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Mukhtar Ansari: मुख्तार की मौत की होगी न्यायिक और मजिस्ट्रेटी जांच, न्यायाधीश एक महीने में देंगी रिपोर्ट
Sat, 30 Mar 2024 02:16 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 30 Mar 2024 02:16 PM IST
सार
माफिया मुख्तार अंसारी की मौत की न्यायिक जांच व मजिस्ट्रेटी दोनों जांच की जाएगी। इस संबंध में आदेश दे दिए गए हैं। न्यायिक जांच की रिपोर्ट एक महीने में दी जाएगी।
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- फोटो : फाइल फोटो।
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विस्तार
माफिया मुख्तार अंसारी की मौत की न्यायिक जांच व मजिस्ट्रेटी दोनों जांच की जाएगी। इस संबंध में आदेश दे दिए गए हैं। न्यायिक जांच की रिपोर्ट एक महीने में दी जाएगी। वहीं, बांदा की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश देते हुए इसके लिए अपर जिलाधिकारी राजेश कुमार को नियुक्त किया है। एडीएम राजेश कुमार जेल में बंद विचाराधीन बंदी मुख्तार की मौत के मामले की उत्तर प्रदेश कारागार मैनुअल 2022 के प्रावधानों के तहत जांच करेंगे।
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जिलाधिकारी ने उनसे 15 दिन के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा है। पांच बार विधायक रहे मुख्तार की बृहस्पतिवार को बांदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। मुख्तार के परिजनों ने आरोप लगाया कि जेल में उसे धीमा जहर दिया गया था। मुख्तार की बृहस्पतिवार रात दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी जिसके बाद से ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की थी।
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अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया साइट पर कहा था कि हर हाल में और हर स्थान पर किसी के जीवन की रक्षा करना सरकार का सबसे पहला दायित्व और कर्तव्य होता है। सरकारों पर निम्नलिखित हालातों में से किसी भी हालात में, किसी बंधक या कैदी की मृत्यु होना, न्यायिक प्रक्रिया से लोगों का विश्वास उठा देगा-
- थाने में बंद रहने के दौरान
- जेल के अंदर आपसी झगड़े में
- जेल के अंदर बीमार होने पर
- न्यायालय ले जाते समय
- अस्पताल ले जाते समय
- अस्पताल में इलाज के दौरान
- झूठी मुठभेड़ दिखाकर
- झूठी आत्महत्या दिखाकर
- किसी दुर्घटना में हताहत दिखाकर
ऐसे सभी संदिग्ध मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच होनी चाहिए। सरकार न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर जिस तरह दूसरे रास्ते अपनाती है वो पूरी तरह गैर कानूनी हैं। जो हुकूमत जिंदगी की हिफाजत न कर पाये उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं। उप्र ‘सरकारी अराजकता’ के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। ये यूपी में ‘क़ानून-व्यवस्था का शून्यकाल है।