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संसद का क्या अपमान, शर्मसार करने में यूपी आगे

Fri, 14 Feb 2014 01:45 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 14 Feb 2014 01:45 PM IST
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MPs abusing the parliament rules, suspended

गुरुवार को लोकसभा में जो हुआ वह देश की गरिमा पर कलंक लगा गया। पीटो, मारो और जाने मत दो जैसे शब्द संसद जैसे पावन भवन में काफी देर गूंजते रहे।

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आंध्र के विजयवाड़ा से सांसद राजगोपाल ने काली मिर्च का पाउडर उड़ाकर कई सदस्यों की तबीयत बिगाड़ दी। लोकसभा में तार-तार हुई संसदीय मर्यादा की चर्चा के बीच यूपी के गुंडे नेताओं की हरकतें भी जानना चाहेंगे आप।
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दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा भी इस मामले में पीछे नहीं रही है। विधानसभा के सौ साल के इतिहास में कम से कम दो मौके ऐसे आए जब सदस्यों ने विरोध दर्ज कराने में एक-दूसरे का सिर तक फोड़ डाला।

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जब फिक्स माइक हटा दिए गए

MPs abusing the parliament rules, suspended

16 दिसंबर 1993 को प्रदेश विधानसभा के गौरव को शायद पहली बार बट्टा लगा, जब सपा-बसपा की मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली सरकार को बहुमत हासिल करना था। बहुमत के आंकड़े पर भाजपा ने ऐतराज जताया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष धनीराम वर्मा ने बहुमत सरकार को बहुमत में बताया।

विवाद इतना बढ़ा कि सपा-बसपा के विधायकों ने भाजपा सदस्यों पर हमला बोल दिया। माइक व पेपरवेट जमकर उछाले गए। इसमें केशरीनाथ त्रिपाठी व हरिकिशन श्रीवास्तव जैसे वरिष्ठ विधायकों समेत करीब 33 सदस्य घायल हुए थे। सभी को अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद से ही सदन में फिक्स माइक लगाए गए व पेपरवेट तो हमेशा के लिए हटा ही दिए गए।

लात-घूंसे और चप्पलें भी चलीं

MPs abusing the parliament rules, suspended

इसी तरह 21 अक्तूबर 1997 को भी विधानसभा में बाहुबल का खुलकर प्रयोग हुआ। भाजपा के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बहुमत साबित करने के दौरान पक्ष-विपक्ष के विधायक एक-दूसरे से भिड़ गए। जमकर लात-घूंसे व चप्पलें चलीं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र इस दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस तोड़फोड़ में सदन के दरवाजों व झरोखों में लगे बेल्जियम के बहुमूल्य ग्लास भी टूट गए।

इस घटना की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज अचल बिहारी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कमेटी भी बनाई गई, पर उनकी रिपोर्ट पर कभी अमल नहीं किया गया। छोटी-मोटी झड़पों के बगैर तो विधानसभा का शायद ही कोई सत्र समाप्त हुआ हो।

16 मिनट में पास हुआ प्रस्ताव, तो भिड़े सदस्य

MPs abusing the parliament rules, suspended

2004 में मुलायम सिंह यादव की ही सरकार में सदन में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बसपा ने जब हंगामा किया तो सपा सदस्य बसपाइयों से जा भिड़े व एक-दूसरे पर खुलकर लात-घूंसों की बौछार की।

नवंबर 2011 में भी विधानसभा में जब मुख्यमंत्री मायावती ने सूबे को चार राज्यों में विभाजित करने का प्रस्ताव 16 मिनट में पास करा लिया तो सत्ताधारी व विपक्षी दल में जमकर भिड़ंत हुई। सदन के अंदर तो माहौल गर्म रहा ही, बाहर भी प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठियां बरसाईं।

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