{"_id":"5ba49dce867a5523e25698a0","slug":"muharram-processions-today-high-security-in-lucknow","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दसवीं मोहर्रम पर सुरक्षा व्यवस्था मुक्म्मल, रंग बिरंगे ताजिये संग निकलेंगे जुलूस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दसवीं मोहर्रम पर सुरक्षा व्यवस्था मुक्म्मल, रंग बिरंगे ताजिये संग निकलेंगे जुलूस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 21 Sep 2018 12:59 PM IST
विज्ञापन
मोहर्रम पर व्यवस्था का जायजा लेते पुलिस कर्मी
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहर्रम के जुलूस को लेकर लखनऊ में सारी सुरक्षा व्यवस्था मुकम्मल कर ली गई है। जगह-जगह भारी पुलिस फोर्स तैनात है। जवानों ने कई रूटों पर मार्च करके हालात का जायजा लिया ताकि किसी भी तरह का कोई तनाव न पैदा हो। कुछ ही देर में रंग-बिरंगे ताजिये लेकर अकीदतमंद जुलूस निकालेंगे और हुसैन की याद में मातम करेंगे।
इससे पहले विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित नाजिम साहब के इमामबाड़े से बृहस्पतिवार को हजारों सोगवारों के बीच अलम शब-ए-आशूर निकाला गया। हर तरफ से बस ...या हुसैन ...या हुसैन की सदाओं के साथ सिसकियां ही सुनाई दे रही थीं। हर अजादार मातम-ए-हुसैनी का सोगवार था।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे पहले विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित नाजिम साहब के इमामबाड़े से बृहस्पतिवार को हजारों सोगवारों के बीच अलम शब-ए-आशूर निकाला गया। हर तरफ से बस ...या हुसैन ...या हुसैन की सदाओं के साथ सिसकियां ही सुनाई दे रही थीं। हर अजादार मातम-ए-हुसैनी का सोगवार था।
विज्ञापन
जुलूस विक्टोरिया स्ट्रीट से अकबरी गेट, नक्खास व बिल्लौचपुरा होता हुआ गिरधारी सिंह इंटर कालेज, मंसूर नगर तिराहा शिया यतीम खाना होता हुआ दरगाह हजरत अब्बास में सम्पन्न हो गया। इस दौरान अजादारों ने मातम कर करबला के शहीदों को पुरसा दिया।
विज्ञापन
अलब शब-ए-जाशूर का जुलूस
- फोटो : amar ujala
जुलूस के पहले मौलाना कल्बे जव्वाद ने मजलिस को खिताब करते हुए यौम-ए-आशूर पर रोशनी डाली। मौलाना ने कहा कि करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन पूरी कोशिश करते रहे कि उन्हें आगे जाने दिया जाए, मगर यजीदी फौज उन्हें करबला में ही रुकने पर मजबूर करती रही।
आखिरकार आशूर की शब आ गई और यजीदी फौज ने हमला शुरू कर दिया तो इमाम हुसैन ने एक रात की मोहलत इबादते इलाही के लिए मांगी। इमाम ने अपने जांनिसार करबला के 72 शहीदों के साथ पूरी रात इबादत की। और शुक्र-ए-खुदा अदा किया। सुबह होते ही यजीदी फौज ने तीरों की बारिश शुरू कर दी। दोपहर तक करबला में सब शहीद हो गए।
आखिरकार आशूर की शब आ गई और यजीदी फौज ने हमला शुरू कर दिया तो इमाम हुसैन ने एक रात की मोहलत इबादते इलाही के लिए मांगी। इमाम ने अपने जांनिसार करबला के 72 शहीदों के साथ पूरी रात इबादत की। और शुक्र-ए-खुदा अदा किया। सुबह होते ही यजीदी फौज ने तीरों की बारिश शुरू कर दी। दोपहर तक करबला में सब शहीद हो गए।