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'वोट उसे दें, जिसका दामन दागदार न हो'
मनोज श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 29 Mar 2014 02:15 PM IST
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कभी तीन तलाक तो कभी वन्देमातरम, फैमिली प्लानिंग और पर्सनल ला जैसे मुद्दों पर अपनी गैरपरंपरागत टिप्पणियों को लेकर मौलाना कल्बे सादिक सुर्खियों में आते रहे हैं।
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मौलाना की पहचान रही है कि वे कौम के बीच अपनी आलोचना की परवाह किए बिना दिल की आवाज को न केवल तरजीह देते हैं बल्कि उसको मुखर भी करते हैं।
सियासत पर भी अपनी बात बेलौस ढंग से करते हैं। पर इस बार लोकतंत्र के महासमर के दौरान वे खामोशी ओढ़े हुए हैं।
‘अमर उजाला’ ने मुलाकात कर खामोशी का सबब जानना चाहा तो बिफर से जाते हैं। बोले, क्या कहूं और किससे? सियासत के सूरते हाल को देखकर बेहद दुखी हूं।
कोई सांप्रदायिकता को हथियार बना रहा है तो कोई जाति को। भ्रष्टाचार पर शर्म नहीं है। हथकंडों से चुनाव जीतने की कोशिशें तेज हैं। एक बड़ी आबादी सड़क, पानी, बिजली और दवा को लेकर मारामारी से परेशान है।
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इसको लेकर कोई फिक्रमंद ही नहीं दिखता। सेक्युलर व डेमोक्रेट हिन्दुस्तान सिर्फ कागजों में हैं, हकीकत में कुछ और होता जा रहा है।
कहते हैं कि मैंने इग्लैंड का चुनाव देखा है, इराक सहित अन्य देशों का भी। पर इतनी फूहड़ता और आरोप-प्रत्यारोप कहीं नहीं होता। सब अपना एजेंडा बताते हैं, उसी आधार पर वोट पड़ते हैं।
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यहां तो केवल नकारात्मकता का बोलबाला है। सोचिए, जो लोग सांसद बनने के पहले लड़ रहे हैं, जीतने के बाद क्या करेंगे? फिर भी मुसलमानों से मेरी अपील है कि वोट उसे दें जिसके कान, आंख ठीक हों।
चाहे वह जिस समुदाय का हो। जो जाति, समुदाय में अंतर किए बिना काम करे। साथ ही उसका दामन भी दागदार न हो।