'ठेले में सब्जियों की तरह बिक रहे हैं मुस्लिम फतवे'
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संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि योग का विरोध करने वाले अज्ञानी हैं। कुछ लोगों को तो योग के विरोध का रोग लग गया है। उनकी अज्ञानता का का इलाज भी योग ही है। अज्ञानी लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं।
योग को मजहब से न जोड़े। इसका मजहब से कोई भी रिश्ता नाता नहीं है। यह सेहत से जुड़ा मसला है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का विरोध करने वालों से मैं पूछना चाहता हूं कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बजाय क्या अंतरराष्ट्रीय रोग दिवस मनाया जाना चाहिए।
नकवी मंगलवार को लखनऊ में मोदी सरकार के एक साल पूरा होने पर केंद्र सरकार की उपलब्धियां पत्रकारों से साझा कर रहे थे। जिम में लोग जाते हैं, कल कोई खड़ा हो जाए कि यह अंग्रेजों व क्रिश्चयन मानसिकता का प्रतीक है। मैं तो बस इतना कहूंगा कि जो इसे मजहब से जोड़ते हैं तो पहले वे अपना ज्ञान ठीक करें।
योग से एलर्जी है तो दूर रहें
यदि इसके बावजूद उन्हें योग से एलर्जी है वे इससे दूर रहें। जिन्हें योग दिवस से एतराज है तो वे इसे सेहत समारोह के रूप में मना सकते हैं। जहां तक योग का सवाल है तो यह सेहत के खजाने की सोने की चाभी है।
उन्होंने कहा कि आज कल जिस तरह ठेले पर सब्जियां बिक रही हैं उसी तरह फतवे भी बिक रहे हैं। जिसे खरीदना होता है वे इन ठेलों पर जाकर खरीद लेता है। यही वजह है कि आज फतवे का सम्मान खत्म हो गया है। उलेमा हर एक मामले में तुरंत फतवा जारी कर देते हैं। इसलिए इसकी गंभीरता ही अब नहीं बची है।
फतवा जारी करने वाले उलेमाओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जितनी ताकत वे इसमें लगाते हैं यदि उसकी आधी प्रतिशत ताकत भी वे कौम की शिक्षा व सशक्तिकरण में लगा दें तो मुस्लिमों का भला होता और देश भी भला हो जाता। कुछ उलेमा केवल कौम को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। बहुत दिनों तक गुमराह करने का सिलसिला अब नहीं चलेगा।