने (जिनमें एक की मृत्यु हो चुकी है) मेरे खिलाफ लामबंदी में राजनारायण के पैर पकड़ लिए।
'मैं मुख्यमंत्री बनने के लिए नहीं था उत्साहित'
मुलायम ने कहा, चौधरी साहब की सीएम बनाने की भले ही इच्छा रही हो लेकिन मैं बहुत उत्साहित नहीं था। लग रहा था कि उम्र कम है, अभी मुख्यमंत्री बन गया तो राजनीति खत्म हो जाएगी। पता नहीं आगे सीएम बनने का मौका मिले या नहीं। बाद में मुझे सहकारिता मंत्री बनाया गया।
एक मौका आया जब मैं नेता विरोध दल भी था और पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष भी। कई नेताओं को यह हजम नहीं हो रहा था। उन्होंने तिकड़म करके चौधरी साहब से शिकायतें कीं।
चौधरी साहब ने रवि राय को मुझसे यह पूछने के लिए भेजा कि मैं प्रदेश अध्यक्ष बने रहना चाहता हूं या नेता विरोधी दल। मैंने प्रदेश अध्यक्ष बने रहने और नेता विपक्ष का पद छोड़ने की पेशकश की। चौधरी साहब ने मुझे दिल्ली बुलाया।
पूछा, नेता विरोधी दल की सुविधाएं छोड़कर प्रदेश अध्यक्ष क्यों बनना चाहते हो ? मैंने कहा, आपके खिलाफ पार्टी में तिकड़म न हो, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहता हूं। बाद में चौधरी साहब ने तिकड़मी नेताओं को झटका देते हुए मुझे दोनों पदों पर रहने दिया।