'अपनी अलग छवि बनाएं मंत्री और अफसर'
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने प्रदेश के मंत्रियों और अफसरों से अलग छवि बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में यूपी की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इसलिए यहां की सरकार और सपा नेताओं के आचरण और व्यवहार पर सभी की नजरें लगी हैं। वह स्वाधीनता दिवस पर विक्रमादित्य मार्ग स्थित सपा मुख्यालय में ध्वजारोहण के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।
मुलायम ने कहा कि रंगभेद, नस्लभेद, गैर बराबरी, अन्याय व शोषण के खिलाफ लड़ाई हमारी पार्टी की नीति है।
नेताजी को याद आए बापू
मुलायम ने कहा कि पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को इसे अपने आचरण एवं व्यवहार में उतारना होगा। उन्होंने जंग-ए-आजादी में शहादत देने वाले सेनानियों के साथ ही देश की सीमाओं पर और आंतरिक सुरक्षा में लगे सुरक्षा बलों के अधिकारियों, जवानों की भी प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, 1857 में प्रारंभ हुए स्वतंत्रता आंदोलन की चरम परिणति 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के साथ हुई जब महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दिया था।
गांधी जी ने सपना देखा था कि आजाद भारत में गांव भी समृद्ध होंगे। पूरे देश की खुशहाली में किसानों की भूमिका की अनदेखी नहीं हो सकेगी।
समाजवादी नारा लगाते थे, मांग रहा है हिन्दुस्तान रोटी, कपड़ा और मकान। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा संघर्षरत रहे।
जनता की कसौटी पर खरा उतरना मकसद
सपा मुखिया ने कहा कि बाहरी और आंतरिक सुरक्षा की समस्याएं आज भी हैं। देश में बड़ी तादाद में गरीबों को दो वक्त भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है।
गरीबी और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई में उत्तर प्रदेश को अपना दायित्व निभाना है। इसके लिए प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों सभी को अपनी अलग छवि बनानी होगी।
हमें यह देखना होगा कि किसी भी स्तर पर गैर बराबरी न रहे। जनता ने हम पर जो विश्वास प्रकट किया है उस कसौटी पर खरा उतरना ही होगा।
इन्होंने दर्ज कराई अपनी उपस्थिति
इस मौके पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, राष्ट्रीय महासचिव किरनमय नंदा, प्रदेश प्रवक्ता एवं मंत्री राजेन्द्र चौधरी, मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, प्रदेश सचिव एसआरएस यादव तथा कोषाध्यक्ष राज किशोर मिश्र, डॉ. अशोक वाजपेयी, रविदास मेहरोत्रा, मनोज पारस, सुभाष पासी, विजय मिश्रा, जरीना उस्मानी, डॉ. मधु गुप्ता, साहब सिंह, जावेद आब्दी, राजपाल कश्यप, डॉ. आशालता सिंह, सुनील यादव, आनन्द भदौरिया समेत हजारों कार्यकर्ता मौजूद थे।